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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, इटावा डीएफओ और चालक की मौत, 3 घायल

Published: Tue, 29 Sep 2026 01:38 PM (GMT+05:30)

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिरोजाबाद के नगला खंगर क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे में इटावा के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) ...और पढ़ें

विकास नायक।

विकास नायक।

HighLights

  1. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिरोजाबाद में हुआ सड़क हादसा

  2. इटावा के डीएफओ विकास नायक और चालक देवांश की मृत्यु

  3. हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, सैफई में उपचार

जागरण संवाददाता, इटावा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को फिरोजाबाद के नगला खंगर थाना क्षेत्र में किलोमीटर संख्या 69 पर हुए हादसे में इटावा के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) विकास नायक और उनके चालक देवांश की मौत हो गई। हादसे में डीएफओ के साथ कार में सवार 65 वर्षीय केशवती गंभीर रूप से घायल हो गईं। दूसरी गाड़ी में सवार पति-पत्नी भी घायल हुए हैं। तीनों घायलों का उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में उपचार चल रहा है।

पुलिस के अनुसार, राजस्थान के नागौर जिले के मूल निवासी 36 वर्षीय विकास नायक अपनी एक्सयूवी-700 से चालक 25 वर्षीय देवांश और 65 वर्षीय केशवती पत्नी जगदीश सिंह के साथ लखनऊ से नोएडा की ओर जा रहे थे। नगला खंगर थाना क्षेत्र में किलोमीटर संख्या 69 पर उनकी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। दुर्घटना में विकास नायक और चालक देवांश की मौत हो गई, जबकि केशवती गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें उपचार के लिए सैफई भेजा गया।

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ये स्कार्पियो सवार थे स्कॉर्पियो वाले पति पत्नी थे

हादसे में दूसरी गाड़ी स्कार्पियो में सवार 61 वर्षीय डेविड ब्रेन डिसूजा और उनकी 59 वर्षीय पत्नी ममता डिसूजा भी घायल हुई हैं। दोनों राजारहाट, उत्तर कोलकाता, पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं और गुरुग्राम से लखनऊ की ओर जा रहे थे। दोनों का भी सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में उपचार चल रहा है।

हादसे की सूचना मिलते ही एक्सप्रेसवे सुरक्षा टीम और पुलिस मौके पर पहुंच गई। डीएफओ कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है।

इस प्रकरण के बाद आए थे चर्चा में

डीएफओ विकास नायक जून 2025 में इटावा जिले में तैनात हुए थे। उनके यहां आने के बाद इटावा सफारी के पास संरक्षित वन भूमि में स्थित मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार का प्रकरण उनेक समक्ष आया। वन अदालत में चले इस मामले में कोई साक्ष्य प्रस्तुत न होने के बाद उन्होंने मजार के ध्वस्तीरण का आदेश दिया। वन विभाग ने इस मजार का ध्वस्तीकरण कराया। इस प्रकरण के बाद वे चर्चा में आए थे। वन विभाग के पौधारोपण अभियान में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके अचानक इस तरह से चले जाने से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में शोक का माहौल है।

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डीएफओ विकास नायक की फाइल फोटो।

2025 में फिरोजाबाद से इटावा आए थे

विकास नायक का जन्म राजस्थान के नागौर जिले में 11 नवंबर 1990 को हुआ था। वे शुरू से पढ़ने में मेधावी रहे। बी टेक करने के बाद वर्ष 2019 में उनका चयन भारतीय वन सेवा आईएफएस में हुआ। इसके बाद वे डीएफओ के पद पर फिरोजाबाद से स्थानांतरित होकर जून 2025 इटावा आए।

सारस संरक्षण और सरसईनावर झील के विकास में महत्वपूर्ण योगदान

उन्होंने सारस संरक्षण और सरसईनावर झील के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। सिटी वन के विकास में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इटावा सफारी पार्क के पास वन विभाग की जमीन में बीहड़ वाले सैयद के नाम से बनी मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार के ध्वस्तीकरण के मामले के बाद उनकी छवि एक तेज तर्रार अधिकारी की हो गई थी।

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डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल सैफई में जानकारी लेते हुए।

जिलाधिकारी ने जताया शोक

जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने उनके निधन को जिले के लिए एक बड़ी क्षति बताया। कहा कि वे एक अच्छे अधिकारी थे। उनके नेतृत्व में वन विभाग में कई काम अच्छे हो रहे थे। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

वन विभाग की नीतियों की थी अच्छी सूझबूझ

रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि डीएफओ विकास नायक अपने कार्यों से हम सबके बीच हमेशा बने रहेंगे। उन्होंने वन विभाग की नीतियों को जिस सूझबूझ से लागू किया वह हमेशा याद रहेगा। उनका मार्गदर्शन हम लोगों को बहुत प्रेरणा देता था। इस्कान महासचिव डा राजीव चौहान ने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण में उनकी बहुत दिलचस्पी थी। सरसईनवार झील में सारस के संरक्षण को लेकर उन्होंने अच्छे कार्य किए। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी।

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