फर्रूखाबाद में किसान सम्मान निधि में फर्जीवाड़ा, 147 नाबालिगों समेत 4,297 अपात्रों के खातों में पहुंची रकम
फर्रुखाबाद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहाँ 147 नाबालिगों सहित कुल 4,297 अपात्र ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
फर्रुखाबाद में किसान सम्मान निधि में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर।
147 नाबालिगों सहित 4,297 अपात्र लाभार्थी सूची में मिले।
कृषि विभाग ने भुगतान रोका, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी।
धीरज अग्निहोत्री, फर्रुखाबाद। सोतेपुर गांव में आठ वर्षीय बच्ची, जो खेती का ककहरा भी नहीं जानती, वह किसान सम्मान निधि की लाभार्थी सूची में किसान है। मिस्तनी गांव का 12 वर्षीय बालक भी सूची में किसानी कर रहा है। जिले में हेरफेर कर किसान सम्मान निधि की लूट के खेल में कुल 4,297 अपात्र सत्यापन में पकड़े गए हैं। इनमें 147 नाबालिग हैं, जिनको कागजों में किसान दिखा दिया गया।
फर्जीवाड़े का राजफाश होते ही कृषि विभाग ने इनकी किस्तों पर रोक लगाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। वर्ष 2019 में शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य छोटे और जरूरतमंद किसानों को हर साल छह हजार रुपये की आर्थिक मदद तीन समान किस्तों में देना है। नियमानुसार लाभ पाने के लिए लाभार्थी के नाम वर्ष 2019 से पहले जमीन दर्ज होनी चाहिए, उसका बालिग होना जरूरी है और परिवार में सिर्फ एक ही सदस्य इसका हकदार हो सकता है।
इसके अलावा जनप्रतिनिधि, सरकारी व अर्द्धसरकारी कर्मचारी, आयकर दाता, पेंशनभोगी (10,000 रुपये या अधिक तक) और डाक्टर-वकील जैसे पेशेवर इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। इसके बावजूद तहसील और कृषि विभाग की घोर अनदेखी के कारण अपात्रों के नाम सूची में दर्ज होते रहे। फर्रुखाबाद में पति-पत्नी दोनों द्वारा लाभ लेने के 405, संदिग्ध विवरण वाले 1,010 और गलत वरासत के जरिये हक जताने वाले 2,735 मामले पकड़े गए हैं।
निगरानी में बरती गई यह लापरवाही सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कानपुर मंडल और आसपास के क्षेत्रों में भी ऐसे ही मामले उजागर हुए हैं। कन्नौज में 61, बांदा में 78, इटावा में 217 और जालौन में 120 नाबालिगों के नाम लाभार्थी सूची से बाहर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त महोबा में 5,438, कानपुर देहात में करीब एक हजार और हमीरपुर में 12,638 अपात्रों का भुगतान रोका गया है।
उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने स्पष्ट किया कि योजना में नाबालिगों को लाभ देने का कोई प्रविधान नहीं है। फिलहाल सभी संदिग्ध खातों का भुगतान रोककर जिम्मेदारी तय की जा रही है, और जांच पूरी होते ही दोषी कर्मचारियों व फर्जीवाड़े के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
