हवा में चली गोली भी ले सकती है जान, समझें हर्ष फायरिंग का विज्ञान
गोरखपुर में करवा चौथ पर हुई घटना ने हर्ष फायरिंग के खतरों को उजागर किया है। बैलिस्टिक विज्ञान और कानून ...और पढ़ें
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आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। रामगढ़ताल थाना क्षेत्र में करवा चौथ पूजन के दौरान महिला के चेहरे पर अचानक गोली/छर्रा लगने की हालिया घटना ने एक बार फिर खुले में या लापरवाही से की जाने वाली फायरिंग के खतरों को सामने ला दिया है।
अक्सर शादी-समारोह, उत्सव या छतों पर खड़े होकर लोग हवा में गोली चला देते हैं, यह मानकर कि इसका कोई नुकसान नहीं होगा। हालांकि, बैलिस्टिक विज्ञान और कानून दोनों ही इसे गंभीर अपराध और जानलेवा मानते हैं।
हवा में दागी गोली नीचे आकर कैसे बनती है जानलेवा?
भौतिक विज्ञान के नियमों के अनुसार, हवा में दागी गई कोई भी गोली गायब नहीं होती, बल्कि गुरुत्वाकर्षण के कारण वह जमीन पर लौटती है। इसे फोरेंसिक विज्ञान में ''सेलिब्रेटरी या फालिंग बुलेट सिंड्रोम'' कहा जाता है। जब बंदूक से गोली सीधे ऊपर या किसी कोण पर चलाई जाती है, तो वह हवा के दबाव और गुरुत्वाकर्षण के कारण एक निश्चित ऊंचाई (लगभग 1 से 3 किलोमीटर) तक जाकर रुकती है। इसके बाद वह नीचे गिरना शुरू करती है।
नीचे गिरते समय गोली पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण 60 से 90 मीटर प्रति सेकंड (लगभग 200 से 300 फीट प्रति सेकंड) की रफ्तार पकड़ लेती है। बैलिस्टिक अध्ययनों के मुताबिक, मानव त्वचा को भेदने के लिए गोली की गति 45 से 60 मीटर प्रति सेकंड और इंसानी खोपड़ी को भेदने के लिए लगभग 60 से 100 मीटर प्रति सेकंड की गति पर्याप्त होती है।
यही वजह है कि नीचे गिरती हुई गोली किसी भी व्यक्ति के सिर, कंधे या चेहरे पर गिरकर उसे गंभीर रूप से घायल कर सकती है या मौके पर ही जान ले सकती है। धातु के पैलेट (छर्रे) दागने वाली एयरगन भी कम दूरी पर बेहद खतरनाक होती हैं। आंख, नाक या चेहरे के नाजुक हिस्सों पर लगने पर ये गहरे घाव और जीवनभर की दिव्यांगता का कारण बन सकती हैं।
हर्ष फायरिंग पर रोक और कानूनी प्रविधान
भारत में जश्न या सार्वजनिक आयोजनों में फायरिंग पूरी तरह गैरकानूनी है। केंद्र सरकार और न्यायपालिका ने इसके लिए सख्त कानूनी ढांचे तय किए हैं। आयुध अधिनियम के तहत विशेष रूप से हर्ष फायरिंग को अपराध की श्रेणी में जोड़ा गया। इसके तहत सार्वजनिक सभाओं, धार्मिक स्थलों, विवाह या किसी भी समारोह में लापरवाही या उतावलेपन से हथियार का इस्तेमाल करने पर दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रविधान है। लाइसेंसी हथियार से हर्ष फायरिंग होने की दशा में प्रशासन तुरंत शस्त्र लाइसेंस को निलंबित या निरस्त करता है और हथियार जब्त कर लिया जाता है। लाइसेंस केवल आत्मरक्षा के लिए दिया जाता है, प्रदर्शन या उल्लास जताने के लिए नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश:
सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि बंदूक रखने का अधिकार जश्न में गोलीबारी की छूट नहीं देता। आयोजकों और मैरिज हाल संचालकों पर भी यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे परिसर में शस्त्र लेकर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित करें। हर्ष फायरिंग में घायल होने की स्थिति में जीवन को संकट में डालने वाली उपेक्षा और खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाने के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है। यदि गोली लगने से किसी की मौत हो जाती है, तो आरोपी पर गैर-इरादतन हत्या अथवा सीधे हत्या का मुकदमा दर्ज होता है, जिसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
गोरखपुर में पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
गोरखपुर जिले में पूर्व में भी हर्ष फायरिंग के चलते कई दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिले के ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में बरात के दौरान दूल्हे के दोस्तों या रिश्तेदारों द्वारा की गई फायरिंग से डीजे ऑपरेटर, बैंड बाजा बजाने वाले और बरात देखने आए मासूम बच्चों के गोली लगने की कई घटनाएं घट चुकी हैं।
कई मामलों में सड़क पर हो रही बरात में नीचे से हवा में गोली चलाई गई, जो छतों या बालकनी से बरात देख रही महिलाओं या बच्चों को जा लगी। ऐसे मामलों में गोरखपुर पुलिस व जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को जेल भेजने के साथ-साथ उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने और मैरिज हाल स्वामियों को नोटिस जारी करने जैसी कड़ी कार्रवाइयां की हैं।
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