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Raksha Bandhan 2026 : 70 वर्ष बाद इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ योग-संयोग, राखी बांधना विशेष फलदायी

By Gurudeep Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Updated: Sun, 23 Aug 2026 07:18 PM (IST)

Raksha Bandhan 2026 इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन 70 साल बाद कई शुभ योगों जैसे शतभिषा नक्षत्र और अतिगंड योग में मनाया जाएगा, जिससे यह विशेष फलदायी होगा।

Raksha Bandhan 2026 इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं।

Raksha Bandhan 2026 इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं।

HighLights

  1. शतभिषा नक्षत्र व अतिगंड योग में भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधेंगी बहनें

  2. 28 अगस्त को कुंभ राशि में रहेंगे चंद्रमा, भद्रा सूर्योदय से पहले होगी समाप्त

जागरण संवाददाता, कौशांबी। Raksha Bandhan 2026 रक्षाबंधन इस बार भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व ही नहीं, ज्योतिष दृष्टि से भी खास संयोग लेकर आ रहा है। 28 अगस्त को शतभिषा नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बनेगा। इसके साथ ही चंद्रमा शनि की राशि कुंभ में विचरण करेंगे। सूर्योदय से पहले भद्रा भी समाप्त हो जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन संयोगों के बीच रक्षासूत्र बांधना विशेष फलदायी माना जा रहा है।

सावन मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान कर लक्ष्मीनारायण जी की पूजा करते हैं। पूजा के बाद भाई की कलाई पर बहनें राखी बांधती हैं।

Raksha Bandhan 2026 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सावन पूर्णिमा पर भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में राखी बांधना शुभ है। इस बार 28 अगस्त को शतभिषा नक्षत्र व अतिगंड योग के शुभ संयोग में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सात दशक बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी विशेष रहेगी।

सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, जिसे उनकी स्वराशि माना जाता है। वहीं गुरु कर्क राशि में स्थित होंगे, जो उनकी उच्च राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक तथा गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जुड़ा ग्रह माना जाता है। चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे। ग्रहों की इस स्थिति को रक्षाबंधन के लिए शुभ माना जा रहा है। पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी और इसी उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।

मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी, जिसे राजा बलि ने भगवान को दे दी थी। इससे खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया और खुद उनके द्वारपाल बन गए। भगवान विष्णु के बैकुंठ न लौटने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। वे एक गरीब ब्राह्मणी का रूप धारण कर पाताल लोक गईं। उन्होंने राजा बलि को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधा। जब राजा बलि ने उपहार मांगने को कहा तो माता लक्ष्मी अपने असली रूप में आकर भगवान विष्णु को मांग लिया। राजा बलि ने अपने वचन और स्नेह का मान रखते हुए भगवान विष्णु को मुक्त कर दिया।

रक्षाबंधन पर बहनों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर भद्रा को लेकर रहती है। धार्मिक मान्यताओं में भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। इसी उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
- पंडित जयराम शुक्ल, ज्योतिषाचार्य।

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