कैंसर और गंभीर बीमारियों की पहचान होगी आसान, अब लोहिया संस्थान 2 करोड़ की मशीन से होगी नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग जांच
लखनऊ के लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में दो करोड़ की लागत से अत्याधुनिक नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) मशीन स्थापित की गई है। ...और पढ़ें

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HighLights
लोहिया में 2 करोड़ की NGS मशीन स्थापित।
कैंसर, आनुवंशिक रोगों की सटीक पहचान संभव।
निजी लैब से 60-70% सस्ती होगी जांच।
विकास मिश्र, लखनऊ। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अब जटिल बीमारियों की पहचान के लिए अत्याधुनिक नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) जांच की सुविधा मिलने जा रही है। संस्थान के बायोकेमेस्ट्री विभाग में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से एनजीएस मशीन स्थापित कर दी गई है। अगले माह दीपावली के बाद जांच शुरू की जाएगी।
इस तकनीक से मरीजों के डीएनए और आरएनए में मौजूद आनुवंशिक बदलावों का विश्लेषण कर बीमारियों के कारणों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इससे कैंसर, आनुवंशिक विकार, दवा प्रतिरोधी टीबी और गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियों की जांच को नई दिशा मिलेगी।
अभी कई जटिल रोग की सटीक पहचान के लिए मरीजों को अलग-अलग तरह की जांच करानी पड़ती है। एनजीएस तकनीक से एक साथ बड़ी संख्या में आनुवंशिक हिस्सों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे बीमारी से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों का पता लगाने में मदद मिलती है।
एनजीएस जांच की सुविधा वाला दूसरा संस्थान बनेगा लोहिया
बायोकेमेस्ट्री विभाग के अध्यक्ष डा. मनीष कुलश्रेष्ठ के अनुसार, कैंसर के कुछ मामलों में ट्यूमर की कोशिकाओं में मौजूद आनुवंशिक बदलावों की पहचान उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होती है। एनजीएस जांच से ऐसे बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है, जिनके आधार पर मरीज के लिए सही उपचार विकल्पों का आकलन किया जाएगा।
खासकर उन मामलों में यह तकनीक कारगर हो सकती है, जहां कैंसर का प्रकार स्पष्ट करने या उपलब्ध लक्षित उपचारों की संभावनाओं का आकलन करने के लिए विस्तृत आणविक जांच की जरूरत होती है। एनजीएस जांच शुरू होने के बाद लोहिया प्रदेश का दूसरा सरकारी चिकित्सा संस्थान होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध होगी। अभी एनजीएस से जांच सिर्फ कल्याण सिंह सुपर स्पेशलियटी कैंसर संस्थान में की जा रही है।
निजी लैब से 50-60 प्रतिशत सस्ती होगी जांच
संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि कई आनुवंशिक बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं, लेकिन उनकी सही पहचान में लंबा समय लग जाता है या कई बार पता ही नहीं चलता है। एनजीएस जांच से बीमारी से जुड़े जीन में मौजूद बदलावों का पता लगाया जा सकेगा।
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कई मामलों में यह जांच परिवार में बीमारी के जोखिम के आकलन में भी कारगर है। लोहिया में इसके शुरू होने से गंभीर बीमारियों की जांच के लिए मरीजों की कारपोरेट अस्पतालों पर निर्भरता कम हो जाएगी। संस्थान में एनजीएस मशीन से जांच दर 10 हजार से 50 हजार रुपये तक होगी, जो निजी पैथोलाजी की तुलना में करीब 60-70 प्रतिशत सस्ती है।
