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लखनऊ: फार्मेलिन से भरा टैंकर पलटने के 18 घंटे बाद भी किसान पथ की एक लेन बंद, केमिकल का असर कम करने की कोशिश जारी

Published: Tue, 27 Oct 2026 02:07 PM (IST)

लखनऊ के किसान पथ पर फार्मेलिन से भरा टैंकर पलटने से सड़क पर रसायन फैल गया, जिससे 18 घंटे बाद भी एक लेन बंद है।

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HighLights

  1. किसान पथ पर फार्मेलिन टैंकर पलटने से हादसा।

  2. 18 घंटे बाद भी एक लेन यातायात बंद।

  3. केमिकल के असर से लोगों को जलन हुई।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। किसान पथ पर फार्मेलिन रसायन से भरे टैंकर के पलटने के 18 घंटे बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। सड़क पर फैले केमिकल का असर कम करने के लिए मिट्टी डाली गई है।

एहतियात के तौर पर किसान पथ की एक लेन पर यातायात बंद रखा गया। सोमवार शाम हुए हादसे के बाद आसपास के गांवों और हास्टलों में रहने वाले करीब 10 हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। केमिकल की वजह से लोगों की आंख, नाक, गले और त्वचा में जलन होने लगी।

बीकेटी थाना क्षेत्र में किसान पथ पर मानपुर-बाना और नगुवामऊ गांव के बीच सोमवार शाम करीब 6:30 बजे फार्मेलिन से भरा टैंकर टायर फटने के कारण अनियंत्रित होकर पलट गया था। टैंकर संडीला, हरदोई से फार्मेलिन लेकर गुडंबा स्थित प्लाईवुड फैक्ट्री जा रहा था। हादसे के बाद टैंकर से रसायन का रिसाव होने लगा।

सूचना पर बीकेटी पुलिस, अग्निशमन विभाग और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंचीं। रसायन के फैलाव को देखते हुए घटनास्थल के दोनों ओर करीब पांच सौ मीटर तक बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया गया।

वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से गुजारा गया। टीमों ने कई घंटे तक मशक्कत कर रिसाव और केमिकल के फैलाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सड़क पर फैले रसायन का असर कम करने के लिए मिट्टी डाली गई।

आसपास के गांवों और हॉस्टलों तक पहुंचा असर

मानपुर-बाना, भैंसामऊ और आसपास की बस्तियों के अलावा एसआर इंस्टीट्यूट के हास्टल व निजी हास्टलों तक महसूस किया गया। केमिकल की गंध से लोगों को आंख, नाक और गले में जलन की शिकायत हुई। फार्मेलिन के संपर्क में आने से त्वचा पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पुलिस और संबंधित टीमें हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हैं।

क्या है फार्मेलिन

फार्मेलिन फार्मेल्डिहाइड का जलीय घोल है। इसका इस्तेमाल मेडिकल प्रयोगशालाओं में जैविक नमूनों को सुरक्षित रखने के साथ प्लाईवुड और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है। इसकी वाष्प के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन हो सकती है। अधिक संपर्क स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

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