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क्वालिटी चेक में फेल हुईं 5 दवाएं, यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने 4 कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

Published: Thu, 22 Oct 2026 02:06 AM (IST)

उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने गुणवत्ता जांच में फेल हुई पांच दवाओं के कारण चार कंपनियों को तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई पांच दवा के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए हैं। इस पर उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (यूपीएमएससीएल) ने चार दवा कंपनियों को तीन-तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। कंपनियों की ओर से आपूर्ति किए गए दवाओं के कई बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। कारपोरेशन ने संबंधित बैचों की सप्लाई रोकने के साथ ही उनके भुगतान पर भी रोक लगा दी है।

कारपोरेशन ने वर्ष फरवरी से सितंबर के बीच जेंटामाइसिन सल्फेट इंजेक्शन, रैनिटिडिन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट, एंब्राक्सोल सिरप, सोडियम वैल्प्रोएट टैबलेट और प्रोमेथाजिन हाइड्रोक्लोराइड सिरप की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद संबंधित कंपनियों ने दवाएं कारपोरेशन के गोदामों में भेजीं। कंपनियों ने दवाओं की गुणवत्ता सही होने के प्रमाणपत्र भी जमा किए।

सात बैच गुणवत्ता मानकों पर नहीं उतरी खरे

लेकिन अस्पतालों में आपूर्ति से पहले कारपोरेशन ने नमूनों की अपनी प्रयोगशाला में जांच कराई, जिसमें एसवीपी लाइफ साइंस के जेंटामाइसिन सल्फेट इंजेक्शन के चार बैच, मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की रैनिटिडिन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट के तीन बैच, सेंटलाइफ फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के एंब्रॉक्सोल सिरप के दो और प्रोमेथाजिन हाइड्रोक्लोराइड सिरप के चार बैच और एथेंस लाइफ साइंसेज की सोडियम वैल्प्रोएट टैबलेट के सात बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

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इन बैचों की दवा को गोदामों में रोकने के निर्देश दिए गए और प्रबंध निदेशक जे. रीभा की ओर से जारी आदेश में चारों कंपनियों को तीन साल के लिए काली सूची में डालने का आदेश कर दिया। वित्त नियंत्रक को संबंधित बैचों का भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं।