क्या आम जनता के लिए बंद होगा फ्री UPI? जानिए संसद के नए कानून का सच
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई लेनदेन मुफ्त रहेगा, व्यक्ति से व्यक्ति ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
भविष्य में केवल कुछ बड़े कारोबारी लेनदेन पर एमडीआर संभव।
छोटे दुकानदारों और रोजमर्रा के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं।
पुलक त्रिपाठी, लखनऊ। संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली कानून से जुड़े संशोधन के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब यूपीआइ से पैसे भेजने या दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने पर शुल्क देना होगा। इंटरनेट मीडिया पर तरह-तरह के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि यूपीआइ इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ताओं पर कोई ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लगेगा।
व्यक्ति से व्यक्ति को पैसे भेजने का लेन-देन भी पहले की तरह मुफ्त रहेगा। लेकिन इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बदलाव जरूर हुआ है। भविष्य में सरकार के पास कुछ चुनिंदा और बड़े कारोबारी यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) तय करने का कानूनी विकल्प होगा। हालांकि, ऐसा शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है और इसका अंतिम स्वरूप भी तय नहीं है।
सबसे पहले जानिए, आम यूजर को क्या देना होगा?
सीधा जवाब है—कोई शुल्क नहीं। यदि कोई व्यक्ति यूपीआइ के जरिए अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को पैसे भेजता है तो यह लेन-देन मुफ्त रहेगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी पर्सन-टू-पर्सन यानी पी टू पी यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
इसी तरह रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान किसी दुकान के क्यूआर कोड को स्कैन कर यूपीआइ से भुगतान करने पर ग्राहक से कोई ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने साफ कहा है कि यूपीआइ नागरिकों के लिए निःशुल्क रहेगा और रोजमर्रा के भुगतानों पर उपभोक्ताओं को चार्ज नहीं देना होगा।
फिर विवाद आखिर किस बात को लेकर है?
विवाद की वजह भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम यानी पीएसएस एक्ट में संशोधन है। सरकार के अनुसार यह संशोधन अपने आप किसी नए शुल्क को लागू नहीं करता, बल्कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर कुछ कारोबारी लेन-देन के लिए एमडीआर तय करने का कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यदि भविष्य में एमडीआर लागू किया जाता है तो यह सभी यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर एक साथ नहीं लगाया जाएगा। यह केवल एक तय सीमा से ऊपर के सीमित मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर और मामूली दर से लागू किया जा सकता है। अधिकांश मर्चेंट ट्रांजेक्शन निःशुल्क रहने की बात भी सरकार ने कही है।

क्या छोटे दुकानदारों को भी शुल्क देना होगा?
फिलहाल इस तरह का कोई शुल्क लागू नहीं है। सरकार के स्पष्टीकरण के अनुसार भविष्य में एमडीआर लागू होने की स्थिति में भी इसका दायरा सीमित रहेगा और यह एक निश्चित सीमा से ऊपर के चुनिंदा कारोबारी लेन-देन पर ही लागू हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा है कि शुल्क सभी व्यापारियों या सभी यूपीआइ भुगतान पर एक समान नहीं लगाया जाएगा।
एमडीआर क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो सामान्यतः किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने वाले कारोबारी से भुगतान प्रणाली के संचालन से जुड़े संस्थानों द्वारा लिया जाता है। यह उपभोक्ता द्वारा भुगतान किए जाने वाला शुल्क नहीं होता। यूपीआइ पर संभावित एमडीआर को लेकर सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में इसे लागू किया गया तो इसकी दर मामूली होगी और यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर से कम रखी जाएगी।
सरकार को ऐसा प्रावधान क्यों करना पड़ा?
सरकार का तर्क है कि यूपीआइ अब बेहद बड़े स्तर पर काम कर रहा है। जुलाई 2026 में ही यूपीआइ के जरिए 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इतने बड़े डिजिटल भुगतान तंत्र को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा, फ्राड रोकथाम और तकनीकी ढांचे में लगातार निवेश की जरूरत है।
सरकार का कहना है कि भविष्य में यूपीआइ को और अधिक विस्तार देने, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने तथा डिजिटल भुगतान तंत्र को आर्थिक रूप से दीर्घकालिक और मजबूत बनाने के लिए यह कानूनी व्यवस्था तैयार की गई है।
एक नजर में समझिए
- व्यक्ति से व्यक्ति को यूपीआई से पैसे भेजना : पूरी तरह मुफ्त
- ग्राहक द्वारा दुकान पर क्यूआर कोड से भुगतान : ग्राहक पर कोई शुल्क नहीं
- सभी यूपीआइ ट्रांजेक्शन पर शुल्क : गलत दावा
- भविष्य में एमडीआर की संभावना : केवल सीमित और तय सीमा से ऊपर के कुछ कारोबारी ट्रांजेक्शन पर
- एमडीआर अभी लागू है? : नहीं
- छोटे और रोजमर्रा के यूपीआइ भुगतान : सरकार के अनुसार निःशुल्क रहेंगे
- आम उपभोक्ता पर असर : फिलहाल कोई नहीं
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निष्कर्ष
यूपीआइ से रोजमर्रा का भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। आपके लिए यूपीआइ ट्रांजेक्शन निःशुल्क हैं और सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों पर कोई ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। कानून में किया गया संशोधन मुख्य रूप से भविष्य में डिजिटल भुगतान तंत्र की आर्थिक स्थिरता और चुनिंदा बड़े कारोबारी ट्रांजेक्शन के लिए संभावित एमडीआर व्यवस्था से जुड़ा है। पाठकों के लिए सबसे आसान जवाब यही है—दैनिक खरीदारी करें या किसी परिचित को पैसे भेजें, आपके यूपीआइ भुगतान पर कोई नया शुल्क नहीं लगा है।
