विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी की नई स्टार्टअप नीति: छोटे व्यवसायों को बड़ी राहत, EPF-ESI सहित 3 साल तक मिलेंगी ये सुविधाएं

Updated: Mon, 17 Aug 2026 01:39 PM (IST)

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए नई स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति-2026 पेश की है। इसमें ईपीएफ, ईएसआई प्रतिपूर्ति, बढ़ा हुआ भरण पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप व सीड फंडिंग और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष पैकेज जैसे कई लाभ शामिल हैं।

योगी आदित्यनाथ।

योगी आदित्यनाथ।

HighLights

  1. ईपीएफ-ईएसआई अंशदान की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी।

  2. भरण पोषण भत्ता 17,500 से बढ़कर 20,000 रुपये प्रतिमाह।

  3. प्रोटोटाइप व सीड फंडिंग में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। यूपी में छोटे बिजनेस को बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने राहत की बारिश की है। यूपी में प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति-2026 तैयार की है। इस नई नीति में ईपीएफ एवं ईएसआई जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिनमें अंशदान की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा।

यूपी स्टार्टअप मिशन की नई नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड, 400 करोड़ रुपये का एकेटीयू कार्पस फंड और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन स्थापित कर सकेंगे। 

यूपी में स्टार्टअप के लिए सहूलियतें 

  • भरण पोषण भत्ता (सस्टेनेंस अलाउंस) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है
  • स्टार्टअप्स के लिए पांच करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, दो करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ एवं ईएसआई अंशदान की प्रतिपूर्ति, क्लाउड सेवाओं पर दो लाख रुपये तक सहायता व पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए दो करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति का प्रविधान किया गया है
  • फंड ऑफ फंड्स, बैंक फंडिंग और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा
  • नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक सहित अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष पैकेज मिलेगा
  • प्रोटोटाइप अनुदान पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये, जबकि सीड फंडिंग 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक दी जा सकेगी
  • ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल व अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी
  • 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे, इनकी सहायता राशि 10 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है
  • परिचालन अनुदान 30 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है
  • राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब स्थापित होगा, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, उद्योग सहयोग, निवेश, मेंटरशिप और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराएगा
  • इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान एक करोड़ से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये व पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए 1.50 करोड़ रुपये किया गया है

प्रदेश में एंजेल निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) और हाई नेटवर्थ फैमिली (एचएनएफ) को जोड़कर राज्य स्तरीय निवेशक नेटवर्क बनाया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये की निजी पूंजी स्टार्टअप्स तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह भी पढ़ें- अब डकैतों का नहीं टूरिस्ट का बसेरा, रोमांच और एडवेंचर का नया केंद्र चंबल सेंक्चुरी