नेपाल में जलप्रलय ने बदला भूगोल, लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था; तबाही के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ ने न केवल भूगोल बदला बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया, जिससे पुनर्निर्माण ...और पढ़ें
HighLights
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल का भूगोल बदल दिया।
बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत ने राहत और बचाव में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की।
विवेक शुक्ला, महराजगंज। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ जनजीवन ही नहीं पटरी से उतारा, बल्कि कई इलाकों का भूगोल तक बदल दिया है। नदी किनारे बसे घर, सड़कें और पुल सैलाब में बह गए। कहीं नदी की धारा बदल गई तो कहीं कटाव ने जमीन का स्वरूप बदल दिया। सैटेलाइट तस्वीरों में भी भोटे कोशी नदी के किनारे तबाही का व्यापक असर दिखाई दे रहा है।
इस आपदा का असर अब राहत और बचाव से आगे बढ़कर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। बाढ़ और मलबे से परिवहन संपर्क बाधित हुआ है। बिजली और जल आपूर्ति जैसी जरूरी सेवाओं को बहाल करने की चुनौती बनी हुई है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। पुनर्निर्माण की चुनौती अब नेपाल के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।

कुछ मिनटों ने बदल दिया पूरा इलाका
बाढ़ की रफ्तार इतनी भयावह थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। नदी के तेज बहाव के साथ आया मलबा घरों और सड़कों को अपने साथ बहा ले गया। कई जगहों पर नदी का रास्ता तक बदल गया। यही वजह है कि राहत दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। लगातार बारिश और भूस्खलन ने बचाव अभियान को और मुश्किल कर दिया है।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल में कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मलबे के कारण सामान्य राहत उपकरणों से अभियान चलाना मुश्किल है। इसी को देखते हुए भारत ने विशेष सुरंग-बचाव उपकरणों से लैस टीम भी भेजी है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की मुश्किल घड़ी में भारत लगातार राहत सामग्री पहुंचा रहा है। दो सितंबर को भारत ने राहत की पांचवीं खेप भेजी, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष सुरंग-बचाव उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाएं शामिल थीं। इससे पहले भी भारतीय वायुसेना के विमानों से राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई है।

भारत की मदद केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञों की टीम तलाश और बचाव अभियान में तकनीकी सहायता दे रही है। भारत से भेजी गई फोरेंसिक टीम भी नेपाल में काम कर रही है। अब तक बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है।

तबाही के बाद अब पुनर्निर्माण की चुनौती
नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती है, पहली, मलबे में जिंदगी तलाशना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना; दूसरी, बाढ़ से टूटे सड़क, पुल, बिजली, जलापूर्ति और परिवहन तंत्र को दोबारा खड़ा करना। आपदा से पैदा हुए मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे ने पुनर्निर्माण को लंबी प्रक्रिया बना दिया है।
यानी नेपाल में आई यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं रही। इसने कई इलाकों का नक्शा बदल दिया, बाजार और अर्थव्यवस्था को झटका दिया और अब पूरे देश के सामने पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे समय में भारत की लगातार पहुंच रही राहत दोनों देशों के बीच पड़ोसी सहयोग की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश कर रही है।

नेपाल संकट : एक नजर में
- 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़
- नदी किनारे कई इलाकों का बदला स्वरूप
- सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
- सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बड़ी चुनौती
- भारत की राहत की पांचवीं खेप पहुंची
- पांचवीं खेप में 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन दवाएं
- भारत की टीमें तलाश, बचाव और फोरेंसिक कार्य में जुटीं
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