माला के मनके, अधरों पर महामंत्र... वृंदावन आकर कृष्ण भक्ति में डूबे विदेशी भक्त
वृंदावन में कार्तिक मास के दौरान हजारों विदेशी भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन हैं, जो जप, परिक्रमा और मंगला ...और पढ़ें

कार्तिक मास में वृंदावन आकर श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन विदेशी जोड़ा।
HighLights
जप माला, परिक्रमा, मंगला आरती में शामिल 25 हजार श्रद्धालु।
रूस, तुर्किए के भक्तों ने वृंदावन में शांति का अनुभव किया।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। जिनके जन्म और परवरिश की मिट्टी कहीं और की है, उनके हृदय में अब राधा-कृष्ण की भक्ति ने घर कर लिया है। हाथों में जप की माला, कंधे पर झोली, अधरों पर ‘हरे रामा, हरे कृष्णा’ का महामंत्र और नंगे पैर ब्रज रज की परिक्रमा। वृंदावन में इन दिनों विदेशी भक्तों की आस्था का अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहा है।
इस्कान के संस्थापक श्रील प्रभुपाद के संदेशों से प्रेरित यह भक्त कार्तिक मास में पंचकोसीय परिक्रमा से लेकर सप्तदेवालयों की मंगला आरती, यमुना पूजन और गोसेवा तक में लीन हैं। इनके लिए कृष्ण भक्ति अब केवल आस्था नहीं, जीवन जीने की साधना बन गई है।
सात समंदर पार से आए इन भक्तों के मन में रची-बसी ब्रज की भक्ति मानो यही संदेश दे रही है कि कृष्ण के प्रेम की कोई सीमा नहीं, उनकी भक्ति की कोई भाषा नहीं और उनके धाम में कोई पराया नहीं। वृंदावन में करीब 25 हजार विदेशी श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
रूस, आस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान, ब्रिटेन आदि देशों से पहुंचे श्रद्धालु सुबह पांच बजे से नियम सेवा करते हैं। इस्कान मंदिर के प्रवक्ता रविलोचन दास ने बताया कि विदेशी भक्तों की दिनचर्या सुबह चार बजे मंगला आरती से शुरू होती है।
वृंदावन की भूमि पवित्र है, यहां साधना करने का आनंद ही अलग है, हर ओर गायों के दर्शन, ठाकुरजी के दर्शन मन को शांति देते हैं, किसी भी आश्रम में बैठकर शांत वातावरण में साधना करने का मौका और कहीं नहीं मिलता। गोशाला में गायों की खुशबू हमें खींच ले जाती है।
-राधिका चरण दासी, रूस।कार्तिक के महीने में दूसरी बार नियम सेवा का मौका मिला है। दस वर्ष पहले भी नियम सेवा की थी, आनंद मिलता है वृंदावन में प्रवास करके। सुबह से ही मंदिरों की घंटियां बजती हैं तो दिन की शुरूआत बहुत अच्छी होती है, मंगला आरती में जो आनंद मिलता है, वह कहीं देखने को नहीं मिलता।
- शिवा दास, तुर्किए।मुझे वृंदावन में आकर हमेशा शांति का अनुभव होता है, यहां का वातावरण पूरी तरह भक्ति का है, तो यहां से अधिक आत्मिक शांति कहीं और नहीं मिलती। वृंदावन की धरती में ही आकर्षण है, यहां हमेशा रहने का मन भी करता है। सप्तदेवालयों में दर्शन अद्भुत होते हैं, वहां आत्मिक शांति मिलती है।
- गोकुल गौरी दासी, रूस।