'DM का लेना-देना नहीं, ये कमिश्नरेट का मामला', CJP प्रवक्ता सौरभ दास के दावों पर नोएडा पुलिस ने दी सफाई
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी पांच लाख के मुचलके के नोटिस पर स्पष्टीकरण दिया है। ...और पढ़ें

सौरभ दास ने जिला प्रशासन पर उठाया था सवाल। फोटो: आर्काइव
HighLights
छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी हुआ था 5 लाख का नोटिस
कमिश्नरेट ने बताया, नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने जारी किया
त्रुटिपूर्ण नोटिस निरस्त, संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई शुरू
जासं, ग्रेटर नोएडा। दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी पांच लाख रुपये के मुचलके के नोटिस पर सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स हैंडल के जरिए जिला प्रशासन पर सवाल उठाए थे।
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर ने स्पष्ट किया है कि नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय, पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर की ओर से जारी हुआ था और इस प्रकरण से जिलाधिकारी का कोई संबंध नहीं है।
नोटिस को लेकर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि जिले में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू है। इसी वजह से यह नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय, पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर की ओर से जारी हुआ था।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स के जरिए जिलाधिकारी पर सवाल उठाए थे। पुलिस कमिश्नरेट ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि मामले में जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर की कोई भूमिका नहीं है।
कमिश्नरेट व्यवस्था में मजिस्ट्रेट शक्तियां
पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश विक्रम सिंह के अनुसार, जिन जिलों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होती है, वहां शांति व्यवस्था, गैंग्स्टर, संपत्ति अटैचमेंट और शांति भंग जैसी धाराओं में आरोपित को जेल भेजने या जमानत देने से संबंधित मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस कमिश्नरेट को ट्रांसफर हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इससे पुलिस त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम होती है और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलती है।
गलत नोटिस पांच सितंबर को निरस्त
जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ चार सितंबर को पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, यह त्रुटिपूर्ण नोटिस पांच सितंबर को ही निरस्त कर दिया गया था।
इसके साथ ही संबंधित विभागीय कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
2020 में मिली थीं मजिस्ट्रेट शक्तियां
जनवरी 2020 में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से शासनादेश जारी किया गया था। इसमें दंड प्रक्रिया संहिता 1975 की धारा 20 के अधीन राज्यपाल ने पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की थीं।
इसी अधिनियम की धारा 21 के तहत राज्यपाल ने गौतमबुद्ध नगर में तैनात संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, उप पुलिस आयुक्त, अपर उप पुलिस आयुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेटी की शक्तियां प्रदान की थीं।
यह भी पढ़ें- विदेश के लिए उड़ान भरने का इंतजार खत्म, नोएडा एयरपोर्ट का पैसेंजर टर्मिनल तैयार; BCAS अप्रूवल का रास्ता साफ
यह भी पढ़ें- BRICS के चलते नोएडा-दिल्ली बॉर्डर सील, चिल्ला-DND और कालिंदी कुंज से ट्रैफिक डायवर्ट; देखें नया रूट प्लान
