जेवर एयरपोर्ट की नई पहचान 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट'; क्या हैं इसकी खासियतें?
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' करने को मंजूरी दे दी है। यह ...और पढ़ें
HighLights
जेवर एयरपोर्ट का नाम 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' होगा।
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
यह भारत का पहला नेट-जीरो उत्सर्जन एयरपोर्ट बनेगा।
अजय जयसवाल, नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एक अहम निर्णय लिया गया है। नोएडा जेवर एयरपोर्ट का नाम अब 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' (Narendra Modi International Airport) के नाम से जाना जाएगा। आइए आपको इस लेख में बताएंगे एयरपोर्ट की खूबियां-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम अब 'नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शुक्रवार को कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर दिया है।

एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत
इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी क्षमता एक वर्ष में लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है। यह एयरपोर्ट 1300 हेक्टेयर से अधिक भूमि में फैला हुआ है।
दिल्ली-एनसीआर में बनने वाला यह दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर भीड़भाड़ कम करने में मदद करेगा।
पार्किंग की सुविधा रहेगी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर विकसित किया गया है, जिसमें मल्टी मॉडल ट्रांजिट केंद्र होगा। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे के स्टेशन होंगे। इनके अलावा टैक्सी, बस सेवा और निजी वाहन पार्किंग सुविधा रहेगी।
दिल्ली से 21 मिनट की दूरी
दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट के बीच का सफर सिर्फ 21 मिनट का होगा। जेवर एयरपोर्ट को प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल से भी जोड़ने की योजना है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा, जहां उत्सर्जन शुद्ध रूप से शून्य होगा।
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