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जयंत की 'गुर्जर' पर चुप्पी और अखिलेश का 'चवन्नी' वाला तंज; पश्चिमी यूपी में विरासत की लड़ाई में कौन पड़ेगा भारी?

Published: Fri, 11 Sep 2026 02:27 PM (IST)

पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद के बीच 'चवन्नी', 'दो कौड़ी' और 'मंदबुद्धि' जैसे शब्दों को लेकर सियासी महाभारत छिड़ी है, जिसमें जातीय समीकरणों की अहम भूमिका है।

जयंत चौधरी अखिलेश यादव। फाइल फोटो

जयंत चौधरी अखिलेश यादव। फाइल फोटो

HighLights

  1. सपा-रालोद में 'चवन्नी' और 'मंदबुद्धि' शब्दों पर पश्चिमी यूपी में सियासी जंग।

  2. जयंत चौधरी के एनडीए में जाने से मुस्लिम-जाट समीकरण में दरार।

  3. सपा मुस्लिम-गुर्जर-पाल-बघेल गठजोड़ से नया जातीय समीकरण बनाने की कोशिश।

धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। पश्चिमी उप्र में चवन्नी, दो कौड़ी व मंदबुद्धि आदि के शब्द बाण एवं जाति की ढाल को लेकर सपा-रालोद में सियासी महाभारत छिड़ी हुई है।

चव्वनी के मुद्दे पर रालोद, सपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, वहीं दो कौड़ी व मंदबुद्धि के शब्दों की जुबानी जंग के बीच सपा ने भी मोर्चा खोल दिया है।

सहारनपुर से लेकर गौतमबुद्ध नगर तक राजनीति गरमाने से पश्चिमी यूपी की सियासत एक बार फिर उसी जातीय समीकरण पर लौट आई है, जहां से वोट की फसल काटी जाती है।

दोनों की लड़ाई में भाजपा देख रही अपना फायदा 

भाजपा भी दोनों की लड़ाई में अपना फायदा देख रही है। जयंत से गठबंधन और रालोद व सपा की तकरार पर भाजपा मौन साधकर फायदे का सौदा मान रही है।

सपा व रालोद की जंग चवन्नी से शुरू हुई थी। अब जाट-गुर्जर, पाल-बघेल तक पहुंच गई है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए कहा था कि हमने चवन्नी का रुपया बना दिया।

दरअसल, गत विधान चुनाव में सपा और रालोद ने मिलकर चुनाव लड़ा था। जयंत चौधरी 2019 लोकसभा चुनाव हार गए थे। सपा ने उन्हें अपने कोटे से राज्यसभा सदस्य बनाया।

लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी ने बयान दिया था कि वह कोई चव्वनी नहीं है, जाे किधर भी लुढ़क जाए। कुछ दिन बाद भी उन्होंने सपा से गठबंधन तोड़ भाजपा से नाता जोड़ लिया।

गुर्जर-जाट महापंचायत और मंदबुद्धि तक की बात

रालोद ने पश्चिमी यूपी में गुर्जर-जाट एकजुटता के नाम पर पिछले दिनों सहारनपुर में जनसभा की थी। रालोद प्रवक्ता मलूक नागर ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें मंदबुद्धि और दो कौड़ी का, तक कह दिया था।

जयंत चौधरी ने भी कहा कि जे से क्या होता है, मुझे कहने की जरूरत नहीं है। उनका इशारा जे से जाट था। फिर कहा कि जी का क्या मतलब होता है। मंच पर बैठे गुर्जर समाज के लोगों को उम्मीद थी कि जयंत, गुर्जर कहेंगे।

पीछे खड़े बिजनौर के सांसद चंदन चौहान ने जयंत के बाेलते ही कहा कि जी से गुर्जर, लेकिन रालोद अध्यक्ष ने जी से गन्ना कह दिया। इसी मुद्दे को सपा ने लपक लिया।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए कहे गए शब्दों को पाल और बघेल समाज का अपमान करार दिया। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी का कहना है कि रालोद अध्यक्ष ने जी से गुर्जर न कहकर गन्ना कह, गुर्जरों के अस्तित्व को नकार दिया। इससे गुर्जरों में नाराजगी है।

निर्णायक भूमिका में हैं चारों जाति

पश्चिमी यूपी में जाट, गुर्जर, पाल और बघेल का निर्णायक वोट बैंक हैं। सपा जानती है कि जाट वोट अब रालोद-भाजपा गठबंधन के साथ है, तो गुर्जर-पाल-बघेल को अपने पाले में लाकर नया समीकरण बनाया जा सकता है।

जयंत चौधरी के एनडीए में जाने के बाद पश्चिमी यूपी में मुस्लिम-जाट समीकरण में दरार आ गई है। सपा अब उस खाली जगह को मुस्लिम-गुर्जर-पाल-बघेल से भरना चाहती है।

वहीं आरएलडी अपने कोर जाट वोट को यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी का नेतृत्व अभी भी चौधरी चरण सिंह की विरासत है।

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