'सामान दोबारा खरीद लेंगे, जिंदगी नहीं', यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में धन-दौलत को जलता छोड़ भागे यात्री
यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, जहां जान बचाने के लिए उन्हें अपना सारा सामान छोड़कर बस से कूदना पड़ा।

बस में दिखाई दे रही कटी हुई बाडी को काटते हुए तड़के तक चला राहत और बचाव कार्य। जागरण
HighLights
यात्रियों ने जान बचाने के लिए बस से कूदकर सामान छोड़ा।
कई यात्रियों के नकद, कागजात, मोबाइल आग में जल गए।
सुरक्षित बचे यात्रियों को प्रशासन ने गंतव्य तक पहुंचाया।
जागरण संवाददाता, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग ने यात्रियों को ऐसा खौफ दिया कि जान बचाने के लिए उन्हें अपना सबकुछ जलता छोड़कर बस से छलांग लगानी पड़ी। किसी का नकद पैसा और जरूरी कागजात राख हो गए तो किसी का मोबाइल, कपड़े और सामान आग की भेंट चढ़ गया।
चीखते रहे लोग, बचाने के सारे प्रयास हुए विफल
बस के अंदर फंसे यात्रियों को बचाने के लिए बाहर निकल चुके लोगों ने आग बुझाने वाले सिलेंडर से शीशे तोड़ने की कोशिश की, लेकिन विकराल लपटों और दम घोंटते धुएं के आगे उनकी कोशिशें बेबस होती गईं। अंदर से उठती चीखें कुछ ही देर में शांत होती गईं।
सुरक्षित बचे यात्रियों के नाम
- चंद्रभान
- गजराज
- संदीप
- सर्वेश
- राममूर्ति (छतरपुर)
- अंकित (ममना, महोबा)
- विकास व मुकेश गोस्वामी (कुलपहाड़, महोबा)
- ब्रजकिशोर व सुनील कुमार (राठ, हमीरपुर)
- सुनील सोनी (सुगिरा, कुलपहाड़)
- रविंद्र राजपूत व रिंकी राजपूत (जुझार, महोबा)
- वीरेंद्र कुमार सिंह (उरई, जालौन)
- मानव द्विवेदी (अंबेडकरनगर, कबरई, महोबा)
- विश्वामित्र (चक्की भोला डेरा, बक्सर, बिहार)
हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों को तहसील प्रशासन ने बस की व्यवस्था कराकर उनके गंतव्य की ओर रवाना किया। प्रशासन ने छतरपुर, महोबा, हमीरपुर, जालौन और बिहार के रहने वाले यात्रियों को उनके घर भेजने की व्यवस्था की।
इन मृतकों की अब तक हो सकी है पहचान
- श्रुति रावत पुत्री बालमुकंद निवासी छतरपुर मध्यप्रदेश
- सरोज गुप्ता पत्नी अनंतराम गुप्ता निवासी मुगलपुरिया राठ हमीरपुर
- मयंक गुप्ता पुत्र सुरेश गुप्ता निवासी मुगलपुरिया राठ हमीरपुर
- देवेंद्र सहाय भारद्वाज पुत्र प्रेमपाल भारद्वाज निवासी चंद्र नगर हिसार हरियाणा
- हरिशरण गुप्ता पुत्र अवध बिहारी गुप्ता निवासी राजेंद्र नगर उरई जालौन
- ऊषा देवी पत्नी प्रेमनारायण गुप्ता निवासी मैन रोड मुस्करा हमीरपुर
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लोगों ने बताई आपबीती...
हादसे के वक्त वह बस में सो रही थीं। अचानक नींद खुली तो चारों तरफ धुआं भरा था। उन्होंने बचाव के लिए गुहार लगाई। कुछ लोगों ने किसी तरह उन्हें बस से बाहर खींच लिया, जिससे उनकी जान बच सकी। बाहर आने के बाद भी बस के अंदर फंसे यात्रियों की चीखें सुनाई देती रहीं।
-रिंकी राजपूत
आग लगने की भनक लगते ही वह जान बचाने के लिए बस से बाहर दौड़े। इसी दौरान पीछे से बाहर निकल रहे यात्रियों की भीड़ में वह नीचे दब गए। उनके जूते, पर्स, जरूरी कागजात और करीब 11 हजार रुपये बस के अंदर ही जलकर राख हो गए। उन्होंने कहा कि सामान दोबारा खरीदा जा सकता है, लेकिन समय रहते बाहर निकलना ही जिंदगी बचाने का एकमात्र मौका था।
-ब्रजकिशोर
पति, बेटे और देवर समेत पांच लोगों के साथ घर जाने के लिए निकली थीं। मेहनत-मजदूरी के बाद बेटे के लिए करीब 30 हजार रुपये का मोबाइल खरीदा था। बैग में मोबाइल के साथ करीब 30 हजार रुपये और कपड़े रखे थे। आग लगते ही परिवार ने सब कुछ बस में छोड़ दिया और जान बचाने के लिए बाहर भाग निकला। देखते ही देखते उनका पूरा सामान आग में राख हो गया।
-राममूर्ति
एक्सप्रेसवे पर बस चलने के बाद ज्यादातर यात्री सो चुके थे और कुछ सोने की तैयारी कर रहे थे। अचानक आग की जानकारी हुई तो अफरातफरी मच गई। उनका बैग बस के अंदर ही रह गया, जिसमें जीवन के जरूरी कागजात और पैसे थे। उन्होंने कहा कि सामान बचाने के लिए कुछ क्षण भी रुकते तो शायद जिंदगी नहीं बचती।
-वीरेंद्र कुमार सिंह
वह गहरी नींद में सो रहे थे। आग का शोर सुनकर आंख खुली तो बिना कुछ सोचे सीधे बस से बाहर की ओर दौड़ पड़े। उनका हार्डवेयर का काफी सामान बस के अंदर ही जलकर राख हो गया। यात्रियों के लिए उस वक्त सामान से ज्यादा अपनी जान बचाना जरूरी था।
-विश्वामित्र यादव
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