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प्रयागराज के रास्ते दिल्ली-वाराणसी Vande Bharat Sleeper के ट्रायल को लेकर तैयारी शुरू, प्रधानमंत्री दिखा सकते हैं हरी झंडी

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 19 Sep 2026 01:34 PM (IST)

दिल्ली-वाराणसी के बीच प्रयागराज और कानपुर होते हुए दूसरी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के ट्रायल की तैयारी है। प्रधानमंत्री द्वारा दिवाली से पहले इसे हरी झंडी दिखाने की संभावना है।

दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के ट्रायल की तैयारी हो रही है।

दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के ट्रायल की तैयारी हो रही है।

HighLights

  1. रेलवे बोर्ड और पीएमओ स्तर पर तैयारी शुरू, तिथियों पर हो रहा है मंथन

  2. तिथि फाइनल होने के बाद होगी घोषणा, दीपावली से पहले होगा संचालन

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के सफर में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। संगम नगरी प्रयागराज और औद्योगिक नगरी कानपुर के रास्ते दिल्ली से धर्मनगरी वाराणसी के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को उतारने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

पीएमओ लगाएगा अंतिम मुहर 

ट्रेन के रैक को नई दिल्ली से ट्रैक पर उतारकर ट्रायल रन कराने की जमीनी कसरत तेज कर दी गई है। हालांकि रेल मुख्यालय से लेकर जोनल दफ्तरों तक इस प्रोजेक्ट को लेकर एक खास किस्म की खामोशी छाई हुई है। किसी भी स्तर पर तारीखों को लेकर आधिकारिक बयान नहीं आ रहा है, क्योंकि अंतिम मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से लगनी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस आधुनिक स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित करेंगे।

बोर्ड में गहन मंथन, पर कागजों पर तारीखें अभी तय नहीं


रेलवे बोर्ड के गलियारों में ट्रायल और उद्घाटन की तारीखों को लेकर लगातार विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक ट्रेन का 16 कोच वाला अत्याधुनिक रैक पूरी तरह तैयार है और इसे परीक्षण के लिए ट्रैक पर लाने की तकनीकी हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बावजूद बोर्ड ने अभी तक किसी एक निश्चित तारीख पर अंतिम स्वीकृति का ठप्पा नहीं लगाया है। अधिकारियों की जुबान पर ताला इस वजह से है कि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मौजूदगी तय मानी जा रही है। जब तक पीएमओ से प्रधानमंत्री के समय और उपलब्धता की पुष्टि नहीं होती, तब तक रेलवे प्रशासन किसी भी संभावित तारीख का खुलासा करने से पूरी तरह बच रहा है।

पहली वंदे भारत की यादें होंगी ताजा

देश की सबसे पहली चेयरकार वंदे भारत एक्सप्रेस को भी नई दिल्ली और वाराणसी के बीच ही हरी झंडी दिखाई गई थी। उस ऐतिहासिक क्षण के गवाह स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने थे। अब जब स्लीपर संस्करण की बारी आई है, तो हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद इस दूसरे रूट को उसी प्रतीकात्मक गौरव से जोड़ने की तैयारी है। इसी वजह से रेलवे का शीर्ष प्रबंधन कोई भी जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि जब पीएमओ से तारीख का औपचारिक संकेत मिलेगा, तभी ट्रायल के नतीजे और उद्घाटन की समय-सारिणी एक साथ सार्वजनिक की जाएगी।

दिवाली तक मुसाफिरों को तोहफा देने का लक्ष्य

रेलवे प्रशासन की कोशिश है कि चालू माह के भीतर ही प्रस्तावित रूट पर इसका स्पीड और सेफ्टी ट्रायल पूरा कर लिया जाए, ताकि आगामी दिवाली के पावन पर्व तक यात्रियों को पटरियों पर यह नई सौगात मिल सके। 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के अनुकूल ट्रैक और ‘मिशन रफ्तार’ के मानकों के आधार पर इसका ट्रायल रन होना है। उत्तर रेलवे को इस ट्रेन के प्राथमिक रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ट्रेन में रात में सोएं और भोर में मंजिल पहुंचें

प्रस्तावित समय-सारिणी के अनुसार, यह ट्रेन वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे रवाना होगी। इसके बाद रात 10:45 बजे प्रयागराज जंक्शन और देर रात 12:35 बजे कानपुर सेंट्रल होते हुए तड़के ठीक 5:00 बजे नई दिल्ली स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में भी ट्रेन नई दिल्ली से रात 9:20 बजे खुलेगी और अगली सुबह 5:00 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस समय-सारिणी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कारोबारी, छात्र और आम यात्री पूरी रात आराम से सोकर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे और अगले दिन सुबह के सारे कामकाज बिना थके निपटा सकेंगे।

विश्वस्तरीय सुविधाएं और 823 बर्थ

पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 823 यात्रियों के सोने की व्यवस्था रहेगी। इसमें थर्ड एसी के 11, सेकेंड एसी के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच शामिल किया गया है। इसके अंदर झटकों से मुक्त बोगी सस्पेंशन, आधुनिक सेंसर्ड टॉयलेट्स, एयर-कंडीशनिंग का बेहतर फ्लो और शांत केबिन जैसी कई खूबियां हैं, जो इसे राजधानी एक्सप्रेस से भी एक कदम आगे रखती हैं।

दूरी और समय दोनों सिमटेंगे : प्रवीण पटेल

क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) उत्तर मध्य रेलवे के सदस्य एवं सांसद प्रवीण पटेल का कहना है कि स्वदेशी तकनीक से तैयार यह स्लीपर ट्रेन पूर्वांचल और मध्य यूपी के विकास को नई गति देगी। प्रयागराज और वाराणसी से दिल्ली का सफर न सिर्फ कम समय में पूरा होगा, बल्कि यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अहसास भी होगा। फिलहाल पूरा रेल तंत्र पीएमओ के उस अंतिम इशारे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ट्रेन नंबर, किराया और नियमित फेरों की आधिकारिक घोषणा सामने आएगी।

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