प्रयागराज से विंध्याचल-चित्रकूट तक मेट्रो विस्तार की सिफारिश, मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट प्रणाली की कवायद शुरू
उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज से विंध्याचल-चित्रकूट तक मेट्रो विस्तार की सिफारिश की है। यह मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट प्रणाली कुंभ मेले ...और पढ़ें

प्रयागराज से विंध्याचल-चित्रकूट तक मेट्रो विस्तार की सिफारिश की गई है।
HighLights
दोगुनी आबादी और 30 किमी तक फैलने वाले शहर के लिए सड़क नहीं, मेट्रो ही बनेगी लाइफलाइन
राज्यों व केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से बनेगा नेशनल ट्रैफिक प्लान, एनसीआर ने मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। कुंभ मेले के दौरान उमड़ने वाली असीम भीड़ के सुरक्षित प्रबंधन और भविष्य की नगरीय परिवहन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक मल्टीमाडल ट्रांसपोर्ट प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई है। उत्तर मध्य रेलवे की ओर से मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट है कि केवल वर्तमान व्यवस्था या किसी एक यातायात माध्यम के भरोसे न तो कुंभ की भीड़ संभल सकती है और न ही भविष्य का प्रयागराज।
अचानक लगने वाले भीषण जाम से बचा जा सकेगा
इसके लिए सभी राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से एक राष्ट्रीय स्तर का ट्रैफिक प्लान तैयार करना होगा, जिससे अंतिम समय की अफरा-तफरी और अचानक लगने वाले भीषण जाम से बचा जा सके।
अगले दो दशक में 25-30 किमी का इलाका शहरी होगा
रिपोर्ट में सबसे अहम पहलू वर्ष 2047 तक के ''विकसित भारत'' के लक्ष्य और भविष्य की जनसांख्यिकी है। अगले दो दशकों में प्रयागराज शहर की जनसंख्या लगभग डेढ़ गुना हो जाएगी। वर्तमान मुख्य शहर से बाहर करीब 25 से 30 किलोमीटर तक का पूरा इलाका शहरी क्षेत्र में तब्दील हो चुका होगा।
मेट्रो रेल नेटवर्क को अपनाना अपरिहार्य होगा
भविष्य में केवल सड़कों को चौड़ा करके या निजी वाहनों के सहारे इतनी विशाल आबादी का आवागमन संभव नहीं होगा। ऐसे में सड़क परिवहन के दबाव को घटाने के लिए उच्च क्षमता वाले सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर मेट्रो रेल नेटवर्क को अपनाना अपरिहार्य हो जाएगा।
रिपोर्ट में किया गया सचेत
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सचेत किया गया है कि मेट्रो को केवल वर्तमान प्रयागराज नगर निगम की सीमा या चुनिंदा शहरी मार्गों तक सीमित रखना बेअसर साबित होगा। इससे भीड़ निकासी में कोई वास्तविक मदद नहीं मिलेगी, बल्कि जाम शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में शिफ्ट हो जाएगा।
लाखों श्रद्धालुओं की निकासी आराम से हो सकेगी
इसलिए वैश्विक मानकों पर दूरगामी योजना बनाते हुए मेट्रो कॉरिडोर को सीधे पड़ोसी तीर्थस्थलों विंध्याचल (मीरजापुर) और चित्रकूट तक विस्तारित किया जाना चाहिए। इससे धार्मिक पर्यटन को एक स्थायी, तेज और सुरक्षित बैकबोन मिलेगा और मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सीधी निकासी हो सकेगी।
एकीकृत रैपिड इवैक्यूएशन नेटवर्क तैयार होगा
प्रस्ताव के अनुसार ओरिजिन-डेस्टिनेशन (ओडी) सर्वे के आधार पर प्रमुख दिशाओं में सड़क और रेल के डेडिकेटेड कारिडोर बनाए जाएंगे, ताकि भारी आवागमन केवल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए ही संचालित हो। इसके अलावा कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे बड़े महानगरों से प्रयागराज को जोड़ने वाले मार्गों पर भी एकीकृत रैपिड इवैक्यूएशन नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
निर्बाध रिंग कनेक्टिविटी देने की तैयारी
भविष्य में फाफामऊ, झूसी, नैनी और बमरौली जैसे उपनगरीय केंद्रों को मुख्य शहर के साथ मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट से जोड़कर एक निर्बाध रिंग कनेक्टिविटी देने की तैयारी है, जिससे 2047 का संगम नगरीय परिक्षेत्र सुगम और जाममुक्त रह सके। मंडल पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि महाकुंभ के बाद ही प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, ताकि भविष्य के कुंभ में भीड़ प्रबंधन पूरी कुशलता से हो सके।
