हिंदी में आदेश... अंग्रेजी में इलाज: संभल में डिप्टी सीएम के निर्देश बेअसर, अस्पतालों में पर्चों पर दवा-जांच के नाम अंग्रेजी में
संभल में डिप्टी सीएम के हिंदी में पर्चे लिखने के निर्देश के बावजूद, डॉक्टर अभी भी दवाओं और जांचों के ...और पढ़ें

जिला अस्पताल में और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सको ने लिखा दवा का पर्चा। जागरण
HighLights
डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद भी जिला अस्पताल और सीएचसी में पर्चों पर दवा-जांच के नाम अंग्रेजी में, मरीज बोले- समझ में ही नहीं आता क्या लिखा है
गौरव वर्मा, संभल। मरीजों को दवा और जांच के बारे में आसानी से जानकारी हो, इसके लिए उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने डाक्टरों को पर्चे पर दवाओं और जांचों के नाम हिंदी में लिखने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद संभल में निर्देशों का असर नजर नहीं आ रहा है।
सोमवार को दैनिक जागरण ने जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पड़ताल की तो डाक्टर पर्चों पर दवा और जांच के नाम अंग्रेजी में लिखते मिले। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें पर्चे पर लिखा समझ में ही नहीं आता। दवा काउंटर पर कर्मचारी जो बताते हैं, उसी के आधार पर दवा लेनी पड़ती है।
उप मुख्यमंत्री के निर्देश का उद्देश्य मरीजों को उसकी बीमारी, दवा और जांच की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। इससे इलाज में पारदर्शिता बढ़ने के साथ डाक्टर और मरीज के बीच भरोसा भी मजबूत होगा।
मगर, अस्पतालों में अभी पर्चे की भाषा नहीं बदली है। मरीजों को यह तक पता नहीं चल पाता कि कौन सी दवा किस समस्या के लिए है और कौन सी जांच करानी है।
जिला अस्पताल और सीएचसी में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों ने बताया कि पर्चे पर अंग्रेजी में लिखे दवाओं के नाम समझना मुश्किल है। ऐसे में उन्हें दवा काउंटर पर कर्मचारी की जानकारी पर निर्भर रहना पड़ता है।
मरीजों का कहना था कि अगर दवा और जांच के नाम हिंदी में लिखे हों तो उन्हें भी अपने उपचार की जानकारी रहेगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. राजेंद्र सैनी ने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने जो निर्देश दिए हैं, उनका पालन कराया जाएगा। अभी लिखित में आदेश नहीं मिला है।
वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. मनीष अरोड़ा ने कहा कि दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन कराया जाएगा। जिला अस्पताल में सोमवार को 22 डाक्टरों ने मरीजों को देखा।
1062 मरीजों की ओपीडी हुई। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार डाक्टरों ने मरीजों को देखते पर्चों पर दवा लिखी। 360 मरीजों को डाक्टरों ने देखकर इलाज शुरू किया।
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