'वंदे मातरम गाने के लिए लेना पड़ेगा दूसरा जन्म', संभल के सपा विधायक ने दिया बड़ा बयान
सपा विधायक इकबाल महमूद ने वंदे मातरम पर बयान देते हुए कहा कि 75 साल की उम्र में संस्कृत याद ...और पढ़ें

संभल विधायक का बड़ा बयान।
HighLights
सपा विधायक इकबाल महमूद ने वंदे मातरम पर बयान दिया।
कहा, 75 की उम्र में संस्कृत याद करना असंभव है।
वंदे मातरम गाने के लिए दूसरा जन्म लेना पड़ेगा।
जागरण संवाददाता, संभल। वंदे मातरम को लेकर सपा विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद का भी बयान सामने आया है। उन्होंने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कहा कि उनकी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। अब इतनी संस्कृत पढ़कर उसे याद करना उनके लिए संभव नहीं है। विधायक ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वंदे मातरम गाने के लिए तो उन्हें दूसरा जन्म लेना पड़ेगा।
रविवार शाम को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया है, इसलिए वह इसका सम्मान करेंगे, लेकिन पूरा गीत संस्कृत में होने के कारण इसे गाना उनके लिए संभव नहीं है। कहा कि वंदे मातरम पूरा संस्कृत में लिखा गया है। उनका दावा है कि 95 प्रतिशत हिंदू भी इसे पूरा नहीं गा सकते। अधिकांश लोगों को यह गीत याद ही नहीं होगा।
ऐसे में उनसे इसे गाने की उम्मीद करना उचित नहीं है। इकबाल महमूद ने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया है तो वह इसकी इज्जत और सम्मान करेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें यह गीत याद नहीं है, इसलिए वह इसे कैसे गा सकते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।
बता दें कि इससे पहले संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी वंदे मातरम को लेकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ है और इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं, जिन्हें मुस्लिम बोल नहीं सकते। इसके बाद से वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार सामने आ रही है।
