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UP के गांव से निकलकर ताइक्वांडो की 'गोल्डन गर्ल' बनीं सानिया, विदेशों में सिल्वर व ब्रॉन्ज के बाद अब देश में जीता गोल्ड  

By Abhishek Kaushik Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 01 Sep 2026 06:05 PM (IST)

यूपी के शामली निवासी सानिया खान ने पुणे में आयोजित 5वीं इंडियन ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। सीआईएसएफ की ओर से खेलते हुए उन्होंने यह सफलता पाई।

पदक के साथ सानिया खान। सौ. स्वजन

पदक के साथ सानिया खान। सौ. स्वजन

HighLights

  1. सानिया खान ने राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।

  2. अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत चुकी हैं रजत और कांस्य पदक।

जागरण संवाददाता, शामली। सीआइएसएफ की ओर से खेलने वाली जनपद की होनहार खिलाड़ी सानिया खान ने 16 से 21 अगस्त तक महालुंगे, पुणे में आयोजित पांचवीं इंडियन ताइक्वांडो क्योरुगी नेशनल चैंपियनशिप 2026-27 के अंडर-62 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। टीम में शामिल होने के महज सात महीने के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर यह मुकाम उनकी तैयारी, अनुशासन और लगन का सीधा परिणाम है।

सीआइएसएफ के जनसंपर्क अधिकारी कमल शर्मा ने बताया कि सानिया का जन्म 11 सितंबर 2005 को शामली जिले में हुआ। सानिया पुत्री साजिद खान निवासी ग्राम राजढ़, डाक गढ़ी पुख्ता 24 जनवरी 2026 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ताइक्वांडो टीम में शामिल हुईं और सीजीबीएस, महिपालपुर स्थित बल के प्रशिक्षण केंद्र में नियमित अभ्यास शुरू किया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन

सानिया ने नेरोबी, केन्या में आयोजित अंडर-21 वर्ल्ड ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2026 में प्रतिभाग किया। इसके बाद वियतनाम ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने रजत पदक जीता और 8वीं एशियन ताइक्वांडो इंडोनेशियन ओपन चैंपियनशिप 2026 में कांस्य पदक अपने नाम किया। अगस्त में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

महानिदेशक, सीआइएसएफ ने इस उपलब्धि पर कहा कि सानिया की यह जीत बताती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या बड़े मंच की मोहताज नहीं होती। बल का काम मौका और व्यवस्था देना है, बाकी रास्ता खिलाड़ी अपने पसीने से खुद बनाता है। उन्हें विश्वास है कि शामली की यह बेटी आने वाले वर्षों में देश के लिए और बड़े पदक लेकर आएगी।

प्रेरणादायक सफर और प्रभाव

वहीं, शामली जिले से निकलकर वैश्विक फलक तक पहुंचना और फिर देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना यह सफर उन युवाओं के लिए बड़ा उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बीच खेल के मैदान में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। खास तौर पर उन बेटियों के लिए, जिनके सपने अक्सर घर की देहरी पर ही रुक जाते हैं।