सिद्धार्थनगर में रात भर झमाझम बारिश के बाद सुबह खिली तीखी धूप, उमस ने छुड़ाए पसीने
सिद्धार्थनगर में मंगलवार रात भर झमाझम बारिश हुई, जिसके बाद बुधवार सुबह तेज धूप निकलने से उमस बढ़ गई। पिछले ...और पढ़ें
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अगले तीन-चार दिन बारिश की रफ्तार कम रहने का पूर्वानुमान। जागरण
HighLights
सिद्धार्थनगर में मंगलवार रात से देर तक हुई बारिश
बुधवार सुबह धूप निकलने से उमस और गर्मी बढ़ी
कई नदियों का जलस्तर बढ़ा, खतरे के निशान से नीचे
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। सावन में बारिश की बेरुखी के बाद भादों में मौसम का मिजाज बदला है। मंगलवार शाम से हुई वर्षा देर रात तक जारी रही। हालांकि बुधवार सुबह जिले में धूप खिल गई। सुबह से ही तेज धूप रहने के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ा। हालांकि पिछले 24 घंटे में हुई बारिश से मौसम में कुछ राहत मिली है, लेकिन धूप निकलने के साथ गर्मी और उमस फिर महसूस होने लगी। मौसम विज्ञानी ने अगले तीन-चार दिन बारिश की गति कम रहने का पूर्वानुमान जताया है। इस दौरान कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। इसके बाद फिर बारिश जोर पकड़ सकती है।
मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक जिले में 32.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जो सामान्य 12.3 मिलीमीटर से 164 प्रतिशत अधिक थी। लगातार बारिश के चलते मानसून सत्र में बारिश की कमी भी 38 से घटकर 36 प्रतिशत रह गई है। बुधवार को बारिश नहीं होने और धूप निकलने से खेतों में जलभराव वाले क्षेत्रों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

16 घंटे में कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
ड्रेनेज खंड की बुधवार सुबह आठ बजे की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम चार बजे से बुधवार सुबह आठ बजे के बीच उस्का रेलवे पुल पर कूड़ा नदी का जलस्तर सर्वाधिक 0.78 मीटर बढ़ा। यहां जलस्तर 79.38 से बढ़कर 80.16 मीटर पहुंच गया। सड़ुआ नाला 0.70 मीटर बढ़कर 84.20 मीटर, परसौहन घाट पर बूढ़ी राप्ती 0.54 मीटर बढ़कर 91.09 मीटर और बाणगंगा बैराज पर 0.30 मीटर बढ़कर 89.70 मीटर पहुंची।
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बांसी पुल पर राप्ती का जलस्तर 0.16 मीटर बढ़कर 82.67, मुंहचोवा घाट पर बूढ़ी राप्ती 0.16 मीटर बढ़कर 87.46, लोटन पुल पर घोघी लोटन 0.05 मीटर बढ़कर 83.30 मीटर पहुंची। वहीं ककरही पुल पर कूड़ा नदी का जलस्तर 0.07 मीटर और आलमनगर में 0.40 मीटर घटा। नीगोह पुल पर जमुआर नाला 81.23 मीटर पर स्थिर रहा। सभी प्रमुख स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे है। बुधवार को धूप के बावजूद नदियों के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
