दीपावली अब ठीक दो महीने बाद, पांच दिवसीय प्रकाश पर्व में कब है धनरेतस और कब जलेंगे दीप?
प्रकाश पर्व दीपावली का इंतजार सभी को रहता है, अब इसे केवल 60 दिन शेष हैं। यह पांच दिवसीय उत्सव ...और पढ़ें

वाराणसी में दीपावली की तैयारी शुरू पांच दिवसीय प्रकाश पर्व में कब है धनतेरस।
HighLights
दीपावली पर्व के लिए अब केवल 60 दिन शेष हैं।
पांच दिवसीय प्रकाश पर्व में धनतेरस और दीप प्रज्ज्वलन।
भगवान राम के लंका विजय से लौटने का उत्सव।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रकाश पर्व दीपावली का इंतजार साल भर सभी को रहता है। प्रकाश की ऊर्जा और ओजस को खुद में जगाने के इस उत्सव में प्रकाश, पटाखे, पूजन, अर्चन, गणेश लक्ष्मी की पूजा, खरीदारी से लेकर शुभ मुहूर्त में वर्ष भर तक शुभता की कामना और सिद्धी काल का भी लोगों को इंतजार रहता है।
भगवान राम के लंका विजय से लौटने पर अयाेध्या वासियों के इस अंधेरी अमावस की रात को प्रकाशित करने का मौका भारतीय परंपरा का युगों से रहा है। इस लिहाज से अब दीपावली पर्व को मात्र साठ दिन यानी दो माह ही शेष है। अब कारोबार भी चटख होगा तो कारोबारी भी अपनी दुकानों पर सामान जुटाना शुरू कर देंगे।
साल 2026 में मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजन) रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। दीपावली का यह महापर्व पूरे 5 दिनों तक चलता है। साल 2026 में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक की सभी महत्वपूर्ण तिथियों का भारती परंपरा में विशेष मान है।
काशी में दीपावली पर गणेश लक्ष्मी की पूजा के साथ देवों के दर्शन पूजन की विशेष मान्यता भी है। साथ ही काली पूजा का भी मान काशी के बंगीय समाज में काफी है। इस लिहाज से काशी में दीपावली का का क्रम पांच दिनी होता है। वहीं अन्नकूट का आयोजन भी अगले दिन है तो सोमवाती अमावस्या भी दीपावली के ठीक अगले दिन होगा। जबकि मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन भी होना है।
कब है दीपावली
इस बार अमावस्या का मान आठ नवंबर को सुबह 11.27 मिनट से लेकर नौ नवंबर को दोपहर 12.31 तक मुहूर्त माना जा रहा है। जबकि लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5.54 बजे से लेकर 7.50 बजे तक रहेगा। जबकि प्रदोष काल शाम 5.31 बजे से लेकर शाम 8.09 तक रहेगा। इस लिहाज से दीपावली आठ नवंबर रविवार को ही होने का मान है। पूजन काल के दौरान आस्थावान श्रीगणेश लक्ष्मी, धन कुबेर और हनुमान प्रतिमा को स्थापित करते हैं। पुरानी और नई खरीदी हुई मूर्तियों की विधि विधान से पूजा करते हैं। जबकि सिद्धि काल में पूजन कर मंत्रों को भी आस्थावान सिद्ध करते हैं।
दीपपर्व के संपूर्ण आयोजन
- धनतेरस शुक्रवार, धन्वंतरि जयंती 6 नवंबर
- छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी शनिवार, 7 नवंबर
- दिवाली / लक्ष्मी गणेश कुबेर पूजा, हनुमद दर्शन, महाकाली पूजा रविवार, 8 नवंबर
- गोवर्धन पूजा, अन्न्कूट, सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर
- भाई दूज मंगलवार, 10 नवंबर
