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सेटेलाइट तस्वीरों से खुला नेपाल जलप्रलय का राज... 5200 मीटर की ऊंचाई से गिरा ग्लेशियर का दो तिहाई भाग, फिर आया सैलाब

Updated: Fri, 28 Aug 2026 09:22 AM (IST)

Nepal Floods: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ का कारण 5200 मीटर की ऊंचाई से लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर का दो तिहाई हिस्सा टूटना था।

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HighLights

  1. नेपाल में 5200 मीटर से ग्लेशियर का दो तिहाई हिस्सा टूटा

  2. भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ का कारण बना हिमखंड

  3. सेटेलाइट चित्रों ने जलप्रलय के पीछे का रहस्य उजागर किया

सुमन सेमवाल, देहरादून। Nepal Floodsनेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर सेटेलाइट चित्रों ने पूरी तस्वीर साफ कर दी है।

इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) ने सेटेलाइट चित्रों के माध्यम से बताया कि 5200 मीटर की ऊंचाई पर लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर का दो तिहाई हिस्सा टूटने के बाद जलप्रलय ने जन्म लिया, जिसने भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ के हालात पैदा किए और अपने रास्ते मे आने वाली हर एक चीज को तबाह कर दिया।

रिमोट सेंसिंग सेंटर के निदेशक प्रकाश चौहान के अनुसार, 26 अगस्त को करीब सुबह 10:30 बजे भारतीय समय पर प्राप्त तस्वीरों की घटना से पहले की तस्वीरों से तुलना की। 26 अगस्त की लैंडसैट-9 तस्वीर में ग्लेशियर के टूटने और ढहने का क्षेत्र स्पष्ट किया गया। वहीं, 24 अगस्त की सेंटिनल-2 तस्वीर में यही क्षेत्र ग्लेशियर के रूप में दिखाई देता है, जबकि बाद की तस्वीर में वहां बर्फ-चट्टान हिमस्खलन का क्षेत्र दर्ज हुआ।

हिमखंड ने तय किया 1200 मीटर का सफर

उपग्रह तस्वीरों में भोटेकोशी नदी का सामान्य चैनल के मुकाबले काफी चौड़ा और बाढ़ का पानी आसपास की घाटी तक फैला दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि हिमखंड ने 5200 मीटर की ऊंचाई से ढलान में करीब 1200 मीटर का सफर तय किया। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तेज ढलान में घर्षण हुआ और हिमखंड पानी के सैलाब में बदलते चले गए।

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पानी के साथ भारी भूस्खलन भी हुआ और बड़े-बड़े बोल्डर भी बहते चले गए। जिसने बाढ़ को विनाशकारी स्वरूप प्रदान कर दिया। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय उपग्रह कंपनी प्लैनेट लैब्स की घटना से पहले और बाद की तस्वीरों की विशेषज्ञ समीक्षा में भी हरे पहाड़ी ढलान के बड़े हिस्से के भूरे मलबे और तलछट से ढक जाने के प्रमाण मिले।

एनआरएससी की प्रारंभिक प्रक्रिया के अनुसार, मलबे से नदी के संकरे हिस्से में अस्थायी अवरोध बनने और उसके पीछे जमा पानी व मलबे के अचानक मुक्त होने की संभावना है। विस्तृत अध्ययन अभी जारी है।

आपदा से पहले आया था भूंकप, तलाशे जा रहे संबंध

विज्ञानियों के अनुसार, नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भारतीय समयानुसार 8:22 पर 4.9 मैग्नीट्यूट का भूकंप आया था, जिसकी गहराई करीब 10 किमी थी। यह भी माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर का बड़ा भाग अस्थिर हो गया हो। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत अध्ययन अभी जारी है।

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