सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। इस दौरान पितरों की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष में मातृ नवमी कब है?
पंचांग के अनुसार, इस बार मातृ नवमी 25 सितंबर को है। इसी दिन महिला पितरों का श्राद्ध किया जाएगा। वहीं, उदया तिथि यानी 26 सितंबर को भी मना सकते हैं।
पंचांग के अनुसार, मातृ नवमी तिथि की शुरुआत 25 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 26 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा।
पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के रूप में माना जाता है। इस दिन महिला पितरों का श्राद्ध किया जाता है। ऐसा करने से जीवन में खुशहाली आती है।
मातृ नवमी के दिन स्नान करने के बाद महिला पितरों का श्राद्ध करें। इस दौरान अपने मुख को दक्षिण दिशा में कर लें। इस दौरान महिला पितरों की फोटो जरूर रखें।
महिला पितरों की श्राद्ध करते समय फोटो पर फूल-माला अर्पित करें। इसके साथ ही, काले तिल के तेल का दीपक जलाएं। इस दौरान गंगाजल में तुलसी का पत्ता डालकर अर्पित करें।
पूजा के समय पितरों को भोजन का भोग लगाएं। इसके बाद इस भोजन को कौआ, चींटी और गाय को खिला दें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
मातृ नवमी पर महिला पितरों की इस विधि के श्राद्ध करने से जीवन में खुशहाली आती है। इसके साथ ही, रुके हुए कार्य संपन्न होने लगते हैं।
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