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मुस्लिम समुदाय ने शुरू की थी जन्माष्टमी, अब केवल हिंदू करेंगे आयोजन; कोलकाता में टूटी 60 साल पुरानी परंपरा

Updated: Wed, 02 Sep 2026 09:09 AM (IST)

कोलकाता के मोमिनपुर में 60 साल से चली आ रही हिंदू-मुस्लिम मिलकर जन्माष्टमी मनाने की परंपरा इस साल 'केवल हिंदुओं' के लिए कर दी गई है।

मोमिनपुर की जन्माष्टमी (सोशल मीडिया)

मोमिनपुर की जन्माष्टमी (सोशल मीडिया)

HighLights

  1. मोमिनपुर में 60 साल बाद बदली जन्माष्टमी परंपरा।

  2. अब हिंदू-मुस्लिम मिलकर नहीं मनाएंगे जन्माष्टमी का त्योहार।

  3. बीजेपी नेता राकेश सिंह ने मुसलमानों की भूमिका खत्म की।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मोमिनपुर इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो वर्षों से चली आ रही गंगा-जमुनी तहजीब को एक बड़ा झटका देती है। कोलकाता में पिछले करीब 60 सालों से दोनों समुदायों की मिलकर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी इस साल से पूरी तरह 'केवल हिंदुओं' के लिए कर दी गई है। इस बदलाव ने इलाके की पुरानी अंतर-धार्मिक परंपरा को अचानक बदल कर रख दिया है।

समझिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि मोमिनपुर में जन्माष्टमी मनाने की इस परंपरा की शुरुआत करीब छह दशक पहले एक मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता एम. काशिम ने की थी। हालांकि बीच में यह आयोजन बंद हो गया था, लेकिन साल 2011 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सत्ता में आने के बाद स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने इसे फिर से शुरू किया। पिछले कई सालों से इस आयोजन समिति में हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग मिलकर हिस्सा लेते थे और सभी रीति-रिवाज साथ मिलकर निभाते थे।

समिति के पूर्व पदाधिकारी और टीएमसी नेता एम. आलम ने बताया कि 20 सदस्यों की इस कमेटी में आधे सदस्य मुस्लिम थे। सब मिलकर प्रसाद बांटते थे और त्योहार मनाते थे। लेकिन अपने 50वें साल में प्रवेश कर रहा यह आयोजन इस बार बिल्कुल अलग रंग में नजर आ रहा है, जहां पंडाल के पास एक बड़ा भगवा रंग का बैनर भी लगा दिया गया है।

क्यों आया यह बदलाव?

गौर करने वाली बात यह है कि इस अचानक बदलाव के पीछे बीजेपी नेता राकेश सिंह का हाथ बताया जा रहा है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पोर्ट निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए थे। खुद को आयोजन समिति का अध्यक्ष और चेयरपर्सन बताने वाले राकेश सिंह का कहना है कि अब इस आयोजन में मुसलमानों की कोई भूमिका नहीं होगी, क्योंकि जन्माष्टमी एक हिंदू त्योहार है।

उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि हम अपनी पारंपरिक संस्कृति को कमतर नहीं आंक सकते। दूसरे धर्मों के लोग पंडालों में आ सकते हैं, लेकिन हमारी धार्मिक गतिविधियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। जन्माष्टमी एक हिंदू त्योहार है और इसे केवल हिंदुओं द्वारा ही मनाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं समिति से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने इस बदलाव को 'शुद्धिकरण' जैसा करार दिया है।

वीएचपी की विचारधारा का असर भी समझिए

हालांकि दूसरी ओर माना जा रहा है कि यह बदलाव विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उस हालिया अभियान के बाद आया है, जिसमें उसने कोलकाता के दुर्गा पूजा आयोजकों से अपील की थी कि वे हिंदू संस्कृति और विरासत को बचाएं, मूर्तियों के स्वरूप से छेड़छाड़ न करें और पंडालों के अंदर मांसाहारी भोजन पर रोक लगाएं। राकेश सिंह ने भी माना कि उनका यह रुख वीएचपी की उसी विचारधारा के अनुरूप है, जिसके तहत धर्म और त्योहार उसी समुदाय के पास होने चाहिए।