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अमेरिका में कल से मिडटर्म इलेक्शन, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 2 साल बाद ही क्यों हो रहे चुनाव; हारे तो क्या होगा?

Published: Mon, 02 Nov 2026 12:31 PM (IST)

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव से ट्रंप की कुर्सी को तो खतरा नहीं है लेकिन ट्रंप की ताकतों पर कुछ खतरा जरूर है।

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव। (फोटो-रॉयटर्स)

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव। (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच संसद के लिए होते हैं।

  2. ट्रंप की पार्टी हारी तो उनकी शक्तियां सीमित हो जाएंगी।

  3. अर्थव्यवस्था, आव्रजन जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम हैं।

अंशिका अग्रवाल, नई दिल्ली। अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इन मिडटर्म के नतीजे अमेरिकन नेशनल लेजिस्लेचर, स्टेट गवर्नरशिप और हजारों लोकल ऑफिस में पावर बैलेंस को तय करते हैं।

मिडटर्म चुनाव यानी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होने वाले संसद के चुनाव। इस चुनाव से ट्रंप की कुर्सी को तो खतरा नहीं है लेकिन ट्रंप की ताकतों पर कुछ खतरा जरूर है। वोटिंग खत्म होते ही गिनती शुरू हो जाएगी और 4 नवंबर को नतीजे आ जाएंगे।

ये मिडटर्म इलेक्शन क्या है? भारत के चुनाव से कितना अलग है, कौन जीत सकता है और ट्रम्प की पार्टी हारी तो क्या-क्या बदलेगा? आइये जानते हैं।

अमेरिका में क्या होता है मिडटर्म इलेक्शन?

मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इनमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस के दोनों सदनों के साथ कई राज्यों के महत्वपूर्ण पदों के लिए मतदान होता है।

इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव होगा। इसके अलावा, 39 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव निर्धारित हैं। नई यानी 120वीं कांग्रेस जनवरी 2027 में कामकाज शुरू करेगी।

मिडटर्म इलेक्शन का अनोखा सिस्टम?

अमेरिका में भी संसद यानी 'कांग्रेस' के दो सदन हैं प्रतिनिधि सभा और सीनेट।

विशेषता / मानक प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) सीनेट (Senate)
भारतीय समकक्ष अमेरिका की लोकसभा (निचला सदन) अमेरिका की राज्यसभा (उच्च सदन)
कुल सीटें 435 100
सीटों का आवंटन राज्यों की जनसंख्या के आधार पर (औसतन 7.6 लाख लोगों पर 1 सीट) सभी 50 राज्यों को समान प्रतिनिधित्व (प्रति राज्य 2 सीनेटर)
कार्यकाल 2 वर्ष 6 वर्ष
चुनावी प्रक्रिया हर 2 साल में सभी 435 सीटों पर एक साथ चुनाव हर 2 साल में एक-तिहाई (लगभग 33-35) सीटों पर बारी-बारी से चुनाव
मौजूदा चुनाव की स्थिति सभी 435 सीटों पर चुनाव होंगे (पिछला चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था) इस बार 35 सीटों पर चुनाव होंगे

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव का उद्देश्य हाउस के सदस्यों की जनता के प्रति जवाबदेही और राष्ट्रपति की शक्तियों का संतुलन बनाए रखना है।

ट्रम्प की रिपब्लिकन के पास बहुमत

प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटों में से 218 ट्रंप के रिपब्लिकन के पास है और 214 सीट डेमोक्रेटिक के पास है। वहीं एक सीट निर्दलीय के पास है।

सीनेट में कुल 100 सीटों में से 53 ट्रंप के रिपब्लिकन के पास है और 45 सीट डेमोक्रेटिक के पास है। 2 सीटें निर्दलीय के पास हैं।ट्रम्प फिलहाल दोनों सदनों में मजबूत हैं। लेकिन अगर मिडटर्म इलेक्शन में उनकी पार्टी बहुमत नहीं ला पाई तो स्थिति बदल जाएगी।

भारत में लोकसभा में बहुमत गया तो प्रधानमंत्री की कुर्सी जा सकती है। लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद अलग-अलग चुने जाते हैं, इसलिए बहुमत जाने पर भी सीधे राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं जाती। अगला राष्ट्रपति का चुनाव नवंबर 2028 में है।

20 में से 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी हारी

मिडटर्म चुनाव को अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए श्राप माना जाता है। पिछले 20 में से 18 बार यानी 90 प्रतिशत चुनाव राष्ट्रपति की पार्टी हारी है। अभी तक सिर्फ 2 राष्ट्रपति ही इससे बच चुके हैं। 1998 में बिल क्लिंटन और 2002 में 9/11 हमले के बाद जॉर्ज बुश।

मिडटर्म चुनाव में सत्ताधारी दल की स्थिति

2002 से अब तक के मिडटर्म चुनाव में सत्ताधारी दल की स्थिति को एक बार इस आंकड़े से समझिए। 

वर्ष राष्ट्रपति पार्टी सीटों का परिणाम
2002 जॉर्ज डब्ल्यू. बुश रिपब्लिकन पार्टी +8 सीटों पर बढ़त
2006 जॉर्ज डब्ल्यू. बुश रिपब्लिकन पार्टी -30 सीटें हारीं
2010 बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी -63 सीटें हारीं
2014 बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी -13 सीटें हारीं
2018 डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी -41 सीटें हारीं
2022 जो बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी -9 सीटें हारे

सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त

7 बड़े सर्वे में ट्रंप की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिली है।

ओपिनियन पोल रिपब्लिकन डेमोक्रेटिक मार्जिन
NYT/Siena 41% 52% -11
CNN 39% 49% -10
Reuters/Ipsos 44% 53% -9
NPR/PBS/Marist 44% 52% -8
CBS/YouGov 45% 53% -8
CNBC 45% 52% -7
Morning Consult 43% 50% -7

हाउस में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत जीतने की 90 प्रतिशत से ज्यादा और सीनेट में 65 प्रतिशत से ज्यादा संभावना है। वहीं ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 36 प्रतिशत से 38 प्रतिशत के बीच पहुंच गई है। कुल पोल में तो 32 प्रतिशत तक है, जो मिडटर्म से पहले राष्ट्रपति की सबसे कम अप्रूवल रेटिंग्स में से एक है।

महंगाई से लेकर ईरान युद्ध तक, चुनाव पर दिख सकता है असर

इस चुनाव में मतदाताओं के लिए रोजमर्रा के खर्च का सवाल सबसे अहम है। प्यू रिसर्च सेंटर के 8 अक्तूबर को जारी सर्वेक्षण के अनुसार, 84 प्रतिशत मतदाताओं ने अर्थव्यवस्था को अपने मतदान के फैसले के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया। इमिग्रेशन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, विदेश नीति और लोकतंत्र का भविष्य भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।

ट्रंप की राजनीति में इमिग्रेशन लंबे समय से केंद्रीय मुद्दा रहा है। उनका प्रशासन अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों को देश से निकालने की नीति पर जोर देता रहा है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ता है।

वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से इस सख्ती के सामाजिक असर, परिवारों के बिछड़ने और कामगारों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

प्यू के सर्वेक्षण में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थकों में 72 प्रतिशत और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थकों में 53 प्रतिशत ने इमिग्रेशन को अपने वोट के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा माना।

स्वास्थ्य सेवाओं पर डेमोक्रेटिक समर्थकों का जोर अधिक दिखता है। सर्वेक्षण में 82 प्रतिशत डेमोक्रेटिक समर्थकों ने इसे बहुत महत्वपूर्ण बताया, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत था।

शिक्षा के मामले में भी दोनों दलों के समर्थकों की प्राथमिकताओं में अंतर है। लोकतंत्र के भविष्य को 73 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा माना।

विदेश नीति भी ट्रंप के लिए चुनौती बन सकती है। ईरान युद्ध और उससे जुड़ी पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

रॉयटर के सर्वेक्षण में 68 प्रतिशत अमेरिकियों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के ट्रंप के तरीके पर असंतोष जताया। इसके अलावा, टैरिफ नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका की भूमिका भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकती है।

ट्रंप की ताकत हो जाएंगी सीमित

राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान से आती हैं न कि सिर्फ कांग्रेस के बहुमत से। अगर ट्रंप मिडटर्म में रिपब्लिकन हाउस, सीनेट या दोनों हार जाते हैं तो ट्रंप की ताकत सीमित हो जाएगी, लेकिन वे पूरी तरह कमजोर नहीं होंगे।

ट्रम्प पहले की तरह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर सकते हैं, कांग्रेस के किसी भी बिल पर वीटो लगा सकते हैं और विदेश नीति व सैन्य कार्रवाइयों पर फैसले ले सकते हैं।

ट्रंप की चार बड़ी ताकतों पर पड़ेगा असर

1. ट्रंप की मनमाफिक नए कानून टैक्स कटौती या सख्त इमिग्रेशन बिल पास नहीं करा पाएंगे। उनके पास इसके लिए पर्याप्त वोट नहीं होंगे।

2. समितियों पर डेमोक्रेट्स का कंट्रोल हो सकता है। वे ट्रंप प्रशासन के कामकाज, फैसलों वगैरह पर जांच शुरू कर सकते हैं। सम भेज सकते हैं।

3. हाउस सरकारी बजट पास करता है। ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच सरकारी खर्चों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। सरकारी कामकाज ठप पड़ सकता है।

4. अगर सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत आ गया, तो ट्रंप की पसंद के नए जजों कैबिनेट मंत्रियों और अन्य अधिकारियों की नियुक्तियां मुश्किल हो सकती हैं।

ट्रंप को और क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिका की राजनीति 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की ओर बढ़ने लगेगी। ऐसे में ट्रंप को 2 बड़े नुकसान हो सकते हैं।

1. पार्टी पर कम हो सकती है पकड़

ट्रम्प का यह दूसरा कार्यकाल है। कानूनन वे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। उनके 'लेम-डक' प्रेसिडेंट बनने और पार्टी पर पकड़ कमजोर होने का खतरा है।

दरअसल, अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प की बात मानना और उनका बचाव करना बंद कर सकते हैं। वे अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना सकते हैं।

2. ट्रंप परिवार के क्रिप्टो कारोबार की जांच

ट्रम्प परिवार से जुड़ी World Liberty Financial नाम की एक क्रिप्टो कंपनी है। इसका USD1 नाम का स्टेबलकॉइन है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मई 2025 में आबू धाबी की निवेश फर्म MGX ने क्रिप्टो एक्सचेंज Binance में 2 अरब डॉलर का निवेश किया था।

इस सौदे में USD1 का इस्तेमाल हुआ। ऐसे में USD1 के पीछे जमा संपत्तियों से मिलने वाले ब्याज से ट्रंप परिवार को करीब 80 मिलियन डॉलर का मुनाफा हो सकता है।

इसके अलावा ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से पहले भी UAE की One Investment की ओर से इस क्रिप्टो कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी लेने के आरोप लगते रहे हैं।

बाद में Binance के फाउंडर चांगपेंग झाओ पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे और वे जेल भी गए, तो अक्तूबर 2025 में ट्रंप ने उन्हें क्षमादान दे दिया। इसके चलते ट्रंप पर निजी फायदे के आरोप लगे।

ट्रंप परिवार से जुड़े इस क्रिप्टो कारोबार पर संसदीय समितियां जांच शुरू कर सकती हैं।

हार से बचने के लिए क्या कर सकते हैं ट्रंप?

2020 में जब जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तब से ट्रंप चुनाव में गड़बड़ी की बाते कह रहे हैं। तब ऐसा माहौल बना कि 6 जनवरी को हजारों ट्रम्प समर्थक अमेरिकी संसद तक पहुंच गए थे।

ट्रम्प ने सितंबर में रिपब्लिकन पार्टी के कन्वेंशन में सहयोगियों से कहा कि उनकी (डेमोक्रेट्स) तरह चीटिंग करो। ट्रंप के कई सलाहकारों ने उन्हें चुनाव में धांधली की आशंका के चलते इमरजेंसी लगाने का भी सुझाव दिया है। इसे चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय एजेंसियों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी।

हालांकि रिपोर्ट्स हैं कि ट्रम्प ने यह सुझाव खारिज कर दिया है, क्योंकि इमरजेंसी लगाने से चुनाव प्रक्रिया में राष्ट्रपति का कंट्रोल नहीं हो जाएगा।

ट्रम्प प्रशासन फर्जीवाड़े के नाम पर इलेक्शन अधिकारियों को चुनाव परिणाम बदलने, खारिज करने, या टालने के लिए धमका सकता है। 2020 का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद भी ट्रम्प ने ऐसा किया था।

इससे काउंटिंग में रुकावट आएगी। जनवरी 2020 में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के एजेंट्स ने जॉर्जिया के फुल्टन काउंटी में चुनाव ऑफिस पर छापा मारा और चुनाव से जुड़े सैकड़ों रिकॉर्ड जब्त कर लिए थे।

इसके अलावा चुनाव निगरानी के लिए 1000 फेडरल इलेक्शन मॉनिटर्स तैनात किए गए हैं। यह 2024 राष्ट्रपति चुनाव के समय तैनात 590 अधिकारियों से लगभग दोगुने हैं।

सुरक्षा का हवाला देकर वोटिंग के दिन सैनिकों की तैनाती भी बढ़ाई जा सकती है, जिससे लोगों में डर का माहौल बना सकता है।

गर्वनरों के चुनाव भी अहम

कांग्रेस के साथ राज्यों की राजनीति भी इस चुनाव का बड़ा हिस्सा है। तीन नवंबर को 39 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव होंगे। इनमें 18 मौजूदा गवर्नर फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 21 राज्यों में पद पर बैठे गवर्नर कार्यकाल की सीमा या अन्य कारणों से मैदान में नहीं हैं।

गवर्नर राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे मामलों में अहम भूमिका निभाते हैं। कई राज्यों में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया में भी उनका प्रभाव हो सकता है।

इसलिए इन चुनावों का असर केवल राज्य सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2028 के कांग्रेस चुनावों की राजनीतिक जमीन पर भी पड़ सकता है।

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