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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार, दुनिया भर में बदले कूटनीतिक समीकरण; भारत, ईरान और चीन पर क्या होगा असर?

Published: Wed, 04 Nov 2026 10:09 PM (IST)

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार के बाद डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से वैश्विक कूटनीतिक समीकरण बदल गए हैं। यह ...और पढ़ें

US मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की हार का दुनिया पर पड़ेगा असर।

US मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की हार का दुनिया पर पड़ेगा असर।

HighLights

  1. ईरान ने कहा अमेरिकी बदलाव से शत्रुता में कमी नहीं आएगी।

  2. इजरायल के लिए डेमोक्रेट्स का नियंत्रण नई कूटनीतिक चुनौतियां लाया।

  3. भारत पर व्यापार समझौते को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका है।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है, जिसमें डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट दोनों पर कब्जा कर लिया है। अपनी पार्टी की हार से राष्ट्रपति बेहद नाराज हैं।

दुनियाभर की सरकारें इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और यह आकलन कर रही हैं कि अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का यह बदलाव वाशिंगटन की विदेश नीति और दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और गठबंधनों के प्रति उसके नजरिए को कैसे बदल सकता है।

ईरान: 'चेहरे बदलने से नहीं बदलेगी दुश्मनी'

ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स की वापसी पर सख्त रुख अपनाया है। 4 नवंबर को ईरान में आयोजित अमेरिका विरोधी दिवस के अवसर पर जारी एक संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव से तेहरान के प्रति उसकी शत्रुता में कोई कमी नहीं आएगी।

खामेनेई ने कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि वर्चस्ववादी व्यवस्था में पार्टियां बदलने से अमेरिकी व्यवहार बदल जाएगा, तो यह भारी गलतफहमी है।

उन्होंने किसी भी रियायत की संभावना खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका बिना शर्त आत्मसमर्पण चाहता है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाइयों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि किसी भी नई आक्रामकता का अंजाम बेहद व्यापक होगा।

28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और उनका यह संदेश भी केवल लिखित रूप में जारी किया गया।

इजरायल: डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से बढ़ीं नेतन्याहू की मुश्किलें

अमेरिकी कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स के कब्जे ने इजरायली नेतृत्व के सामने नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इजरायली विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप या तो ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते की राह चुन सकते हैं या फिर जल्दी जीत दिखाकर अमेरिकी भागीदारी समेटने के लिए सीमित सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकते हैं।

संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के काबिज होने से गाजा संघर्ष, हथियार आपूर्ति और सैन्य सहायता पर कड़ी संसदीय जांच शुरू हो सकती है।

ज़ोहरान ममदानी और अब्दुल अल-सैयद जैसे इजरायल-आलोचक नेताओं की जीत ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इजरायल नीति पर सवाल उठाने वाले नेताओं का प्रभाव बढ़ेगा।

भारत: व्यापार समझौते पर दबाव बढ़ने की आशंका

भारत पर वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौता करने का नया दबाव पड़ सकता है। मिडटर्म चुनावों में अपनी पार्टी की हार के बाद डोनल्ड ट्रंप आर्थिक और कूटनीतिक जीत दिखाना चाहेंगे।

हालांकि कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होने से ट्रम्प की टैरिफ नीतियों की जांच-पड़ताल बढ़ सकती है, लेकिन इससे प्रशासन के व्यापक व्यापार दृष्टिकोण में शायद ही कोई बड़ा बदलाव आए।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटि के विश्लेषण के अनुसार, घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक झटका खाने और रूस चीन ईरान मोर्चे पर उलझने के बाद ट्रंप अपनी साख बचाने के लिए आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर त्वरित सफलता दिखाना चाहेंगे।

ट्रंप प्रशासन भारत के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए दबाव बढ़ा सकता है।

अमेरिका अपने कृषि व औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों में अधिक पहुंच और अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामानों की खरीद की प्रतिबद्धता मांग सकता है।

रूस से रियायती तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त शुल्क की धमकियों का खतरा बना रह सकता है। हालांकि, डेमोक्रेटिक कांग्रेस ट्रंप की एकतरफा टैरिफ नीतियों की समीक्षा बढ़ाएगी, लेकिन अमेरिकी नीति में आर्थिक राष्ट्रवाद की साझा सहमति के चलते भारत को राहत के लिए कड़ा कूटनीतिक मोलभाव करना होगा।

कनाडा: मार्क कार्नी देख रहे हैं बेहतर डील का अवसर

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संकेत दिया है कि मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की कमजोरी ने ओटावा की सौदेबाजी की क्षमता को मजबूत किया है।

कॉमनवेल्थ बैठक के दौरान कार्नी ने टिप्पणी की कि व्हाइट हाउस अब अपनी मांगों में नरमी ला रहा है और कई अहम 'रेड लाइन्स' पर रुख बदल रहा है।

हालांकि, पूर्व राजनयिकों ने कनाडा सरकार को आगाह किया है कि वह जल्दबाजी के बजाय दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर ही बातचीत आगे बढ़ाए।

यूरोप और नाटो: रक्षा नीतियों में असमंजस

यूरोपीय सहयोगियों के लिए डेमोक्रेट्स की जीत यूक्रेन सहायता और नाटो के प्रति समर्थन की दृष्टि से राहत भरी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस ट्रंप प्रशासन को रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने या कीव को दी जाने वाली सैन्य मदद में अचानक कटौती करने से रोकेगी।

हालांकि, यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने और रक्षा समीक्षा करने के मामले में राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र कार्यकारी अधिकार हैं। घरेलू मामलों में घिरे ट्रंप 2028 से पहले अपनी राजनीतिक छाप छोड़ने के लिए विदेश नीति में अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं।

दक्षिण कोरिया: दोहरी कूटनीतिक चुनौती

सियोल के लिए स्थिति पेचीदा हो गई है क्योंकि उसे ट्रंप प्रशासन और डेमोक्रेटिक कांग्रेस के साथ अलग-अलग स्तर पर तालमेल बैठाना होगा।

राष्ट्रपति ली जे जे-म्युंग के परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियों के ईंधन समझौते पर डेमोक्रेटिक सांसद परमाणु अप्रसार के नियमों का हवाला देकर अड़ंगा लगा सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खर्च का बड़ा हिस्सा उठाने और 350 अरब डॉलर के निवेश समझौते को लेकर दबाव बना सकता है।

चीन: स्थिरता और निरंतरता की वकालत

चीन ने बेहद नपे तुले शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह अमेरिका का आंतरिक मामला है।

बीजिंग ने संकेत दिया कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनल्ड ट्रंप के बीच हालिया शिखर वार्ताओं में बनी आम सहमति के लागू करने के लिए वाशिंगटन के साथ काम करना जारी रखेगा। चीन दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक स्थिरता को बिना किसी व्यवधान के आगे बढ़ाने का पक्षधर है।

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