अमेरिका का पैसा, चीन में प्रोडक्शन... रोबोट डॉग्स कैसे हथियारों की नई होड़ में हुए शामिल?
चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी के रोबोट डॉग्स अमेरिकी सेना द्वारा वित्त पोषित अनुसंधान पर आधारित हैं, लेकिन चीन ने उन्हें बड़े पैमाने पर किफायती उत्पादों में बदल दिया है।

रोबोट डॉग्स कैसे हथियारों की नई होड़ में हुए शामिल। (रॉयटर्स)
HighLights
यूनिट्री रोबोट डॉग्स अमेरिकी सैन्य अनुसंधान पर आधारित।
चीन ने अमेरिकी तकनीक को किफायती उत्पादों में बदला।
अमेरिकी सेना ने भी चीनी रोबोट डॉग्स का उपयोग किया।
डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन की कंपनी 'यूनिट्री रोबोटिक्स' जो इंसानों जैसे दिखने वाले (ह्यूमनॉइड) और चार पैरों वाले (क्वाड्रुपेड) रोबोट बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में से एक है। उसने अपने कुछ सबसे सफल रोबोट डॉग्स उन तकनीकी खोजों के आधार पर बनाए हैं जो अमेरिकी सेना की फंडिंग वाली रिसर्च से विकसित हुई थीं।
यूनिट्री का मामला एडवांस्ड मिलिट्री और दोहरे इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी की होड़ में अमेरिका के सामने बढ़ती चुनौती को दिखाता है। अमेरिकी सरकार की फंडिंग वाली रिसर्च से महत्वपूर्ण खोजें तो हो रही हैं, लेकिन चीनी कंपनियां अक्सर उन्हीं जैसी टेक्नोलॉजी को किफायती और बड़े पैमाने पर बनने वाले प्रोडक्ट्स में बदलने में ज्यादा सफल साबित हो रही हैं।
यूनिट्री के 1,600 डॉलर वाले Go2 रोबोट, जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था, उसने कंपनी को ग्लोबल क्वाड्रुपेड रोबोट मार्केट में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ाने में मदद की। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, पिछले साल कंपनी ने 18,000 से ज्यादा क्वाड्रुपेड रोबोट और 5,500 ह्यूमनॉइड रोबोट बेचे, और स्टॉक मार्केट में आने से पहले इसकी वैल्यूएशन लगभग 9 अरब डॉलर थी।
रिसर्चर्स और अमेरिका के डिफेंस टेक्नोलॉजी के एक पूर्व अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि यूनिट्री के लोकप्रिय रोबोट डॉग्स के पीछे की टेक्नोलॉजी का कुछ हिस्सा अमेरिकी सेना की रिसर्च लैबोरेटरी, डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी और अन्य मिलिट्री प्रोग्राम्स की फंडिंग वाली रिसर्च से जुड़ा है।
सेना की फंडिंग वाले प्रोग्राम ने क्वाड्रुपेड रोबोट के लिए अहम टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में मदद की, जिसमें भारी सेंट्रल गियरबॉक्स पर निर्भर रहने के बजाय पैरों में मोटर लगाना शामिल था। इस तरीके से ऊबड़-खाबड़ ज़मीन को समझने और उस पर प्रतिक्रिया देने की रोबोट की क्षमता बेहतर हुई।
इस प्रोग्राम में शामिल यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के पूर्व रिसर्चर गैविन केनेली ने कहा कि आर्मी के फंड से हुआ यह काम असल में पहला ऐसा यूनिट्री रोबोट था जो बड़े पैमाने पर तैयार किया गया।
US मिलिट्री की रिसर्च चीन तक कैसे पहुंची
US आर्मी ने 2010 से 2020 तक रोबोटिक्स कोलैबोरेटिव टेक्नोलॉजी एलायंस को फंड दिया। इस प्रोग्राम में सरकार, एकेडेमिया और इंडस्ट्री के रिसर्चर एक साथ आए, जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया, MIT, बोस्टन डायनामिक्स और NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी शामिल थीं।
मिशिगन स्थित डिफेंस कंपनी 'जनरल डायनामिक्स लैंड सिस्टम्स', जो अब्राम्स M1 टैंक बनाती है, इस एलायंस की मुख्य कमर्शियल पार्टनर थी।
यह रिसर्च MIT में DARPA द्वारा फंड किए गए पिछले काम पर आधारित थी। 2016 में, केनेली समेत यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के रिसर्चर ने एक ऐसा डिजाइन डेवलप किया जिसमें भारी सेंट्रल गियरबॉक्स की जरूरत नहीं थी और उसकी जगह मोटर सीधे रोबोट के पैरों में लगाई गई थीं।
इस बदलाव से मशीनें जमीन की बनावट के हिसाब से ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर पाईं और फुर्तीले चार पैरों वाले रोबोट के डेवलपमेंट में मदद मिली।
2019 में, MIT के रिसर्चर ने 'मिनी चीता' पेश किया, जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में डेवलप की गई खूबियों के साथ-साथ ज्यादा मजबूती और बैकफ्लिप करने की क्षमता भी शामिल थी।
चीन ने रिसर्च को बड़े पैमाने पर बिकने वाले रोबोट में बदला
यूनिट्री की कहानी एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के मामले में अमेरिका और चीन के नजरिए के बीच बड़े अंतर को दिखाती है। अमेरिका ने बेसिक रिसर्च और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है, जबकि चीन ने बड़े इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाए हैं जो बड़े पैमाने पर और कम कीमत पर पार्ट्स बना सकते हैं।
चीनी मैन्युफैक्चरर्स ने सप्लायर नेटवर्क, पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्रियों और जरूरी मिनरल्स तक पहुंच का इस्तेमाल करके रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया है।
हांगझोऊ में यूनिट्री का बेस ऐसे सप्लायर्स से घिरा हुआ है जो रोबोटिक्स में इस्तेमाल होने वाले मोटर, गियर, एक्चुएटर और दूसरे पार्ट्स बनाते हैं। रोबोटिक मैग्नेट में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मिनरल्स की प्रोसेसिंग में चीन के दबदबे ने भी मैन्युफैक्चरर्स को लागत कम करने और प्रोडक्शन बढ़ाने में मदद की है।
सेमी-एनालिसिस के रोबोटिक्स एनालिस्ट रेक नुटसेन ने घरेलू रिसर्च को कमर्शियल रूप न दे पाने की अमेरिका की नाकामी को मौका गंवाने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में वेंचर कैपिटल ने अक्सर ज्यादा रिटर्न देने वाले सॉफ्टवेयर बिजनेस को प्राथमिकता दी है, न कि ज्यादा पूंजी लगाने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को।
आर्मी रिसर्च लेबोरेटरी के पूर्व डायरेक्टर जैरेट रिडिक, जिन्होंने रोबोटिक्स प्रोजेक्ट की देखरेख की थी, उसने कहा कि इस प्रोग्राम ने अमेरिका में चौपाया रोबोटिक्स इंडस्ट्री को शुरू करने में मदद की। लेकिन बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए पर्याप्त सपोर्ट न मिलने के कारण, चीन की यूनिट्री ने उस जगह पर कब्जा कर लिया।
यूनिट्री पर अब अमेरिकी पाबंदियां
अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर चीनी रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी पर पाबंदियां लगाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं।
जून में, पेंटागन ने यूनिट्री को चीनी मिलिट्री कंपनियों की लिस्ट में शामिल किया और इसे चीनी डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस में योगदान देने वाली कंपनी बताया। इस कैटेगरी में शामिल होने का मतलब सीधे तौर पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इससे अमेरिकी सेना द्वारा भविष्य में यूनिट्री की टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर रोक लग जाती है।
जुलाई में, फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन ने विदेशी मूल के ह्यूमनॉइड (इंसान जैसे दिखने वाले) और चौपाया रोबोट के भविष्य के मॉडल्स के इम्पोर्ट पर भी रोक लगा दी, जिसमें यूनिट्री द्वारा बनाए गए रोबोट भी शामिल हैं। चीन ने FCC के कदम के जवाब में जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
अमेरिकी सेना ने भी चीनी रोबोट डॉग्स का इस्तेमाल किया
अमेरिकी रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के बीच के अंतर ने एक अजीब स्थिति भी पैदा कर दी है, जिसमें अमेरिकी सेना ने खुद चीन में बने रोबोट डॉग्स को आजमाया है।
खरीद के रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 2023 में अमेरिकी सेना ने दो Unitree Go2 रोबोट खरीदने के लिए उन नियमों से फेडरल छूट हासिल की, जिनके तहत सरकारी एजेंसियों को अमेरिकी उत्पादों को प्राथमिकता देनी होती है। रिकॉर्ड में इन रोबोट्स को महत्वपूर्ण बताया गया क्योंकि संतोषजनक क्वालिटी वाले अमेरिकी-निर्मित विकल्प पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थे।
रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि खरीद पूरी हुई या नहीं
अमेरिकी सेना ने चार पैरों वाले रोबोट्स को हथियारबंद बनाने के साथ भी प्रयोग किए हैं। सितंबर 2023 में, अमेरिकी मरीन ने एक Go1 रोबोट के साथ एक एक्सरसाइज़ की, जिसमें दूर से फायरिंग के लिए रॉकेट लॉन्चर लगा था। चीनी सेना की एक्सरसाइज़ में भी इसी तरह रोबोट डॉग्स का इस्तेमाल किया गया है।
चीनी सरकारी टेलीविजन ने Unitree Go2 रोबोट्स को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों के साथ काम करते हुए दिखाया है। एक और मॉडिफाइड Unitree B1 रोबोट को माउंटेड असॉल्ट राइफल से फायरिंग करते हुए दिखाया गया है।
Unitree का कहना है कि उसके उत्पाद आम लोगों के इस्तेमाल के लिए हैं। 2022 में, कंपनी ने नुकसान के जोखिम और गंभीर नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए, रोबोट्स को हथियारबंद न करने का वादा करने वाले एक ओपन लेटर पर हस्ताक्षर करने में अमेरिकी रोबोटिक्स कंपनियों का साथ दिया।
चलने वाले रोबोट्स अभी तक युद्ध के मैदानों में बड़े पैमाने पर तैनात नहीं किए गए हैं, लेकिन अमेरिका और चीन दोनों ही मिलिट्री कामों के लिए उनकी क्षमता की जाँच कर रहे हैं, जिसमें निगरानी, टोह लेना और मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन शामिल हैं।
