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अमेरिका-ईरान तनाव का असर, कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर के पार; भारत पर भी पड़ेगा प्रभाव

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:49 AM (IST)Updated: Fri, 11 Sep 2026 06:59 AM (IST)

अमेरिका-ईरान तनाव के बढ़ने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को सात प्रतिशत तक उछलकर 107 डालर ...और पढ़ें

अमेरिका-ईरान तनाव का असर, कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर के पार

अमेरिका-ईरान तनाव का असर, कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर के पार

HighLights

  1. ट्रंप का नया दावा, मध्यावधि चुनाव खत्म होते ही ईरान युद्ध समाप्त होगा 

  2. वेंस-रूबियो को आशंका ट्रंप के कार्यकाल तक ईरान खींच सकता है संघर्ष 

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव के बढ़ने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को सात प्रतिशत तक उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। इस साल 21 मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव इस स्तर पर पहुंचा है।

रॉयटर के अनुसार, अगस्त की शुरुआत के मुकाबले कच्चे तेल की कीमत 30 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता की बात है।

वहीं, अमेरिका में तेल महंगा होकर 5.94 डॉलर प्रति गैलन हो गया। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप लगातार ईरान के साथ कायम तनाव को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने अपने नए दावे में कहा कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य संघर्ष नवंबर में मध्यावधि चुनावों के साथ ही समाप्त हो जाएगा।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान इन चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और अपनी पूरी ताकत को उस अवधि तक बचाकर रखना चाहता है।

उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिकी सेना ईरान के पिकएक्स पहाड़ों पर भी हमले कर सकती है, जो इसके नतांज परमाणु संयंत्र के पास स्थित है।

हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ट्रंप के साथ गोपनीय वार्ता में चिंता जताई कि ये संघर्ष ट्रंप के कार्यकाल यानी जनवरी 2029 तक खिंच सकता है।

उधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (आइआरजीसी) ने चेताया है कि अमेरिका के अगले हमलों के जवाब में करारी प्रतिक्रिया दी जाएगी और इसकी कोई सीमा नहीं रहेगी।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को चलते हुए छह महीने से भी ज्यादा का समय हो गया है। इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी (आइएईए) के बोर्ड आफ गवर्नर्स ने बुधवार को ईरान के न्यूक्लियर नियमों का पालन न करने के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजने के लिए वोट किया।इसे एक कूटनीतिक कदम कहा जा सकता है जिससे तेहरान पर दबाव बढ़ सकता है।

रॉयटर के मुताबिक, प्रस्ताव को 23-3 वोटों से मंजूरी मिली, जबकि आठ सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। रूस, चीन और नाइजर ने इसके खिलाफ वोट किया।

यूएन की परमाणु निगरानी संस्था में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी दबाव में पारित किया गया है। उन्होंने कहा, 'इसका कोई आधार नहीं है और इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा।'

वहीं, ईरान के नेशनल सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि आइएईए का कदम तमाम देशों को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर आने के लिए बाध्य करेगा।

ईरानी हमले में आठ एफ-15 विमानों को नुकसान

सीबीएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जार्डन में गुरुवार तड़के अमेरिकी एयरबेस पर एक के बाद एक कई हमले किए, जिससे अमेरिका के कई मिलिट्री एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा है।

बताया गया कि मुवाफ्फक सॉल्टी एयर बेस पर हुए ईरानी हमले में वार्थोग के नाम से मशहूर एक ए-10 थंडरबोल्ट का एक विंग टूट गया, जबकि लगभग आठ एफ-15 विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा और उन्हें वापस सर्विस में लगा दिया गया।'

ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं। इससे पहले ईरान द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के जवाब में अमेरिका ने ईरान के पांच टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों पर हमले किए, जिनमें जार्डन में मौजूद बेस भी शामिल था।