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इजरायल में कल मतदान, संसद में एंट्री के लिए 3.25% वोट जरूरी; भारत से कितनी अलग है चुनावी प्रक्रिया?

Published: Mon, 26 Oct 2026 03:48 PM (IST)

इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं, जहां 73 लाख मतदाता वोट डालेंगे। आइए जानते हैं यहां कैसे होता है चुनाव और भारत से कितना है अलग?

इजरायल में भारत से कितना अलग होता है चुनाव?

इजरायल में भारत से कितना अलग होता है चुनाव?

HighLights

  1. इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव, नेतन्याहू का भविष्य तय होगा।

  2. यहां आनुपातिक प्रणाली, मतदाता पार्टी लिस्ट को वोट देते हैं।

  3. संसद में प्रवेश हेतु 3.25% वोट अनिवार्य, गठबंधन सरकारें बनती हैं।

डिजिटल डेस्क, यरुशलम। इजरायल में 27 अक्टूबर, मंगलवार को आम चुनाव होना है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के बीच माना जा रहा है।

इजरायल के 73 लाख मतदाता कल तय करेंगे कि देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बरकरार रहेंगे या नहीं। आइए जानते हैं इजरायल में कैसे होता है चुनाव और कैसे काम करती है वहां की चुनावी राजनीति और गठबंधन का गणित।

दरअसल, इजरालय में संसद की कुल 120 सीटें और करीब 73 लाख मतदाता हैं। इजरायल में पूरी चुनावी प्रक्रिया एक देश, एक निर्वाचन क्षेत्र की आनुपातिक प्रणाली पर चलती है।

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संसद में एंट्री के लिए 3.25% वोट पाना अनिवार्य

यहां मतदाता उम्मीदवार के बजाय पार्टी लिस्ट को वोट देते हैं और संसद में प्रवेश के लिए कम से कम 3.25% वोट हासिल करना अनिवार्य होता है। यहां कसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है।

आज तक के इतिहास में यहां किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिसके चलते गठबंधन की सरकार बनना ही यहां का मुख्य नियम रहा है। यही वजह है कि यहां बहुत कम ही ऐसी सरकारें रहीं जो अपना कार्यकाल पूरी की हो।

नेसेट में प्रवेश करने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25% वोट पाने अनिवार्य है। जिन पार्टियों को इतना वोट नहीं मिल पाता वो नेसेट नहीं पहुंच सकती। क्योंकि, उनके वोट न्यूट्रलाइज हो जाते हैं। उनकी कोई गिनती नहीं होती। इसके बाद बची हुई पार्टियों के बीच सीटों को उनके बचे हुए वोट शेयर के हिसाब से बांटा जाता है।

भारत और इजरायल की चुनाव प्रणाली में अंतर

इजरायल की चुनाव प्रणाली भारत की चुनाव प्रणाली की तुलना में बहुत अलग है। यहां भारत की तरह अलग-अलग लोकसभा या विधानसभा सीटें नहीं होतीं, बल्कि पूरा का पूरा देश एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।

यहां मतदाता किसी स्थानीय नेता को व्यक्तिगत तौर पर वोट नहीं देते, बल्कि वे अपनी पसंद की पार्टी को वोट देते हैं। यहां किसी भी पार्टी को संसद में पहुंचने के लिए न्यूनतम 3.25% वोट हासिल करना अनिवार्य होता है। इस न्यूनतम सीमा को इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड कहा जाता है।

संसद (नेसेट) की कुल 120 सीटों का बंटवारा पार्टियों को मिले राष्ट्रीय वोट प्रतिशत के अनुपात में होता है। यदि किसी पार्टी को 10% वोट मिलते हैं, तो उसे लगभग 12 सीटें मिलेंगी।

वहीं, भारत में मतदाता अपने क्षेत्र के किसी एक खास उम्मीदवार को वोट देते हैं। जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह जीत जाता है, भले ही उसे कुल मतों का 50% न मिला हो।

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