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अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकर पर किया हमला, खार्ग द्वीप के पास गिराईं चार मिसाइलें

Published: Sat, 05 Sep 2026 01:47 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 02:04 PM (IST)

अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर चार मिसाइलें दागीं। खार्ग द्वीप से ईरान के कच्चे तेल के शिपमेंट का लगभग 90% हिस्सा जाता है।

HighLights

  1. अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकर पर चार मिसाइलें दागीं।

  2. यह हमला खार्ग द्वीप के पास हुआ, कोई हताहत नहीं।

डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास ईरानी तेल टैंकर पर हमला किया है। अमेरिका ने एक-के बाद एक यहां चार मिसाइलें गिराईं। इस हमले में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

ईरानी समाचार आउटलेट खबर फौरी की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक रूप से अहम खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर US की चार मिसाइलें गिरीं और उसे खाली कराया जा रहा है।

अमेरिका ने ईरान पर किया मिसाइल अटैक

अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर हमला किया है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का एक मुख्य केंद्र है और देश के कच्चे तेल के शिपमेंट का लगभग 90% हिस्सा इसी द्वीप से जाता है।

अमेरिका के हमले की रिपोर्ट ईरान के 'स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क' (SNN) ने दी। एसएनएन ने बताया कि तेल टैंकर पर मिसाइलें गिरी थीं, हालांकि शुरुआत में मिसाइलों की संख्या या उनके स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ रहा युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को चलते हुए छह महीने से भी ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन अब भी दोनों देशों की तरफ से हमले जा रहे हैं।

सैन्य हमलों और जवाबी हमलों की वजह से कमर्शियल शिपिंग और ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

अमेरिकी सेना ने मंगलवार, 1 सितंबर को भी ईरान के 60 सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिकी सेना ने यहां तक दावा किया था कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 1.8 करोड़ बैरल तेल ले जा रहे 40 कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित निकाल लिया है।

देखा जाए तो युद्ध शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से हर रोज 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था, लेकिन 28 फरवरी, जब से ये युद्ध शुरू हुआ, तब से ही ईरान और अमेरिका दोनों देशों ने होर्मुज पर नाकेबंदी शुरू कर दी।

होर्मुज में कई तेल टैंकरों पर हमले हुए। ईरान ने कई जहाजों को होर्मुज पार करने से रोके रखा, जिससे वैश्विक बाजार में तेल-गैस की कीमतें बढ़ीं। अब छह महीने बाद भी मिडिल ईस्ट में हालात वैसे ही बने हुए हैं।

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