बालेन शाह का यू-टर्न, पहले मिलने से किया था इनकार; अब भारत दौरे से ठीक पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री से की मुलाकात
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत दौरे से पहले भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी से मुलाकात की, जो उनके पिछले प्रोटोकॉल से एक बड़ा बदलाव है।

बालेन शाह ने विदेश सचिव मिसरी से की मुलाकात

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश नीति और व्यक्तिगत कूटनीतिक प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव लाते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को काठमांडू में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी से औपचारिक वार्ता की।
लगभग छह महीने पहले विदेश सचिव स्तर के अधिकारियों से मिलने से इनकार करने वाले शाह का यह यू-टर्न नेपाल के आर्थिक हितों और क्षेत्रीय वास्तविकताओं को दर्शाता है। यह बैठक बालेन शाह की आने वाली 22 नवंबर को संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले हुए है, जो मार्च में पदभार संभालने के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी।
प्रोटोकॉल का यू-टर्न और बैठक का एजेंडा
मई 2025 में विक्रम मिसरी की नेपाल यात्रा इसलिए टल गई थी क्योंकि शाह ने विदेश मंत्री स्तर से नीचे के राजनयिकों से आमने-सामने की मुलाकात न करने का नया प्रोटोकॉल बनाया था। उस समय उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों से भी मिलने से इनकार कर दिया था।
हालांकि, गुरुवार को हुई बैठक में जल संसाधनों, ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल का अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार भारत की ओर यह झुकाव आर्थिक और व्यावहारिक जरूरतों से प्रेरित है।
2 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज
रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक के दौरान नेपाल ने ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण और हालिया प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निमाण के लिए भारत से 2 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की मांग की है। इस पैकेज की आधिकारिक घोषणा शाह की नई दिल्ली यात्रा के दौरान होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि अगस्त 2025 में तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 140 टन से ज्यादा आपातकालीन राहत सामग्री, बेली ब्रिज और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए टनलिंग विशेषज्ञ भेजे थे।
इस मदद के बाद सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बालेन शाह ने सार्वजनिक रूप से भारत के प्रयासों की सराहना की थी।
सीमा विवाद भी रहा मुद्दा
भारत और नेपाल के संबंधों में सीमा विवाद और अग्निपथ योजना के कारण गोरखा सैनिकों की भर्ती पर लगी रोक प्रमुख अड़चनें रही हैं। सुगौली संधि (1816) का हवाला देते हुए नेपाला द्वारा उठाए गए क्षेत्रीय दावों के बावजूद, दोनों देश अब कूटनीतिक रास्ते से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
वहीं, भारत सरकार द्वारा हाल ही में अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल करने के नियमों में किए गए सुधारों से 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के तहत नेपाली गोरखाओं की भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल बना है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
नेपाल की भौगोलिक स्थित भारत की सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील है। भारत के पांच राज्य (पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम) नेपाल के साथ सीमा साझा करते हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, बालेन शाह द्वारा अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन के बजाय भारत को चुनना नई दिल्ली के लिए एक सकारात्मक और रणनीतिक संकेत माना जा रहा है।
भारत के पांच राज्य 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के बाद यह किसी नेपाली प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा होगी।
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