नेपाल की पहली सुरंग नागढुंगा का ट्रायल शुरू, भारत के लिए क्यों है अहम?
नेपाल की पहली आधुनिक नागढुंगा रोड टनल सोमवार को आम लोगों के लिए खोल दी गई है, जो काठमांडू को अन्य जिलों से जोड़ती है।
HighLights
नेपाल की पहली आधुनिक नागढुंगा टनल आम लोगों के लिए खुली
जापान के सहयोग से बनी 2.688 किमी लंबी टनल
काठमांडू-पश्चिमी नेपाल कनेक्टिविटी सुधरेगी, भारत-नेपाल व्यापार को बढ़ावा
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल की पहली आधुनिक रोड टनल 'नागढुंगा पैसेज' सोमवार को आम लोगों के लिए खोल दी गई। बता दें यह पैसेज काठमांडू को दूसरे जिलों से जोड़ती है। पैसेज खुलने के साथ ही छोटी प्राइवेट गाड़ियों को ट्रायल के तौर पर इस रोड का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है।
नागढुंगा टनल रोड सेफ्टी यूनिट के डिप्टी चीफ कबीराज श्रेष्ठ ने बताया कि कार, जीप, वैन और दूसरी हल्की प्राइवेट गाड़ियों को टनल के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। पहले यह टनल सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं के लिए ही खुली थी।
कितनी लंबी है टनल?
27 जुलाई को उद्घाटन की गई 2.688 किलोमीटर लंबी यह टनल रोड जापानी सरकार और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी की आर्थिक और तकनीकी मदद से बनाई गई है।
श्रेष्ठ ने बताया कि काठमांडू के पश्चिमी हिस्से में बनी यह टनल सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चालू रहेगी। ट्रायल के दौरान लोगों से कोई फीस नहीं ली जाएगी।
टनल के अंदर सख्त नियम
अधिकारियों ने टनल के अंदर ट्रैफिक के कड़े नियम लागू किए हैं, जैसे कि स्पीड लिमिट 40 किलोमीटर प्रति घंटा तय करना, हेडलाइट जलाकर रखना, ओवरटेकिंग न करना और गाड़ी रोकना या पार्क करना मना होना।
श्रेष्ठ ने कहा, 'हमने ट्रायल के तौर पर ऑपरेशन शुरू किया है। पूरी तरह से ऑपरेशन शुरू करने का फैसला हालात का जायजा लेने और ड्राइवरों से टनल से गुजरते समय आने वाली मुश्किलों और अनुभवों के बारे में फीडबैक लेने के बाद किया जाएगा।'
उन्होंने बताया कि सेफ्टी यूनिट और टोल कलेक्शन टीम पूरी तरह से ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है और CCTV सिस्टम के जरिए टनल के अंदर की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
2019 में शुरू हुआ था निर्माण
टनल का निर्माण आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2019 में शुरू हुआ था और इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगभग सात साल लगे। इसे लगभग 29 अरब नेपाली रुपये की लागत से बनाया गया था।
जापान ने 21.5 अरब नेपाली रुपये की मदद दी, जिसमें 5 अरब नेपाली रुपये का लोन भी शामिल था, जबकि बाकी रकम नेपाल सरकार ने दी। धाडिंग जिले के सिसनेखोला को टुटीपाखा से जोड़ने वाली नागढुंगा टनल रोड से यात्रा का समय काफि कम होने की उम्मीद है।
यह व्यस्त नागढुंगा सेक्शन से होकर एक वैकल्पिक रास्ता देगी, जहां ट्रैफ़िक जाम और सड़क की खराब हालत की वजह से अक्सर काठमांडू और पश्चिमी जिलों के बीच आवाजाही प्रभावित होती रही है।
भारत के लिए क्यों अहम?
जापान के सहयोग से बने इस प्रोजेक्ट को JICA के प्रेसिडेंट अकिहिको तनाका ने ऐतिहासिक महत्व का प्रोजेक्ट और काठमांडू को पश्चिमी नेपाल और भारत से जोड़ने वाला एक अहम गेटवे बताया है।
हालांकि यह टनल सीधे भारत से नहीं जुड़ती, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह उस अहम कॉरिडोर को मजबूत करती है जिससे काठमांडू में आने वाले लगभग 60-70% सामान की ढुलाई होती है और जो बीरगंज-रक्सौल जैसे भारत-नेपाल के मुख्य व्यापारिक रास्तों से जुड़ता है।
