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'अपनी मिट्टी पर मरना मंजूर', मौत की सजा के बाद भी बांग्लादेश लौटने पर अड़ीं शेख हसीना

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:52 PM (IST)

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में ढाका लौटने का फैसला किया है, भले ही उन्हें मौत की सजा या गिरफ्तारी का सामना करना पड़े।

बांग्लादेश लौटेंगी पूर्व पीएम शेख हसीना

बांग्लादेश लौटेंगी पूर्व पीएम शेख हसीना

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डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी दिसंबर में हर हाल में ढाका वापस लौटेंगी, भले ही भारत से लौटने पर उन्हें मौत की सजा या गिरफ्तारी का सामना ही क्यों न करना पड़े।

समाचार एजेंसी एपी को ईमेल के जरिए दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि अगर उनके भाग्य में मृत्यु ही लिखी है, तो वह किसी दूसरे देश में रहने के बजाय अपने देश की मिट्टी और अपने लोगों के बीच मरना पंसद करेंगे। उन्होंने साफ किया कि उनके इस फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा।

देश छोड़ने के बाद मौत की सजा

शेख हसीना बांग्लादेश में एक लंबा राजनीतिक इतिहास रखती हैं। वह 1996 से 2001 तक और फिर 2009 से 2024 तक लगातार चार कार्यकालों के लिए देश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। हालांकि, अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए एक हिंसक और व्यापक जन-आंदोलन के बाद उन्हें अपना पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी।

इसके बाद, 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों का मुकदमा चलाते हुए मौत की सजा सुनाई। उन पर विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों को हिंसक कार्रवाई का आदेश देने का आरोप लगाया गया था।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, उस अशांति के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे और हजारों अन्य घायल हुए थे। हालांकि, शेख हसीना ने इन सभी आरोपों और ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज करते हुए इसे अवैध और राजनीति से प्रेरित बताया है।

बांग्लादेश की प्रत्यर्पण मांग

बांग्लादेश की नई सरकार ने कई बार भारत से शेख हसीना को सौंपने का औपचारिक अनुरोध किया है। हालांकि, भारत ने इस मुद्दे पर संयमित रुख अपनाया है। ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया के लिए एक निश्चित कानूनी और व्यवस्थित प्रणाली होती है, इसलिए उनकी वापसी की कोई समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।

हसीना ने यह स्वीकार किया कि वापसी पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है या प्रताड़ित किया जा सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि वह विदेश में बैठकर अपने देशवासियों की तकलीफ में नहीं देख सकतीं। हालांकि, उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि वह भारत से किस मार्ग या माध्यम से बांग्लादेश लौटेंगी।

आवामी लीग पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

साक्षात्कार के दौरान शेख हसीना ने अपनी पार्टी आवामी लीग के खिलाफ हो रही दमनकारी कार्रवाईयों पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 के बाद से उनकी पार्टी से कम से कम 20 हजार सदस्यों की हत्या कर दी गई है और हजारों कार्यकर्ताओं को जेल में डालकर प्रताड़ित किया गया है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इस समय कोई सामान्य राजनीतिक या लोकतांत्रिक माहौल नहीं बचा है और पार्टी का अस्तित्व मिटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि हसीना के जाने के बाद 18 महीनों तक नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चली। इसके बाद फरवरी में हुए आम चुनावों में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और हसीना के मुख्य प्रतिद्वंद्वी तारिक रहमान की पार्टी ने भारी जीत हासिल की।

आवामी लीग पर प्रतिबंध होने के कारण उसे इन चुनावों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था।

कट्टरपंथ के प्रसार पर चिंता

हसीना ने देश में चरमपंथी और कट्टरपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके 15 सालों के शासनकाल में कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त नीतियां अपनाईं गईं थीं, लेकिन मौजूदा स्थिति ने इन तत्वों को और ज्यादा बेखौफ बना दिया है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भारत या अमेरिका जैसी विदेशी शक्तियों से हस्तक्षेप की उम्मीद रखती हैं, तो हसीना ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी विदेशी ताकत के आशीर्वाद की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा, हम सभी देशों के साथ सहयोग और मित्रता की नीति में विश्वास रखते हैं, लेकिन स्वदेश लौटने के लिए मुझे किसी अन्य देश के समर्थन की जरूरत नहीं है।

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