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पाकिस्तान में चरम पर महंगाई... आटा-दाल के बाद पेट्रोल-डीजल के लिए भी तरसे लोग, कितनी पहुंच गई कीमत?

Published: Wed, 16 Sep 2026 02:03 PM (IST)

पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराने के साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जिससे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पाकिस्तान में गहराया ऊर्जा संकट (फोटो-रॉयटर्स)

पाकिस्तान में गहराया ऊर्जा संकट (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं।

  2. मध्य पूर्व में तनाव से ऊर्जा संकट गहराया, कीमतें बढ़ीं।

  3. सरकार खपत घटाने और ईंधन सब्सिडी देने पर विचार कर रही।

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और इसके साथ ही पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। पाकिस्तान में तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और ईंधन महंगा हो रहा है। इसी के चलते पाकिस्तान सरकार पेट्रोल की खपत कम करने के उपायों पर विचार कर रही है।

पाकिस्तान में आसमान छू रहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

मिडिल ईस्ट में हालात के बिगड़ने से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पाकिस्तान में मंगलवार रात पेट्रोल की कीमतों में 4.10 PKR प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में 6.41 PKR प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।

पाकिस्तान में मंगलवार रात हुई बढ़ोतरी के बाद एक लीटर पेट्रोल की कीमत 384.34 पाकिस्तानी रुपया और एक लीटर हाई-स्पीड डीजल की कीमत 415.83 पाकिस्तानी रुपया हो गई है।

टेंशन में शहबाज शरीफ

पाकिस्तान में लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है कि पाकिस्तान कब तक वैश्विक तेल संकट के असर को झेल पाएगा।

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा, 'सरकार अपनी ईंधन राहत योजना के जरिए बढ़ोतरी के कुछ हिस्से का बोझ खुद उठाने की कोशिश कर रही है।'

पाक सरकार की इस योजना के तहत, मोटरसाइकिल चलाने वालों को हफ्ते में 5 लीटर तक सब्सिडी वाला पेट्रोल मिलेगा, जबकि कार मालिकों को हर 10 दिन में 10 लीटर तक पेट्रोल पर राहत मिलेगी।

मुसादिक मलिक ने कहा कि यह मदद ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की पूरी भरपाई तो नहीं करेगी, लेकिन यह उतना अधिकतम बोझ है जिसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी झेल सकती है।

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