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'1971 भूल गए क्या?' पाक सांसद ने मुनीर को दिखाई औकात, संसद में उड़ाया मजाक

Updated: Mon, 24 Aug 2026 06:46 PM (GMT+05:30)

वरिष्ठ पाकिस्तानी सांसद मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर 1971 की हार की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर दमन से क्षेत्र में नए भौगोलिक परिवर्तन हो सकते हैं।

मौलाना फजलुर रहमान ने पाक सेना प्रमुख मुनीर पर साधा निशाना

मौलाना फजलुर रहमान ने पाक सेना प्रमुख मुनीर पर साधा निशाना

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डिजिटल डेस्क, पेशावर। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर सीधा निशाना साधते हुए वरिष्ठ पाकिस्तानी सांसद और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सैन्य प्रतिष्ठान को 1971 में भारत के खिलाफ हुए युद्ध में मिली अपमानजनक पराजय और आत्मसमर्पण की याद दिलाई और चेतावनी दी कि निरंतर दमन और रक्तपात से क्षेत्र में नए भौगोलिक परिवर्तन हो सकते हैं।

उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा और कड़ा हमला बोला है। उन्होंने मुल्क के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए मुनीर के बयानों और दावों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश पर तबाही लाने वाले आज जश्न मना रहे हैं, जबकि आम जनता हर मोर्चे पर पिस रही है।

पाक सांसद ने मुनीर का उड़ाया मजाक

पेशावर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना ने साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और उसके बाद ढाका में हुए अपमानजनक आत्मसमर्पण की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि फौज की बहादुरी हम 1971 की जंग में देख चुके हैं।

जिस तरह तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि सेना देश की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर आखिरी दम तक लड़ेगी, ठीक वैसे ही खोखले दावे आज भी दोहराए जा रहे हैं। उस जंग में भी ऐसे ही बड़े-बड़े दावे किए गए थे, पर इतिहास गवाह है कि नतीजा क्या हुआ था।

कैसे 93 हजार सैनिकों को हथियार डाले

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस समय जनरल याहया खान ने सेना को गलियों, पहाड़ों और खेतों में लड़ने का भाषण दिया था, लेकिन हकीकत में 93 हजार सैनिकों को हथियार डालने पड़े थे, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान को शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी और बांग्लादेश का उदय हुआ था।

जनता के दुखों का जिक्र करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने हुक्मरानों से सवाल किया कि आखिर क्यों आम अवाम को गंभीर संकटों और परीक्षाओं के भंवर में धकेला जा रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश में इसी तरह दमन और खून-खराबा जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे और क्षेत्र के भौगोलिक नक्शे में एक बार फिर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि जनता लंबे समय से दमन की छांव में जीने को मजबूर है और देश की अखंडता दांव पर लगी हुई है।

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