भारतीय सड़कों पर कभी चलती थी हुकूमत, कैसे इतिहास बन गईं ये कार कंपनियां?
भारत में सालों से कारों का उपयोग किया जाता है। इस दौरान कई कंपनियां भारत में आई और उनकी कारों ने सड़कों पर राज किया। लेकिन किन कारणों से किस कंपनी को ...और पढ़ें

HighLights
हिंदुस्तान एंबेसडर ने भारतीय सड़कों पर दशकों तक राज किया
प्रीमियर पद्मिनी मुंबई की लोकप्रिय टैक्सी का पर्याय थी
फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों ने भी भारत छोड़ा
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। कई दशकों से देश में अलग अलग निर्माताओं की ओर से कारों की बिक्री की जा रही है। जिनमें से कई निर्माताओं की कारों ने सालों तक राज भी किया। लेकिन अब वह पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। ऐसी कौन से वाहन निर्माता थे और किन कारों को देश में ऑफर किया जाता था। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।
Ambassador की थी हुकूमत
भारत में अगर किसी कार ने सबसे लंबे समय तक हुकूमत की है तो उस लिस्ट में सबसे ऊपर हिंदुस्तान मोटर्स की अंबेसडर कार का नाम आता है। दशकों तक आम आदमी के साथ ही सेना, पुलिस, नेताओं से लेकर मंत्रियों तक ने इस कार में सफर किया। लेकिन अब यह पूरी तरह से गायब हो चुकी है। इस कार को 1942 से 2014 तक उपयोग में लाया गया था।
Permier Padmini भी थी पसंदीदा गाड़ी
अंबेसडर के साथ ही प्रीमियम पद्यि्मिनी भी भारतीयों की पसंदीदा गाड़ी थी। इस कार ने भी दशकों तक देश में आम आदमी को सफर करवाया और मुंबई में तो कुछ साल पहले तक भी इस कार को काली-पीली टैक्सी का पर्याय माना जाता था। इसको 1944 में भारत में पेश किया गया था और 2018 तक इस कार का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था।
Daewoo करती थी कारें ऑफर
देवू मोटर्स ने भी 1995 में भारतीय बाजार में अपने सफर को शुरू किया था। तब निर्माता की ओर से देश में Matiz, Cielo और Nexia जैसी कारों को बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया गया था। जिनको भारत में काफी पसंद भी किया गया था, लेकिन मूल कंपनी के वैश्विक दीवालियापन के कारण इसे 2003 में उत्पादन और बिक्री को बंद करना पड़ा था।
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Opal की कारें भी थीं लग्जरी की पहचान
ओपल की ओर से भी भारत में 1996 से 2006 के बीच कारों की बिक्री की गई थी। निर्माता की ओर से तब सेडान कारों को ही भारत में ऑफर किया गया था, जिनमें Opal Corsa, Opal Astra और Opal Vectra शामिल थीं। इन कारों के रखरखाव का काफी ज्यादा महंगा होना भी विदाई का बड़ा कारण रहा।
Mistubishi की भी हुई थी विदाई
मित्सुबिशी भी भारत में 1998 से 2021 के बीच अपनी कई कारों की बिक्री कर रही थी। इस दौरान निर्माता ने देश में दो ऐसी कारों को भी ऑफर किया था जो अब तक भी लोगों के मन से नहीं निकल पाई हैं। इन कारों में Mitsubishi Lancer और Misubishi Pajero हैं। यह अपने दौर की ऐसी कारें रही जिन पर कई गाने भी बनाए गए थे।
General Motors का रहा 14 साल का सफर
अमेरिका की बड़ी कार निर्माताओं में शामिल जनरल मोटर्स ने भारत में शेवरले ब्रॉन्ड की कई कारों को ऑफर किया था। 2003 से 2017 के बीच 14 सालों में निर्माता ने कई सेगमेंट में कारों की बिक्री की, लेकिन अंत में भारत से अपने कारोबार को समेटना पड़ा। इस दौरान शेवरले ने Beat, Cruze, Spark, Enjoy और Sail जैसी कारों की बिक्री की थी। जिनमें से अभी भी कुछ कारों को सड़कों पर देखा जा सकता है।
Ford की भी हुई विदाई
भारत जैसे बड़े बाजार में अपनी कारों की बिक्री करने के लिए एक और अमेरिकी निर्माता फोर्ड ने भी कई कारों को ऑफर किया। इनमें Ford Ecosport से लेकर Ford Endavour तक शामिल रहीं। लेकिन अंत में 26 सालों के सफर और लगातार हो रहे घाटे के कारण फोर्ड को भी वापस जाना पड़ा।
भारत से बाहर निकलने वाले प्रमुख कार ब्रांड
| ब्रांड/कंपनी | भारत में बिताए वर्ष | लोकप्रिय मॉडल |
|---|---|---|
| फोर्ड मोटर कंपनी | 1995–2021 | फिगो, इकोस्पोर्ट, एंडेवर, फिएस्टा |
| जनरल मोटर्स इंडिया (शेवरले) | 2003–2017 | बीट, क्रूज़, स्पार्क, एंजॉय, सेल |
| फिएट इंडिया | 1997–2019 | पालियो, पुंतो, लिनिया, अवेंचुरा |
| मित्सुबिशी मोटर्स | 1998–2021 | लांसर, पजेरो, सेडिया, आउटलैंडर |
| देवू मोटर्स | 1995–2003 | Cielo, Matiz, Nexia |
| डैटसन | 2014–2022 | GO, GO+, redi-GO |
| ओपल | 1996–2006 | एस्ट्रा, कोर्सा, वेक्ट्रा |
| प्यूजो | 1994–1997 | प्यूजो 309 |
| प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड | 1944–2018 (कार उत्पादन इससे पहले ही बंद हो गया था) | प्रीमियर पद्मिनी |
| हिंदुस्तान मोटर्स | 1942–2014 | राजदूत |
| स्टैंडर्ड मोटर प्रोडक्ट्स ऑफ इंडिया | 1948–1988 | स्टैंडर्ड हेराल्ड, स्टैंडर्ड 2000 |
| सिपानी ऑटोमोबाइल्स | 1970 के दशक-2000 के दशक | डॉल्फिन, मोंटाना |