बाइक-स्कूटर में कैसे काम करता है कीलेस इग्निशन? यहां जानें फायदे और नुकसान
हम यहां पर आपको दोपहिया वाहनों में कीलेस इग्निशन सिस्टम के काम करने के बारे में बता रहे हैं, जिसमें स्मार्ट की-फॉब और वायरलेस सिग्नल का उपयोग होता है। ...और पढ़ें

बाइक और स्कूटर में कीलेस इग्निशन काम करने का तरीका।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में मोटरसाइकिल और स्कूटर भी तेजी से स्मार्ट होते जा रहे हैं। पहले जहां सिर्फ प्रीमियम कारों में कीलेस इग्निशन (Keyless Ignition) देखने को मिलता था, अब वही टेक्नोलॉजी दोपहिया वाहनों में भी आम होती जा रही है। इस सिस्टम में पारंपरिक मेटल चाबी की जगह एक स्मार्ट की-फॉब काम करता है, जिससे बाइक को स्टार्ट, लॉक या अनलॉक किया जा सकता है। आइए विस्तार में जानते हैं कि बाइक और स्कूटर में कीलेस इग्निशन किस तरह से काम करता है?
कीलेस इग्निशन कैसे काम करता है?
कीलेस इग्निशन सिस्टम में मैकेनिकल चाबी और लॉक की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट की सिस्टम होता है। राइडर के पास एक प्रॉक्सिमिटी बेस्ड की-फॉब रहता है, जिसे जेब या बैग में रखने पर भी बाइक पहचान लेती है। जब यह की-फॉब तय दूरी के अंदर होता है, तब बाइक उसे वायरलेस सिग्नल के जरिए पहचानती है। पुश-बटन या डायल घुमाने से इंजन स्टार्ट हो जाता है। चाबी को इग्निशन में लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है।

इस सिस्टम से मिलने वाले मुख्य फंक्शन स्टेयरिंग लॉक और इग्निशन अनलॉक है। चुनिंदा स्कूटर्स में अंडर-सीट स्टोरेज या फ्यूल लिड खुलने के लिए लगाया जाता है। सही की-फॉब न होने पर इंजन स्टार्ट नहीं होता है। पार्किंग में बाइक ढूंढने के लिए आंसर-बैक फीचर दिया गया है। यह पूरा सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन पर काम करता है। सही सिग्नल मिलने पर ही बाइक स्टार्ट होती है, वरना सुरक्षित रहती है।
कीलेस इग्निशन के फायदे

1. ज्यादा सुविधा (Convenience): अब छोटी-सी चाबी ढूंढने या इग्निशन में लगाने की झंझट नहीं। की-फॉब जेब में हो और एक बटन दबाने पर बाइक स्टार्ट हो जाती है।
2. बेहतर सुरक्षा (Security): इम्मोबिलाइजर की वजह से बिना सही की-फॉब के इंजन स्टार्ट नहीं हो सकता, जिससे चोरी करना मुश्किल हो जाता है।
3. स्मार्ट टेक्नोलॉजी का फायदा: ऑन्सर बैक, रिमोट सीट ओपन और फ्यूल लिड रिलीज जैसे फीचर्स राइड को और आसान बनाते हैं।
4. मॉडर्न और क्लीन डिजाइन: इग्निशन लॉक हटने से कंसोल और डैशबोर्ड ज्यादा साफ और आधुनिक दिखता है।
5. बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस: शहर में बार-बार रुकने-चलने के दौरान बिना चाबी निकाले बाइक स्टार्ट करना काफी सुविधाजनक रहता है।
कीलेस इग्निशन के नुकसान

1. महंगे रिपेयर: यह सिस्टम मैकेनिकल लॉक से ज्यादा जटिल होता है। की-फॉब या रिसीवर खराब होने पर खर्च ज्यादा आ सकता है।
2. बैटरी पर निर्भरता: की-फॉब और बाइक दोनों की बैटरी जरूरी है। की-फॉब की बैटरी खत्म होने पर परेशानी हो सकती है।
3. सीखने में थोड़ा समय: जो राइडर्स सालों से पारंपरिक चाबी इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें शुरुआत में यह सिस्टम थोड़ा अटपटा लग सकता है।
4. सिग्नल से जुड़ी दिक्कत: भीड़भाड़ या ज्यादा सिग्नल वाले इलाकों में कभी-कभी की-फॉब को बाइक के पास लाना पड़ता है।
5. की-फॉब भूलने का जोखिम: चाबी दिखती रहती है, लेकिन की-फॉब जैकेट या बैग में छूट सकता है, जिससे स्टार्ट करते समय कन्फ्यूजन हो सकता है।
हमारी राय
अगर आप सुविधा, स्मार्ट फीचर्स और मॉडर्न टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता देते हैं, तो कीलेस इग्निशन आपके लिए फायदेमंद है। यह रोजमर्रा की राइडिंग को आसान और सुरक्षित बनाता है। लेकिन अगर आप सादगी, कम खर्च और मैकेनिकल सिस्टम पसंद करते हैं, तो पारंपरिक चाबी वाला सिस्टम अब भी ज्यादा भरोसेमंद लग सकता है। आखिरकार, कीलेस इग्निशन एक लक्जरी नहीं बल्कि सुविधा बढ़ाने वाला फीचर बन चुका है, बस इस्तेमाल से पहले इसके फायदे और नुकसान समझना जरूरी है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।