बरसात में टायरों के लिए साधारण हवा या नाइट्रोजन? जाने कौन सा है आपके लिए सुरक्षित विकल्प
Monsoon Driving Tips: बरसात के मौसम में हवा कम होने से गाड़ियों के फिसलने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में सामान्य हवा की तुलना में नाइट्रोजन हवा आपकी ग ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही सड़कों पर गाड़ियों का फिसलना, टायर की ग्रिप कम होना और अचानक टायर प्रेशर घटने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में बहुत से कार मालिकों के मन में यह सवाल उठता है कि मानसून में कार के टायरों में नॉर्मल हवा सही रहती है या नाइट्रोजन हवा। आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
नाइट्रोजन के फायदे
मानसून के दौरान तापमान तेजी से बदलता है। नॉर्मल हवा तापमान बदलने पर जल्दी फैलती या सिकुड़ती है जिससे टायर प्रेशर कम-ज्यादा होता रहता है। इसके उलट, नाइट्रोजन पर तापमान का प्रभाव कम पड़ता है औऱ टायर प्रेशर लंबे समय तक स्थिर रहता है।
नमी से बचाव
सामान्य हवा में नमी होती है जो बारिशके मौसम में और भी बढ़ जाती है। यह नमी कार के रिम में जंग लगा सकती है और साथ ही टायर के रबर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है। नाइट्रोजन एक सूखी गैस होती है जिससे रिम में जंग लगने का खतरा नहीं रहता। नाइट्रोजन से टायर प्रेशर सही बना रहता है जिससे बारिश में गीली सड़कों पर कार की ग्रिप अच्छी रहती है और गाड़ी के फिसलने का जोखिम कम हो जाता है।
नॉर्मल हवा के फायदे-नुकसान
नॉर्मल हवा पर छोटे-बड़े पेट्रोल पंप या पंक्चर की दुकान पर आसानी से और मुफ्त में मिल जाती है। बारिश में नॉर्मल हवा भरवाते समय हवा के साथ नमी भी टायर के अंदर चली जाती है जिससे टायर का तापमान बढ़ता है और प्रेशर में तेजी से उतार-चढ़ाव आने लगता है।
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इसलिए बारिश और मानसून के मौसम में नाइट्रोजन गैस भराना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प रहता है। यह टायरों की उम्र बढ़ाता है, जंग लगने से बचाता है और सड़कों पर कार का बैलेंस भी बेहतर रखने में मदद करता है।