किसी काम के नहीं एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों के ये तीन प्रीमियम फीचर्स, आपके पैसे कर रहे हैं बर्बाद
भारतीय मास-मार्केट मोटरसाइकिलों में अब क्रूज कंट्रोल, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और राइडिंग मोड्स जैसे प्रीमियम फीचर्स मिल रहे हैं। हालांकि, शहर में रोजमर ...और पढ़ें

एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों में प्रीमियम फीचर्स जरूरत या सिर्फ मार्केटिंग का खेल।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय मास-मार्केट मोटरसाइकिलें हर नए अपडेट के साथ ज्यादा चमकदार और महंगी होती जा रही हैं। ब्लूटूथ-कनेक्टेड इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर से लेकर अलग-अलग राइडिंग मोड तक, अब 125cc से 180cc सेगमेंट की बाइकों में भी ये फीचर्स मिलने लगे हैं, जो कभी सिर्फ बड़ी और महंगी बाइकों में मिलते थे। ये सभी फीचर्स बहुत प्रीमियम लगते हैं, लेकिन रोजाना ऑफिस-कॉलेज आने-जाने वाले आम राइडर के लिए इनमें से कई फीचर्स का असल जिंदगी में इस्तेमाल बेहद सीमित है। ये सभी फीचर्स मोटरसाइकिलों की मार्केटिंग के लिहाज से काफी बेहतरीन साबित होते हैं। आइए उन फीचर्स के बारे में विस्तार में जानते हैं, जिनका एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों में इस्तेमाल न के बराबर होता है।
क्रूज कंट्रोल
क्रूज कंट्रोल का असली मतलब हाईवे पर लंबी दूरी तय करना है, जहां लगातार एक स्पीड बनाए रखी जा सके। बड़ी टूरिंग बाइकों में यह फीचर थकान कम करता है और राइड को आरामदेह बनाता है। इस फीचर का इस्तेमाल एंट्री-लेवल, शहर केंद्रित मोटरसाइकिलों में लगभग न के बराबर है। शहर की सड़कों पर गड्ढे, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक के बीच यह फीचर शायद ही कभी इस्तेमाल में आए। नतीजा यह निकलता है कि क्रूज कंट्रोल ज्यादा समय तक ब्रॉशर या फीचर लिस्ट तक ही सीमित रह जाता है।

टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन
इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में मिलने वाला टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन सुनने में भले ही काफी बेहतरीन लगता है। इसके इस्तेमाल से बार-बार आपको अपने स्मार्टफोन को जेब से निकाल कर मैप देखने की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं, असल जिंदगी में इसका इस्तेमाल देखें, तो वह न के बराबर रहता है। छोटे LCD डिस्प्ले, धीमी ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और सीमित मैप डेटा इसे झुंझलाहट भरा बना देते हैं। आज के समय में एक साधारण स्मार्टफोन, जिसे हैंडलबार माउंट पर लगाया जाए, कहीं ज्यादा साफ, तेज और भरोसेमंद नेविगेशन देता है। इसके बावजूद कंपनियां इस फीचर को टेक-फॉरवर्ड होने के सबूत के तौर पर जोर-शोर से पेश करती हैं।
राइडिंग मोड्स
इको, रेन या स्पोर्ट जैसे राइड मोड्स एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों में रेसिंग डीएनए का आभास देते हैं। सीमित पावर आउटपुट और बजट ECU के चलते इन मोड्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर बहुत मामूली होता है। फिर भी स्पोर्ट मोड का नाम ही युवा और खरीदारों को आकर्षित करने के लिए काफी है। व्यवहारिक फायदा कम होने के बावजूद इसका मनोवैज्ञानिक असर बड़ा होता है।
क्यों हैं ये फीचर्स मार्केटिंग के लिए कारगर?
ये सभी फीचर्स राइडिंग एक्सपीरियंस को क्रांतिकारी रूप से नहीं बदलते, लेकिन एक एंट्री-लेवल मोटरसाइकिल को महंगी और आधुनिक दिखाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शोरूम फ्लोर और सोशल मीडिया पर ये मोटरसाइकिल ज्यादा प्रीमियम नजर आती हैं। ऐसे सेगमेंट में, जहां खरीदार उस मोटरसाइकिल को इसलिए खरीदता है, ताकि वह कम पैसे में ज्यादा दूरी तय कर सकें। ये सभी फीचर्स कंपनी के लिए उस बाइक को ज्यादा प्रीमियम दिखाने के लिए होते हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।