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    चीन ने दुनियाभर में फेमस फ्लश-टाइप पावर्ड डोर हैंडल पर लगाया बैन, वजह जान हो जाएंगे हैरान

    Updated: Tue, 03 Feb 2026 06:01 PM (IST)

    चीन ने 1 जनवरी 2027 से सभी नई इलेक्ट्रिक कारों में मैकेनिकल डोर रिलीज सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला टेस्ला जैसी कंपनियों द्वारा लोकप्रिय फ्लश-ट ...और पढ़ें

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    चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों में सुरक्षा बढ़ाई, मैकेनिकल डोर रिलीज सिस्टम अनिवार्य।

    ऑटो डेस्क, नई दिल्‍ली। चीन इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से जुड़े सेफ्टी नियमों को लेकर बड़ा कदम उठाने वाला पहला देश बन गया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एलान किया है कि 1 जनवरी 2027 से देश में बिकने वाली सभी कारों में अंदर और बाहर दोनों तरफ मैकेनिकल (मैनुअल) डोर रिलीज सिस्टम होना अनिवार्य होगा। यह मॉडल अंतिम चरण में हैं, उन्हें 2029 तक का समय दिया गया है। यह फैसला उन फ्लश-टाइप पावर्ड डोर हैंडल्स को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिन्हें Tesla जैसी कंपनियों ने लोकप्रिय बनाया था। हाल के हादसों के बाद इन हैंडल्स की सेफ्टी पर गंभीर सवाल उठे हैं।

    पावर्ड डोर हैंडल्स पर बैन की असली वजह

    1. जानलेवा हादसे और यात्रियों का फंस जाना

    चीन ने जुलाई 2024 में EV डोर हैंडल्स के सेफ्टी स्टैंडर्ड की समीक्षा शुरू की थी। इसकी वजह कई घातक सड़क दुर्घटनाएं रहीं, जिनमें यात्रियों के कार के अंदर फंस जाने की आशंका सामने आई। खासतौर पर Xiaomi की इलेक्ट्रिक कारों से जुड़े दो गंभीर हादसों का जिक्र किया गया, जिनमें टक्कर के बाद आग लग गई। संदेह है कि पावर फेल होने के कारण दरवाजे नहीं खुले, जिससे अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल सके।

    2. बिजली पर निर्भर सिस्टम बना खतरा

    पावर्ड डोर हैंडल्स पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर निर्भर होते हैं, जो बैटरी डिस्चार्ज, शॉर्ट सर्किट और एक्सीडेंट के बाद पावर कट है। इन हालात में ये हैंडल्स काम करना बंद कर सकते हैं। कई कारों में मैनुअल बैकअप मौजूद तो होता है, लेकिन वह छिपा हुआ होता है, खासकर रियर सीट पैसेंजर्स के लिए। इसी खतरे को देखते हुए नए नियमों में कहा गया है कि बिना किसी टूल के काम करने वाले, साफ दिखने वाले मैकेनिकल हैंडल अनिवार्य होंगे, जो बिजली से स्वतंत्र हों।

    3. उंगलियों में चोट का खतरा

    पावर्ड और फ्लश डोर हैंडल्स सिर्फ बड़े हादसों में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी जोखिम पैदा करते हैं। इनके डिजाइन में कोई प्रोटेक्टिव गार्ड नहीं होता है। बच्चों और बुजुर्गों की उंगलियों में चोट की आशंका ज्यादा रहती है। दुनियाभर में ऐसे मामलों की रिपोर्ट्स बढ़ी हैं, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि डिजाइन और स्टाइल को सेफ्टी से ऊपर रखा जा रहा है।

    4. इमरजेंसी रेस्क्यू में बड़ी परेशानी

    एक ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में एक्सीडेंट के बाद कार की बिजली बंद हो गई और न तो यात्री, न ही रेस्क्यू टीम दरवाजे खोल पाई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Tesla से जुड़े करीब एक दर्जन ऐसे हादसों में कम से कम 15 मौतें हुईं, जहां कार में आग लगने के बाद इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम ने काम नहीं किया।

    नए नियम क्या सुनिश्चित करेंगे?

    हर कार में अंदर और बाहर मैकेनिकल डोर रिलीज होंगे। हैंडल आसानी से दिखने और इस्तेमाल करने लायक होंगे। सिस्टम बिजली फेल होने पर भी काम करेगा। आग या पानी जैसी इमरजेंसी में यात्री तुरंत बाहर निकल सकेंगे।

    हमारी राय

    चीन का यह फैसला साफ संदेश देता है कि कार चाहे कितनी भी हाई-टेक क्यों न हो, सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पावर्ड डोर हैंडल्स देखने में भले ही प्रीमियम लगें, लेकिन इमरजेंसी में अगर दरवाजा ही न खुले तो यह तकनीक बेकार और खतरनाक बन जाती है। मैकेनिकल डोर हैंडल्स की वापसी का मतलब है कि मुश्किल हालात में भी आपकी जान बचाने का एक भरोसेमंद रास्ता। यही वजह है कि चीन ने सबसे पहले इस जोखिम को पहचाना और उस पर कार्रवाई की।