औरंगाबाद के जंगलों से माओवादियों के उखड़े पांव, अब मिटाई जा रही निशानी
औरंगाबाद के लंगुराही और पचरूखिया जंगल को माओवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है, जहाँ सुरक्षा बलों के लगातार अभियान से नक्सलियों का सफाया हुआ है। इस सफलता ...और पढ़ें

माओवादियों के हथियार बरामद। फोटो जागरण
मनीष कुमार, औरंगाबाद। मदनपुर थाना क्षेत्र के लंगुराही और पचरूखिया के जंगल व पहाड़ी इलाकों से माओवादियों का सफाया हो चुका है। कभी नक्सलियों का सुरक्षित पनाहगार रहा जंगल और पहाड़ी क्षेत्र को अब माओवादमुक्त घोषित किया गया है।
माओवादियों के पलायन के बाद जिला पुलिस, एसटीएफ और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए हथियार, आइईडी और अन्य विस्फोटक सामग्री लगातार बरामद किए जा रहे हैं।
सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किए गए आइईडी को मौके पर ही निष्क्रिय कर सुरक्षित तरीके से विनष्ट किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पूरे जंगल और पहाड़ी क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की माओवादी गतिविधि दोबारा पनप न सके।
इस जंगल में माओवादियों के खिलाफ लगातार सर्च अभियान चलाने वाले तत्कालीन एएसपी अभियान और वर्तमान बीएसएफ कमांडेंट राजेश भारती के अनुसार लंगुराही और पचरूखिया का जंगल माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना और ट्रेनिंग सेंटर हुआ करता था।
माओवादी अपनी सुरक्षा के लिए जगह-जगह आइईडी लगाकर रखे थे। हालांकि, लगातार चलाए गए सघन सर्च आपरेशन, जंगल में ही कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के कैंप स्थापित किए जाने से माओवादियों के पांव उखड़े और उन्हें इस क्षेत्र को छोड़कर भागना पड़ा।
अब इस क्षेत्र में शांति स्थापित होने के बाद जंगल और पहाड़ी इलाके में फलदार पौधों के लगाए गए बागान से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
जंगल से कब बरामद हुए विस्फोटक सामान
लंगुराही और पचरूखिया जंगल से माओवाद अभियान के द्वारा इस वर्ष जनवरी से अबतक बरामद किए गए विस्फोटक सामानों को देखे तो सोमवार को एक आईईडी, 37 डेटोनेटर और एक देसी कारबाइन बरामद की गई।
- छह जनवरी 2026 को दो आइईडी, हथियार और कारतूस बरामद किए थे।
- 25 जनवरी को आइईडी, कोडेक्स वायर, डेटोनेटर और 42 से अधिक कारतूस बरामद किए गए थे।
- 27 जनवरी को 76 कारतूस सहित अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।
- नौ जनवरी को भी एक देसी हथियार और अन्य विस्फोटक सामग्री सुरक्षाबलों को मिली थी। इसके अलावा पिछले कई वर्षों से -इस जंगल और पहाड़ी क्षेत्र से लगातार भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद होते रहे हैं।
जंगल को माओवादमुक्त करने में सुरक्षा बलों को देना पड़ा है बलिदान
- 18 जुलाई 2016 को माओवादियों के खिलाफ सर्च आपरेशन में कोबरा बटालियन के 10 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि कई अन्य जवान घायल हुए थे। इस घटना में जिले के तत्कालीन एसपी बाबूराम और उनके अंगरक्षकों की जान बाल-बाल बची थी।
- 18 जून 2016 को माओवादी अभियान के दौरान जवान अपूर्व ठेका ने अपनी शहादत दी थी।
- 14 फरवरी 2019 को माओवादी अभियान के दौरान आइईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के दारोगा रौशन कुमार शहीद हो गए थे।
- इसके अलावा ढिबरा क्षेत्र के बरंडा मोड़ पर हुए आइईडी विस्फोट में सहायक कमांडेंट इंद्रजीत कुमार बलिदान हो गए थे।
- इन घटनाओं के अलावा जंगल में माओवादी अभियान के दौरान अन्य जवानों ने अपनी जान गंवाई है। कई जवान आज भी घायल होकर दिव्यांग जीवन जी रहे हैं।
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