अगुवानी-सुल्तानगंज फोरलेन पुल में तकनीकी सुधार: तीन अतिरिक्त पिलर जोड़ा जाएगा, निर्माण की तारीख निर्धारित की गई
अगुवानी-सुल्तानगंज फोरलेन पुल के निर्माण में तकनीकी बदलाव करते हुए 2 से 5 नंबर पिलर के बीच तीन अतिरिक्त पिलर जोड़े जाएंगे, जिससे पुल की मजबूती और स्था ...और पढ़ें

30 अप्रैल की आंधी के बाद तकनीकी सुधार, फोरलेन पुल निर्माण फिर से युद्धस्तर पर
जागरण संवाददाता भागलपुर। अगुवानी-सुल्तानगंज फोरलेन पुल के निर्माण में एक बार फिर महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किया गया है। पुल के सुल्तानगंज की ओर बन रहे पिलर संख्या 2 से 5 के बीच अब तीन अतिरिक्त पिलर बनाए जाएंगे। निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के लिए सभी मंजूरी मिल चुकी है और अगले महीने से काम शुरू हो जाएगा।
यह बदलाव पुल की मजबूती और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। पिलर संख्या 2 से 6 के बीच पहले की दूरी के कारण पुल पर पड़ने वाले भार का संतुलन प्रभावित हो सकता था। विशेषज्ञों ने इस हिस्से की विस्तृत तकनीकी समीक्षा की थी, जिसके बाद अतिरिक्त पिलर लगाने का निर्णय लिया गया।
तकनीकी समीक्षा के बाद बदलाव
30 अप्रैल 2023 की रात में तेज आंधी के कारण निर्माणाधीन पुल का पिलर संख्या 4 से 6 के बीच का हिस्सा ढह गया था। इसके बाद इस हिस्से की विशेष जांच कराई गई। तकनीकी टीम ने पाया कि इस हिस्से में पिलरों के बीच की दूरी अधिक थी। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अधिक दूरी के कारण पुल पर भार संतुलन प्रभावित हो सकता है।
इसी कारण डिजाइन में बदलाव किया गया और पिलर संख्या 2 से 5 के बीच तीन अतिरिक्त पिलर जोड़ने की मंजूरी दी गई। निर्माण एजेंसी ने कहा कि अगले महीने से युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
कम्पोजिट स्टील बीम-कंक्रीट डेक का निर्माण
पुल के पिलर संख्या 9 से 13 के बीच लगभग 300 मीटर लंबा हिस्सा पहले ही गंगा नदी में समा गया था। इस हिस्से में कम्पोजिट स्टील बीम-कंक्रीट डेक और केबल स्टे निर्माण की अनुमति पहले ही मिल चुकी है।
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मुख्य धारा में पिलरों की बेलकेप कटिंग का काम चल रहा है। पिलर कटिंग पूरी होने के बाद नया निर्माण कार्य शुरू होगा। पुल के निर्माण के दौरान एप्रोच पथ की कुल लंबाई 20.3 किलोमीटर है, जिसमें अधिकांश हिस्सों का काम अंतिम चरण में है।
निर्माण एजेंसी और विशेषज्ञों की निगरानी
पुल निर्माण की निगरानी आईआईटी रुड़की, गुवाहाटी और मध्यप्रदेश के विशेषज्ञों की टीम कर रही है। 100 सदस्यीय तकनीकी दल दिन-रात काम कर रहा है। सभी कार्यों की साप्ताहिक प्रगति समीक्षा की जाती है।
एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन के पदाधिकारी बताते हैं कि युद्धस्तर पर काम करने के बाद पुल का निर्माण जल्द पूरा होगा। पुल का निर्माण लगभग 1710 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है और इसका डेडलाइन दिसंबर 2027 रखा गया है।
यात्रियों पर असर और घाट परिचालन
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद खगड़िया के अगुवानी गंगा घाट पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। प्रशासनिक देखरेख में नावों का परिचालन चल रहा है। सुरक्षित संचालन के लिए छह मजिस्ट्रेट प्रतिनियुक्त किए गए हैं।
हालांकि अभी तक यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट और शेड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। घाट पर शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। नोडल अधिकारी सह परबत्ता सीओ हरिनाथ राम ने कहा कि लाइफ जैकेट हर हाल में यात्रियों के अनुपात में उपलब्ध कराए जाएंगे।
मनमाना भाड़ा वसूली की समस्या
वाहन चालक अगुवानी गंगा घाट तक यात्रियों को पहुंचाने में मनमाना भाड़ा वसूल रहे हैं। परबत्ता टमटम स्टैंड से घाट की दूरी 6 किलोमीटर होने के बावजूद 40 रुपये प्रति यात्री वसूले जा रहे हैं। जबकि पहले यह केवल 20 रुपये थी।
अगुवानी स्टैंड से घाट की दूरी 2 किलोमीटर है, लेकिन यहां भी किराया अनियमित वसूलने की शिकायतें मिल रही हैं। यात्रियों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। नियमित यात्री जैसे पवन कुमार और सूरज कुमार ने बताया कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद आवागमन के लिए लोग अजगैवीनाथ धाम होकर भागलपुर आते-जाते हैं।
निर्माण की भविष्य की योजना
अतिरिक्त पिलर के निर्माण के साथ पुल की मजबूती बढ़ेगी और स्थायित्व सुनिश्चित होगा। इसके अलावा पिलर संख्या 9 से 13 के बीच कम्पोजिट स्टील बीम-कंक्रीट डेक और केबल स्टे का निर्माण भी युद्धस्तर पर होगा।
एप्रोच पथ का कार्य अंतिम चरण में है और जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। पुल निर्माण के पूरा होने से भागलपुर और खगड़िया के बीच यातायात सुचारू होगा।
अगुवानी-सुल्तानगंज फोरलेन पुल
अगुवानी-सुल्तानगंज फोरलेन पुल का निर्माण अब तकनीकी रूप से और मजबूत किया जा रहा है। अतिरिक्त पिलर और कम्पोजिट स्टील बीम कंक्रीट डेक निर्माण से पुल की स्थायित्व और मजबूती सुनिश्चित होगी। वहीं, घाट पर यात्री सुविधाओं और भाड़ा वसूली की समस्या पर प्रशासन सतर्क है। पुल निर्माण के पूरा होने से क्षेत्रीय आवागमन में सुधार आएगा और आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
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