अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर बड़ी खबर: पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया शुरू, राइट्स ने मांगी रिपोर्ट
सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ...और पढ़ें

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HighLights
अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया शुरू।
राइट्स लिमिटेड ने EIA/EMP के लिए आवेदन मांगे।
परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत अध्ययन होगा।
अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना अब पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ गई है। एयरपोर्ट का डीपीआर तैयार कर रही भारत सरकार की कंपनी राइट्स लिमिटेड ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआइए) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) और पर्यावरणीय स्वीकृति लेने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राइट्स की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम और सारण जिले के सोनपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए केवल नाबेट मान्यता प्राप्त परामर्शदाताओं को आवेदन मांगे गए हैं। चयनित एजेंसी परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। परियोजना को पर्यावरण मंजूरी देने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी।
इसमें सबसे पहले परियोजना स्थल जरूरी जानकारी के आधार पर टर्म्स आफ रेफरेंस (टीओआर/कार्य-सीमा एवं दिशा-निर्देश) और प्री-फिजिबिलिटी (प्रारंभिक व्यवहार्यता) रिपोर्ट तैयार कर पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद विशेषज्ञ समिति परियोजना के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करेगी और विस्तृत अध्ययन के लिए आवश्यक कार्य-सीमा एवं दिशा-निर्देश (टीओआर) तय करेगी।
स्वीकृत टीओआर के आधार पर ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की योजना (मिटिगेशन प्लान) तैयार की जाएगी। साथ ही इसके साथ ही सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट और पुनर्वास कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। इसमें परियोजना से प्रभावित लोगों, उनके पुनर्वास और स्थानीय समुदाय से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाएगा।
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आठ महत्वपूर्ण रिपोर्ट के आधार पर तैयार होगी पर्यावरणीय रिपोर्ट
एयरपोर्ट परियोजना के लिए राइट्स लिमिटेड संबंधित एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराएगी। इनमें यात्री एवं कार्गो यातायात अध्ययन रिपोर्ट, भू-तकनीकी जांच रिपोर्ट, साइट का केएमएल, टोपोग्राफिकल और कंटूर सर्वे, अब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस (ओएलएस) सर्वे, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट, टेक्नो-इकोनामिक फिजिबिलिटी स्टडी और मास्टर प्लान रिपोर्ट शामिल हैं।
इन दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी एयरपोर्ट निर्माण से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेगी। इसमें वायु गुणवत्ता, ध्वनि स्तर, यातायात दबाव, भूमि उपयोग, जल निकासी व्यवस्था, क्षेत्र की सुंदरता, विरासत संरचनाओं और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का भी सुझाव दिया जाएगा।
जनसुनवाई के बाद मिलेगी अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी
राइट्स लिमिटेड से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसुनवाई भी महत्वपूर्ण चरण होगा। इसमें स्थानीय लोगों और अन्य संबंधित पक्षों की राय ली जाएगी। जनसुनवाई में सामने आए सुझावों और आपत्तियों के आधार पर रिपोर्ट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
इसके बाद अंतिम ईआइए, एसआइए और आरएपी रिपोर्ट पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी जाएगी। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति रिपोर्ट की समीक्षा कर पर्यावरणीय मंजूरी के लिए अनुशंसा करेगी। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब 265 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।