Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    अजगैवीनाथ धाम में बनने वाले एयरपोर्ट पर आया बड़ा अपडेट, केंद्र की एक कंपनी ने शुरू किया काम; 265 दिनों का टास्क

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 05:59 AM (IST)

    सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया राइट्स लिमिटेड ने शुरू कर दी है। यह महत्वपूर ...और पढ़ें

    भागलपुर के अजगैवीनाथ धाम एयरपोर्ट को लेकर आई सबसे बड़ी खबर, राइट्स लिमिटेड ने शुरू की ये खौफनाक प्रक्रिया;

    भागलपुर के अजगैवीनाथ धाम एयरपोर्ट को लेकर आई सबसे बड़ी खबर, राइट्स लिमिटेड ने शुरू की ये खौफनाक प्रक्रिया;

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के हवाई सफर का सपना देखने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यह बहुप्रतीक्षित महत्वाकांक्षी परियोजना अब अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में काफी तेजी से आगे बढ़ गई है, जिससे एयरपोर्ट निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ होने की उम्मीद जगी है। इसको लेकर एयरपोर्ट की डीपीआर तैयार कर रही भारत सरकार की सुप्रसिद्ध उपक्रम कंपनी राइट्स लिमिटेड ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    सोनपुर और सुल्तानगंज में होगा विशेष अध्ययन

    राइट्स लिमिटेड की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ धाम और सारण के सोनपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए व्यापक अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने केवल नाबेट (NABET) से मान्यता प्राप्त परामर्शदाताओं और विशेषज्ञ एजेंसियों से ही बेहद कड़े नियमों के तहत तकनीकी प्रस्ताव और आवेदन मांगे हैं। चयनित विशेषज्ञ एजेंसी इस मेगा प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करेगी और उसके बाद ही अपनी फाइनल ग्राउंड रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

    मंत्रालय को भेजी जाएगी प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट

    बता दें कि इस एयरपोर्ट परियोजना को अंतिम पर्यावरण मंजूरी देने की यह जटिल सरकारी प्रक्रिया कई अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी, जिसके लिए कड़ा खाका खींचा गया है। इसमें सबसे पहले परियोजना स्थल की जरूरी जानकारी के आधार पर टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) और प्री-फिजिबिलिटी (प्रारंभिक व्यवहार्यता) रिपोर्ट तैयार कर सीधे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद मंत्रालय की उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति परियोजना के पर्यावरण पर पड़ने वाले तमाम अच्छे-बुरे प्रभावों की गहन समीक्षा करेगी और विस्तृत अध्ययन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय करेगी।

    8 महत्वपूर्ण रिपोर्ट के आधार पर बनेगी फाइल

    स्वीकृत टीओआर के आधार पर ही ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की योजना (मिटिगेशन प्लान) के साथ सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट भी तैयार होगी। एयरपोर्ट परियोजना के लिए राइट्स लिमिटेड संबंधित चयनित एजेंसी को कई अति महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराएगी, जिसके आधार पर ही आगे की पूरी रूपरेखा तय की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से यात्री एवं कार्गो यातायात अध्ययन रिपोर्ट, भू-तकनीकी जांच रिपोर्ट, साइट का केएमएल, टोपोग्राफिकल सर्वे और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट शामिल हैं।

    खबरें और भी

    वायु गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की होगी जांच

    इन अहम दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी एयरपोर्ट निर्माण से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों जैसे- वायु गुणवत्ता, ध्वनि स्तर, यातायात दबाव और जल निकासी व्यवस्था का गहन अध्ययन करेगी। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र की सुंदरता, विरासत संरचनाओं और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का भी सुझाव दिया जाएगा। राइट्स लिमिटेड से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बताया कि परियोजना की अंतिम पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए प्रभावित इलाकों में जनसुनवाई का एक बेहद महत्वपूर्ण चरण भी आयोजित होगा।

    265 दिनों में पूरी होगी पर्यावरण मंजूरी

    जनसुनवाई में स्थानीय लोगों और अन्य संबंधित पक्षों की राय, सुझावों और आपत्तियों के आधार पर ही तैयार की गई फाइनल रिपोर्ट पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति इस रिपोर्ट की अंतिम समीक्षा करने के बाद एयरपोर्ट निर्माण की पर्यावरणीय मंजूरी के लिए अपनी अंतिम और वैधानिक अनुशंसा केंद्र सरकार को करेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस बेहद जटिल और बड़ी कागजी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरी तरह संपन्न करने में करीब 265 दिनों का एक कड़ा समय निर्धारित किया गया है।