बच्चों को मातृभाषा व स्थानीय परिवेश से जोड़ने की पहल, हिंदी बालपोथी के आधार पर अंगिका बालपोथी अगस्त में होगी लॉन्च
किलकारी भागलपुर द्वारा बच्चों को मातृभाषा अंगिका से जोड़ने के लिए 'अंगिका बालपोथी' तैयार की जा रही है। अगस्त में लॉन्च होने वाली यह पुस्तक नई शिक्षा न ...और पढ़ें

भागलपुर में तैयार हो रही अंगिका बालपोथी, शिक्षकों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
जागरण संवाददाता, भागलपुर। अंग क्षेत्र के बच्चों को उनकी मातृभाषा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। किलकारी भागलपुर की ओर से प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए ‘अंगिका बालपोथी’ तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को अंगिका भाषा को आसानी से समझने, पढ़ने, लिखने और बोलने में सक्षम बनाना है।
नई शिक्षा नीति में स्थानीय और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी के तहत यह पहल शुरू की गई है। किलकारी बाल भवन, भागलपुर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम इस परियोजना पर कार्य कर रही है।
हिंदी बालपोथी की तर्ज पर तैयार हो रही पुस्तक
अंगिका बालपोथी को हिंदी बालपोथी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसमें बच्चों के लिए सरल भाषा और स्थानीय परिवेश से जुड़े विषयों को शामिल किया जा रहा है, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा से सहज रूप से जुड़ सकें।
जानकारी के अनुसार अब तक बालपोथी के दो ड्राफ्ट तैयार किए जा चुके हैं। फिलहाल टीम तीसरे और अंतिम ड्राफ्ट को तैयार करने में जुटी है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अगस्त माह में पुस्तक का लोकार्पण किए जाने की तैयारी है।
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साहित्यकारों के सुझाव से संवरेगी बालपोथी
अंगिका बालपोथी को अधिक प्रभावी और प्रमाणिक बनाने के लिए जून महीने में अंगिका साहित्यकारों के साथ विशेष मंथन किया जाएगा। किलकारी के प्रमंडलीय कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया कि तीसरे ड्राफ्ट पर काम जल्द शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि इस दौरान अंगिका भाषा के क्षेत्रीय विस्तार, वर्णमाला, व्याकरण और शब्दावली सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से चर्चा की जाएगी। साहित्यकारों और भाषा विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर पुस्तक को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बच्चों के लिए सरल और रोचक होगी पुस्तक
किलकारी की टीम का प्रयास है कि बालपोथी बच्चों के लिए केवल पाठ्य सामग्री न होकर एक रोचक और व्यवहारिक पुस्तक बने। इसमें ऐसे पाठ शामिल किए जा रहे हैं, जो बच्चों को अपनी स्थानीय संस्कृति और भाषा से जोड़ सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा मिलने से बच्चों की समझ बेहतर होती है और सीखने की क्षमता भी बढ़ती है। ऐसे में अंगिका बालपोथी बच्चों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
शिक्षकों को भी दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
अंगिका बालपोथी तैयार होने के बाद इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साहिल राज ने बताया कि अगस्त में पुस्तक के लोकार्पण के बाद भागलपुर और बांका जिले के भाषा शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा पदाधिकारी के सहयोग से कराया जाएगा, ताकि शिक्षक बच्चों को बेहतर तरीके से अंगिका भाषा सिखा सकें।
शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा प्रस्ताव
किलकारी की ओर से बालपोथी के व्यापक प्रचार-प्रसार और विद्यालयों में इसके उपयोग को लेकर शिक्षा विभाग को भी पत्र भेजा जाएगा। उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक बच्चों तक अंगिका भाषा की यह पहल पहुंच सके। स्थानीय भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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