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    लापरवाही भारी पड़ी! भागलपुर में 454 शिक्षकों का संपत्ति विवरण अपडेट नहीं, बीईओ और अवर निरीक्षकों का वेतन बंद

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 11:43 AM (IST)

    भागलपुर में 454 शिक्षकों के संपत्ति विवरण अपडेट न करने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और नगर निगम के विद्यालय ...और पढ़ें

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    भागलपुर: 454 शिक्षकों ने संपत्ति विवरण नहीं दिया, अधिकारियों का वेतन रोका

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले में 454 शिक्षकों द्वारा संपत्ति का ब्यौरा अपडेट नहीं करने की गंभीर लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) और नगर निगम के विद्यालय अवर निरीक्षक का वेतन भुगतान रोक दिया गया है।

    प्रशासन ने जारी किया सख्त निर्देश

    जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने स्पष्ट पत्र जारी कर कहा कि पहले ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि निर्धारित समय सीमा में शिक्षकों का संपत्ति विवरण अपडेट किया जाए। इसके बावजूद, उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हुआ।

    तय समय सीमा बीतने के बाद कार्रवाई

    जानकारी के अनुसार 23 फरवरी तक सभी 454 शिक्षकों का ब्यौरा अपडेट करना अनिवार्य था। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद यह कार्य नहीं पूरा होने पर प्रशासन ने इसे लापरवाही माना और संबंधित अधिकारियों के वेतन रोक दिए। डीपीओ (स्थापना) ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी शिक्षकों का संपत्ति विवरण अपडेट नहीं होता, तब तक यह वेतन रोक की स्थिति बनी रहेगी।

    शिक्षकों की सूची तैयार, निलंबन की तैयारी

    साथ ही उन शिक्षकों की सूची भी तैयार की जा रही है, जिन्होंने लापरवाही दिखाई। इनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की संभावना है। प्रशासन का यह कदम नियमों के पालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    क्षेत्रवार विवरण

    • नारायणपुर: 75 शिक्षक
    • गोपालपुर: 10
    • नाथनगर: 18
    • नवगछिया: 13
    • सनाउल्लाह क्षेत्र: 5
    • शाहकुंड: 11
    • सबौर: 6
    • रंगरा चौक: 18

    इसके अलावा, कहलगांव के 38, जगदीशपुर के 62, बिहपुर के 42 शिक्षक, नगर निगम के 3 और गोराडीह के 3 शिक्षक भी सूची में शामिल हैं।

    हेड टीचर पर भी कार्रवाई

    चौंकाने वाली बात यह है कि 17 हेड टीचर भी इस लापरवाही में शामिल पाए गए हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था में नियमों के पालन और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है।