भागलपुर में 71 घंटे का ब्लैकआउट : सबौर के कई इलाके अंधेरे में, 33-11 केवी लाइन ध्वस्त, तूफान के बाद सिस्टम फेल
भागलपुर के सबौर और आसपास के कई इलाके तेज आंधी-तूफान के कारण 71 घंटे से अधिक समय से बिजली संकट से जूझ रहे हैं, जिससे पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो ग ...और पढ़ें

आंधी का असर बरकरार: सबौर में 71 घंटे बाद भी अंधेरे में कई इलाके, पेयजल संकट गहराया
जागरण संवाददाता, भागलपुर। तेज आंधी और तूफान के बाद 33 केवी और 11 केवी विद्युत लाइन तथा कई पोल क्षतिग्रस्त होने का असर चौथे दिन भी जारी है। भागलपुर से सटे सबौर प्रखंड के कई इलाके 71 घंटे बाद भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। मिथिला विहार कॉलोनी, लोदीपुर, तहबलपुर, जगतपुर, बसंतपुर और खुर्द लोदीपुर समेत कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अब तक सामान्य नहीं हो सकी है। बिजली कंपनी की ओर से मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन व्यापक नुकसान के कारण बहाली में लगातार देरी हो रही है। कई जगह पोल टूटे हुए हैं और तार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पूरे नेटवर्क की आपूर्ति प्रभावित है।
पेयजल संकट से जूझते लोग, सड़कों पर उतरा आक्रोश
बिजली आपूर्ति बाधित होने से सबसे बड़ा संकट पेयजल का खड़ा हो गया है। घरों की टंकियां पूरी तरह खाली हो चुकी हैं और लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि गुरुवार को तहबलपुर-जगतपुर सड़क पर लोगों ने जाम लगाकर बिजली कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
स्थानीय लोगों का आरोप था कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बाद में पूर्व प्रमुख प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे और जल्द आपूर्ति बहाल कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम हटाया गया। प्रशासनिक स्तर पर भी सूचना दी गई, जिसके बाद संबंधित विभाग हरकत में आया।
- मिथिला विहार कालोनी, लोदीपुर, तहबलपुर, जगतपुर, बसंतपुर, लालूचक, खुर्द लोदीपुर समेत कई इलाकों में अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं हालात
- बिजली नहीं होने से पेयजल संकट गहराया, पेयजल के लिए भटकते रहे लोग
- नाराज लोगों ने सड़क जाम कर बिजली कंपनी के खिलाफ किया प्रदर्शन
- भोलानाथ फीडर क्षेत्र के लालूचक भट्ठा के 600 घरों के 10 हजार लोग रहे बेहाल
- गुरुवार शाम 6:10 बजे बिजली आई तो दो घंटे बाद फिर गायब हुए दो फेज, रात में 10 तक हुई फिर से बहल
- विधायक रोहित पांडेय के मोहल्ले में 440 वोल्ट का तार टूट जाने से रातभर बिजली रही बाधित
- विक्रमशिला और मिरजानहाट फीडर से जुड़े क्षेत्रों में भी बिजली की आंखमिचौनी
600 घरों में 10 हजार लोग प्रभावित, 66 घंटे बाद लौटी बिजली
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मुजाहिदपुर सबडिवीजन के भोलानाथ फीडर से जुड़े लालूचक भट्ठा क्षेत्र में भी स्थिति बेहद खराब रही। यहां करीब 600 घरों के लगभग 10 हजार लोग लंबे समय तक बिजली संकट से जूझते रहे। शिव मंदिर, काली मंदिर और अंगारी इलाके में सोमवार रात 11:20 बजे बाधित हुई आपूर्ति गुरुवार रात करीब 10 बजे बहाल हो सकी।
तेज आंधी में लगभग 200 मीटर क्षेत्र में 11 केवी लाइन के चार से अधिक पोल गिर गए थे, जबकि तीन ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। इससे पूरे इलाके की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी।
बहाली में लापरवाही के आरोप, बार-बार बाधित हुई आपूर्ति
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद दो दिनों तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप पर टीम पहुंची और मरम्मत कार्य शुरू हुआ। गुरुवार शाम 6:10 बजे बिजली आपूर्ति बहाल की गई, लेकिन दो घंटे बाद फिर दो फेज गायब हो गए। इसके बाद रात 10 बजे के बाद दोबारा सुधार किया गया। इस दौरान लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंजेश कुमार, सौरभ कुमार घोष सहित अन्य लोगों ने बताया कि इनवर्टर बंद हो गए, पानी की टंकियां खाली रहीं और जनरेटर किराये पर लेकर किसी तरह पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ी। बच्चों की पढ़ाई, मोबाइल चार्जिंग और घरेलू कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा।
वीआईपी इलाकों में भी बिजली की आंख-मिचौनी
तिलकामांझी सबडिवीजन के आदमपुर, घंटाघर, जेल रोड और खंजरपुर जैसे वीआईपी इलाकों में भी गुरुवार को दिनभर बिजली की आंख-मिचौनी जारी रही। हर 10 से 20 मिनट पर हो रही ट्रिपिंग से आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भीषण गर्मी में बार-बार बिजली कटने से लोगों में नाराजगी देखी गई। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत के बावजूद न तो स्थायी समाधान हो रहा है और न ही तकनीकी सुधार दिखाई दे रहा है।
मरम्मत कार्य जारी, जल्द सुधार का दावा
विद्युत विभाग के पूर्वी क्षेत्र के कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार रंजन ने बताया कि आंधी-तूफान के कारण 33 केवी और 11 केवी नेटवर्क को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर पोल और तार क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी मरम्मत युद्धस्तर पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही आपूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि बड़े पैमाने पर नुकसान होने के कारण समय लग रहा है।
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