भागलपुर में ई-शिक्षाकोष व्यवस्था पर सवाल, 5 दिनों में 8543 शिक्षकों की हाजिरी गायब, मॉनिटरिंग फेल
भागलपुर में 6 से 10 अप्रैल के बीच ई-शिक्षाकोष रिपोर्ट के अनुसार 8543 शिक्षकों ने उपस्थिति दर्ज नहीं की। यह स्थिति जिला शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली ...और पढ़ें

भागलपुर में ई-शिक्षाकोष व्यवस्था पर सवाल, 5 दिनों में 8543 शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं, मॉनिटरिंग सिस्टम कमजोर
जागरण संवाददाता, भागलपुर। उपलब्ध ई-शिक्षाकोष रिपोर्ट के अनुसार 6 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच कुल 8543 शिक्षकों ने उपस्थिति दर्ज नहीं की। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इनमें से कितने शिक्षक वास्तव में स्कूल पहुंचे और कितने अनुपस्थित रहे, इसकी स्पष्ट जांच व्यवस्था पूरी तरह से कमजोर दिख रही है। इस स्थिति ने जिला शिक्षा विभाग और ई-शिक्षाकोष सेल की मॉनिटरिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिनवार उपस्थिति का हाल
रिपोर्ट के मुताबिक 6 अप्रैल को 1,477 शिक्षकों ने उपस्थिति दर्ज नहीं की। 7 अप्रैल को यह संख्या 1,517 रही, जबकि 8 अप्रैल को 1,386 शिक्षक अनुपस्थित रहे। 9 अप्रैल को 1,411 और 10 अप्रैल को सबसे अधिक 2,752 शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। लगातार बढ़ती यह संख्या विभागीय निगरानी की कमी को उजागर करती है।
पांच दिनों में उपस्थिति का विस्तृत आंकड़ा
- 6 अप्रैल को कुल 17,213 शिक्षकों में से 15,463 ने सेल्फ अटेंडेंस बनाई, जबकि 273 शिक्षकों ने मार्क ऑन ड्यूटी के तहत उपस्थिति दर्ज की।
- 7 अप्रैल को 15,381 शिक्षकों ने सेल्फ अटेंडेंस बनाई और 315 ने मार्क ऑन ड्यूटी से हाजिरी लगाई।
- 8 अप्रैल को 15,544 शिक्षकों ने स्वयं उपस्थिति दर्ज की, जबकि 283 शिक्षकों ने ऑन ड्यूटी विकल्प चुना।
- 9 अप्रैल को 15,802 शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज हुई, जिनमें 283 मार्क ऑन ड्यूटी शामिल रहे, लेकिन 1,411 शिक्षक अनुपस्थित रहे।
- 10 अप्रैल को सबसे कम उपस्थिति दर्ज हुई, जहां 14,171 शिक्षकों ने सेल्फ अटेंडेंस बनाई और 290 ने मार्क ऑन ड्यूटी से हाजिरी लगाई।
ई-शिक्षाकोष सेल की भूमिका पर सवाल
हाल ही में जिला शिक्षा कार्यालय के ई-शिक्षाकोष सेल में चार नए सदस्यों की तैनाती की गई थी, ताकि तकनीकी व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया जा सके। लेकिन अब तक उनके स्तर से कोई ठोस सुधार या प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे पूरी डिजिटल निगरानी व्यवस्था की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय सख्ती की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित समीक्षा और सख्त मॉनिटरिंग की जाती, तो इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति लंबित नहीं रहती। अब विभाग के सामने चुनौती है कि वह इस डिजिटल प्रणाली को प्रभावी बनाकर वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
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