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    भागलपुर के सरकारी स्कूलों में सफाई का सख्त निरीक्षण, लापरवाह एजेंसियों पर कटौती और कार्रवाई, कागज पर हुआ है खेल

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:07 AM (IST)

    भागलपुर जिले के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था की अब सख्ती से मॉनिटरिंग की जाएगी। लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई और भुगतान में कटौती की जा रही है ...और पढ़ें

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    भागलपुर के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था की सख्त जांच, एजेंसियों की देरी पर कार्रवाई

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले के 17 प्रखंडों के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था की अब सख्ती से मॉनिटरिंग की जाएगी। जिला मुख्यालय के निर्देश पर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में सफाई व्यवस्था की जांच कर 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपने का आदेश दिया गया है।

    एजेंसियों की जवाबदेही पर नजर

    स्कूलों की साफ-सफाई का जिम्मा कुल छह एजेंसियों को सौंपा गया है। विभाग की ओर से बताया गया कि भुगतान करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ये एजेंसियां वास्तव में कार्य कर रही हैं या नहीं। कई जगहों से शिकायत मिली थी कि सफाई कार्य नियमित रूप से नहीं हो रहा था, जबकि कुछ स्कूलों में काम बंद रहने के बावजूद प्रखंड और जिला शिक्षा कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी जाती थी।

    मामले का खुलासा तब हुआ, जब जिला स्थापना शाखा में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और विद्यालयों द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट में अंतर पाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। डीपीओ स्थापना अमरेंद्र पांडे ने बताया कि सभी बीईओ को रैंडम तरीके से स्कूलों की जांच करने का निर्देश दिया गया है।

    जांच में यदि प्रधानाध्यापक और बीईओ की रिपोर्ट में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संबंधित एजेंसी पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीपीओ ने स्पष्ट किया कि केवल फीडबैक और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही एजेंसियों को भुगतान किया जाएगा।

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    कहलगांव की एजेंसी पर 30 प्रतिशत भुगतान कटौती

    स्कूलों की सफाई व्यवस्था में अनियमितता मिलने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने संबंधित एजेंसियों पर सख्ती शुरू कर दी है। कहलगांव क्षेत्र में कार्यरत नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेज एजेंसी पर विभाग ने 30 प्रतिशत भुगतान कटौती करने का आदेश दिया है।

    डीपीओ स्थापना अमरेंद्र पांडे ने बताया कि जांच के दौरान कई स्कूलों में एजेंसी द्वारा संतोषजनक ढंग से कार्य नहीं करने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद विभाग ने भुगतान में कटौती की कार्रवाई की।

    सुल्तानगंज में एजेंसी हटा दी गई

    वहीं सुल्तानगंज में कार्यरत सफाई एजेंसी अर्णव को वहां के कार्यों से हटा दिया गया है। विभाग ने इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है। वर्तमान में वहां नई एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है।

    डीपीओ ने बताया कि नई एजेंसी के कार्यों की भी जांच कराई जा रही है, ताकि स्कूलों में सफाई व्यवस्था सही तरीके से और नियमित रूप से संचालित हो सके।

    उद्देश्य और भविष्य की योजना

    जिला शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य है कि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग, एजेंसियों की जवाबदेही और फीडबैक प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

    डीपीओ अमरेंद्र पांडे ने बताया कि आने वाले दिनों में सभी प्रखंडों के स्कूलों में रैंडम जांच अभियान चलाया जाएगा। यदि किसी स्कूल में सफाई एजेंसी या प्रधानाध्यापक द्वारा लापरवाही बरती गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे न केवल एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि बच्चों और शिक्षकों के लिए स्कूलों में साफ-सफाई का स्तर भी सुधरेगा।

    माता-पिता और शिक्षकों को राहत

    स्कूलों में सफाई व्यवस्था की सख्ती से जांच होने की खबर माता-पिता और शिक्षकों के लिए राहत भरी है। लंबे समय से सफाई कार्य में अनियमितताओं और शिकायतों के बाद अब विभाग ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    जिला शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम विद्यालय परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साफ-सफाई व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।